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जिले में 6 माह से दुकानों पर समय से नहीं पहुंच रहा राशन

3 वर्ष पहले
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जिले में जब से राशन आवंटन की जिम्मेदारी खाद्य निगम को सौंपी है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली ही गड़बड़ा गई है। 6 महीने से उपभोक्ता सप्ताह के बाद राशन दुकानों पर राशन पहुंच रहा है, इससे उपभोक्ता व डीलर दोनों ही परेशान है।

राशन देरी से आने की भास्कर ने पड़ताल की तो सामने आया कि सरकार ने राशन आवंटन की जिम्मेदारी तो खाद्य निगम को सौंप दी, लेकिन राशन आवंटन में निगरानी करने के लिए विभाग में अधिकारी लगाना भूल गई। खाद्य निगम मैनेजर का पद चार साल से रिक्त है। तब से संविदा कर्मी ही करीब 2 लाख 60 हजार परिवारों की राशन सामग्री की व्यवस्था संभाल रहे हैं। औपचारिकता के रूप में जरूर बारां के खाद्य निगम मैनेजर को अतिरिक्त चार्ज दे रखा है, लेकिन वे अधिकतर समय बारां ही बिताते है। निगम ने राशन दुकानों तक सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था एक फर्म को ठेके पर दे रखी है। तब से समय पर राशन दुकानों पर राशन नहीं पहुंच रहा है। 24 तारीख को उपभोक्ता सप्ताह खत्म हो जाता है, लेकिन राशन 30 तारीख तक पहुंचता है।

आरोप पर आरोप, लेकिन जांच नहीं

राशन डीलरों द्वारा भी खाद्य निगम के ठेकेदार पर राशन दुकानों पर कम राशन सामग्री पहुंचाने का आरोप लगाया है। इसके अलावा खाद्य निगम के तौल कांटे पर भी सवाल उठाए। इसके लिए जांच के निर्देश भी दिए, लेकिन एक भी मामले में जांच नहीं हुई।

इसलिए राशन पहुंचने में दिक्कत

ठेकेदार द्वारा 12 पहिए के ट्रॉले से राशन राशन दुकानों तक पहुंचाया जा रहा है। जबकि अधिकतर राशन डीलरों की दुकानें ऐसी जगह है, जहां इतना बड़ा वाहन नहीं पहुंच पाता है। ठेकेदार के पास छोटे वाहन नहीं है। ऐसे ठेकेदार द्वारा पहले उन स्थानों पर राशन पहुंचाया जाता है जहां ट्रॉले पहुंच जाता है। जबकि क्रय विक्रय सहकारी समिति द्वारा छोटी गाड़ियों से राशन वितरण करवाया जाता था।

खाद्य निगम में मैनेजर का पद रिक्त है। इसका अतिरिक्त चार्ज बारां निगम मैनेजर को दे रखा है। उनको पाबंद किया जाएगा कि वह दो दिन यहां भी सेवाएं दे। भवानीसिंह पालावत, एडीएम

राज्य सरकार ने राशन आवंटन की जिम्मेदारी तो सौंप दी, लेकिन अधिकारी लगाना भूल गए, मैनेजर का पद रिक्त

पहले क्रय-विक्रय सहकारी समिति की थी जिम्मेदारी

नवंबर 2017 से पहले राशन दुकानों तक सामग्री पहुंचाने का काम क्रय विक्रय सहकारी समितियों के माध्यम से होता था। जिस पर रसद विभाग का नियंत्रण होता था, लेकिन बाद में राशन आवंटन की जिम्मेदारी खाद्य निगम को सौंप दी गई। खाद्य निगम के मैनेजर की जिम्मेदारी होती है कि वह समय पर राशन दुकानों पर राशन सामग्री पहुंचाएं। ऐसे में खाद्य निगम पर दबाव बनाना अब रसद विभाग के अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

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