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150 किमी लंबे दो नहरों तक पानी पहुंचाने को 8 किमी लंबी सुरंग बनाने का काम शुरू

3 वर्ष पहले
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संभाग के तीन जिलों के सबसे अधिक गांवों को सरसब्ज करने वाली परियोजना परवन बांध का काम इन दिनों परवान पर चल रहा है। बांध के निर्माण के साथ ही यहां पर 150 किमी की दो नहरें बनेंगी। इन्हीं नहरों तक पानी पहुंचाने के लिए पहाड़ काे काटकर 8 किमी की सुरंग तैयार की जा रही है।

बांध निर्माण का करीब छह माह से चल रहा है। इस दौरान इसमें खुदाई सहित अन्य काम हो रहे हैं। मोकमपुरा गांव के पास में जिले सुरंग बनाई जा रही है। ऐसा पहाड़ को बचाने के लिए किया जा रहा है। पहाड़ की हरियाली बची रही इसके तहत इसको काटकर 8 किमी लंबी सुरंग बनाई जा रही है। इसी सुरंग से नहरों तक पानी पहुंचाया जाएगा। दरअसल परवन वृहद सिंचाई परियोजना तीनों संभागों के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है। काफी राजनीतिक उठापटक के बाद इस परियोजना का काम अब जाकर शुरू हो पाया है। इस परियोजना में कभी पर्यावरण तो कभी वन विभाग और कभी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की आपत्तियां आईं। सभी दूर करने के बाद अब जाकर यह काम शुरू हुआ है। नहरों तक पानी पहुंचाने के लिए पहाड़ काटकर बनाई जा रही सुरंग जिले की पहली सुरंग है।

उदयपुर के देवास में प्रदेश की सबसे बड़ी सुरंग

राजस्थान की दूसरी बड़ी नहरी सुरंग

परवन बांध पर पहाड़ को काटकर बनाई जा रही सुरंग राजस्थान की दूसरी बड़ी नहरी सुरंग है। इससे पहले उदयपुर के देवास क्षेत्र में बनाई हुई नहरी सुरंग 12 किमी लंबी है। जबकि यह सुरंग 8 किमी लंबी रहेगी। इसके अलावा राजस्थान में कहीं पर भी इतनी लंबी नहरी सुरंग नहीं बनी हुई है। सिंचाई विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता के डी सांदू ने बताया कि परवन में बनाई जा रही नहरी सुरंग राजस्थान की दूरी बड़ी सुरंग है। इस सुरंग के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

भास्कर नॉलेज

यह है सुरंग की फैक्ट फाइल

नहरी सुरंग की लंबाई 8 किमी

4साल में पूरी हो सकेगी सुरंग

150 किमी का नहरी क्षेत्र इस सुरंग से सीधा जुड़ सकेगा।

सुरंग से जुड़ी हुई नहरों से 636 गांवों के 2 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में पानी पहुंचाया जाएगा।

पहले 313 गांव होते सरसब्ज, अब 636 गांव होंगे

परवन वृहद सिंचाई परियोजना से पहले 313 गांवों को सरसब्ज करने का प्लान बनाया गया था। इसके बाद अब इसको बढ़ाकर 636 गांव कर दिए गए हैं। यानी झालावाड़, बारां और कोटा जिले के 636 गांवों में परवन का पानी पहुंच सकेगा। इसके बाद अब इसमें 2 लाख हैक्टेयर भूमि सरसब्ज होगी। इस भूमि को सरसब्ज करने के लिए परवन बांध से 317 मिलीयन घन मीटर पानी छोड़ा जाएगा। इसी तरह पहले जहां परवन बांध से पीने का पानी 800 गांवों को मिलता अब इसका दायरा भी बढ़ाकर 1820 गांव कर दिया गया है। इस बांध से 50 मिलीयन घन मीटर पानी लोगों को मिल सकेगा।

राष्ट्रीय परियोजना में शामिल करने के भी प्रयास

परवन वृहद सिंचाई परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना में शामिल करने के भी प्रयास चल रहे हैं। इसके लिए प्रस्ताव भेजे गए हैं। यदि यह परियोजना राष्ट्रीय परियोजना में शामिल हो जाती है तो क्षेत्र के लोगों को खासा लाभ मिलेगा। केंद्र सरकार से इसमें बजट की कोई कमीं नहीं आएगी। अभी इस परियोजना के तहत अधिकतर भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। परवन वृहद सिंचाई परियोजना सीएम वसुंधरा राजे के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है। इसी का ही नतीजा रहा कि यहां आई सभी बाधाएं दूर होकर इसका काम शुरू हो पाया है।

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