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पिछले साल 853 गांवों में था पानी संकट, इस बार 2 हजार गांव टैंकरों के भरोसे

3 वर्ष पहले
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प्रदेश में प्रचंड गर्मी के साथ ही पानी का भी प्रचंड संकट पैदा हो गया है। 29 शहर पानी के संकट का सामना कर रहे हैं। पिछले साल कम बारिश के चलते सतही जल स्त्रोत सूख गए। इन शहरों में 443 टैंकर्स हर रोज 3082 फेरे कर पानी पहुंचा रहे हैं। इनमें दौसा, अजमेर, किशनगढ़, केकड़ी, बसवा, बांदीकुई, सवाईमाधोपुर, अलवर, झुंझुनूं, बारां, बूंदी, कोटा (टेलएंड एरिया), झालावाड़, जयपुर और चूरू शामिल हैं। ग्रामीण इलाकों में 2000 गांव और ढाणियां ऐसी हैं, जहां पीने के पानी के लिए सतही जल बिलकुल सूख चुका है। इन इलाकों में कंटिंजेंसी के लिए 669 पानी के टैंकर्स हर रोज 3343 फेरे कर पानी पहुंचा रहे हैं। इनमें से कई जगह तो 3 से 4 दिन में पानी सप्लाई हो रहा है। पिछले साल से तुलना करें तो शहरी क्षेत्र में पिछले साल मई-जून में 16 शहर जल संकट का सामना कर रहे थे। इनमें 258 टैंकरों के जरिए हर रोज 1771 फेरे कर पानी सप्लाई हो रही थी। ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले साल 853 गांव ही ऐसे थे, जहां पानी की किल्लत थी और इनमें टैंकरों की 1451 ट्रिप लग रही थी।

पेयजल संकट वाले गांव-शहर एक साल में ही हो गए दोगुने

पिछले साल इस साल

शहर 16 29

टैंकर 258 443

गांव 853 2000

टैंकर 334 669

पिछले चार साल में 36 पेयजल प्रोजेक्ट

कई जगह तो टैंकरों से सप्लाई भी नियमित नहीं

बसवा, बांदीकुई और दौसा, बूंदी, देई, नेनवा में पानी का संकट सबसे ज्यादा है। दौसा में बीसलपुर से पानी सप्लाई को 20 लाख लीटर से बढ़ाकर 25 लाख लीटर प्रतिदिन किया गया है। बांदीकुई और बसवा में पानी टैंकरों के 100 फेरों से सप्लाई हो रही है, लेकिन यह सप्लाई तीन से चार दिनों में हो रही है। बूंदी के देई और नैनवां में जियोफिजिलक सर्वे में सभी 45 सतही जल स्त्रोत खत्म बताए गए हैं। अब यहां के लिए गुड़ा बांध से पानी लाने के लिए योजना तैयार हो रही है। इसके लिए गुड़ा बांध में 10 एमसीएफटी पानी रिजर्व रखा गया है।

पीएचईडी विभाग के प्रमुख सचिव रजत मिश्र ने बताया कि राज्य सरकार ने पिछले साढ़े चार सालों में पेयजल के लिए 36 परियोजनाएं पूरी की हैं। इनसे 30 शहरों को सतही पेयजल सप्लाई प्रोजेक्ट से जोड़ा जा चुका है।

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पानी के लिए हर जगह मारामारी है। फोटो भरतपुर के बाबेन गांव का है।

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