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6 महीने पहले डाली नई लाइन, अभी तक नहीं हुआ परीक्षण, इसलिए वृंदावन में पानी की किल्लत

3 वर्ष पहले
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एक तरफ भीषण गर्मी का दौर चल रहा है तो दूसरी ओर शहर सहित आसपास के गांवों में पानी का भयंकर संकट गहरा रहा है। सबसे अधिक संकट वृंदावन, दुर्गपुरा, मंडावर, गागरोन, झिरनिया सहित अन्य गांवों में है।

पीएचईडी की ओर से वृंदावन गांव में छह माह पहले नई पाइप लाइन भी डाल दी गई, लेकिन अभी तक न तो इस लाइन को शुरू किया गया ओर न ही टेस्टिंग की गई। इसी का नतीजा है कि वृंदावन गांव में टैंकरों से जलापूर्ति की जा रही है। इससे यहां पर शाम को नेशनल हाइवे पर पानी के लिए भारी भीड़ एकत्रित होती है। दरअसल वृंदावन गांव में सिटी फोरलेन के निर्माण के दौरान पुरानी पाइप लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। छह माह पहले यहां नई लाइनें डाली गईं, लेकिन जल्दबाजी में डाली गई पाइप लाइनों की टेस्टिंग पीएचईडी के अधिकारी अभी तक नहीं कर पाए। इससे पता ही नहीं चल पा रहा है कि यहां पाइप लाइनों से घरों तक पानी पहुंच पाएगा या नहीं। एक दो लाइनों की टेस्टिंग की गई तो घरों तक पानी पहुंच ही नहीं पाया। इसके चलते पीएचईडी ने यहां आगे की टेस्टिंग करने की बजाय टैंकरों से जलापूर्ति करनी शुरू कर दी। जबकि नई पाइप लाइन से पानी देना शुरू किया जाना था। अब हालात यह हैं कि लोग टैंकरों से पानी लेने के बाद भी निजी कुओं से पानी के लिए एक से दो किमी का सफर करने को मजबूर हैं। इसी तरह मंडावर गांव में जनता जल योजना की सप्लाई फेल हो गई। अब लोग हैंडपंप और टैंकरों पर निर्भर हैं। दुर्गपुरा गांव में भी हैंडपंपों पर काफी भीड़ रहती है। झालावाड़ के ग्रामीण क्षेत्रों में 20 से अधिक गांव में टैंकर चल रहे हैं।

झालावाड़. दुर्गपुरा में हैंडपंप पर पानी भरने के लिए लगी भीड़।

पीएचईडी के पीछे गांव, फिर भी प्यासा

शहर से सटा हुआ गूढा गांवड़ी गांव पीएचईडी के ठीक पीछे स्थित है, लेकिन उसके बावजूद भी यहां की प्यास दूर करने के लिए कोई प्रयास नहीं हो रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गूढा गांवडी में सालभर से लोग पानी की समस्या से जूझते रहते हैं, गर्मी बढ़ने के साथ ही यह समस्या बढ़ती जाती है, लेकिन अधिकारी इस समस्या का हल नहीं निकाल पा रहे हैं। कई बार पानी की समस्या को हल करने के बारे में अधिकारियों से मांग की गई है, लेकिन अभी तक समस्या हल नहीं हो पाई है।

गंदे पानी की सप्लाई का नहीं हुआ हल: शहर में अभी गंदे पानी की सप्लाई हो रही है। जेल रोड, नला मोहल्ला, फीलखाना सहित अन्य क्षेत्रों में गंदे पानी की आपूर्ति हो रही है। जेल रोड निवासियों ने बताया कि पानी में बदबू आ रही है। इससे यह पीने में भी नहीं आ पा रहा है। इस समस्या से अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। उसके बावजूद भी समस्या हल नहीं हो पा रही है।

वृंदावन में लाइनों की टेस्टिंग होनी है। अभी यहीं पर व्यवस्था की जा रही है। वैसे इस गांव में पर्याप्त टैंकर चलाए हुए हैं, इससे यहां लोगों को समस्या नहीं आ रही है। शहर में पानी की व्यवस्था ठीक है। मंगलसिंह परमार, एईएन पीएचईडी

गागरोन में हैंडपंप का पानी खारा: गागरोन गांव के बीच में लगा हुआ हैंडपंप खारा पानी देता है। इससे पानी पीने लायक नहीं है। लोगों को दूर दराज से पानी लाना मजबूरी बना हुआ है। लोगों ने बताया कि निजी कुओं और दूर लगे हैंडपंप से पानी लाते हैं। साइकिल और अन्य वाहनों पर बर्तन रखकर पानी लेकर आते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में अभी समस्या नहीं है। मंडावर में जनता जल योजना में दिक्कत है,लेकिन वहां हैंडपंप सभी चालू हैं। इसलिए समस्या नहीं आने दी जा रही है। इसी तरह दुर्गपुरा सहित अन्य गांवों में भी फीडबैक लेते हैं। वहां भी समस्या नहीं है। नरेंद्र सिंह मुक्तावत, एईएन पीएचईडी झालरापाटन

बांध के किनारे बसा पोंडला गांव भी प्यासा

डग. ग्राम पंचायत क्यासरा के गांव पोंडला की नई बस्ती में लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। इसके चलते लोगों को एक से दो किमी दूर जाकर पानी लाना मजबूरी बना हुआ है। यह गांव बांध के किनारे पर बसा हुआ है, लेकिन उसके बावजूद भी गांव में लोगों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। बांध से एक बूंद भी पानी नहीं मिल पा रहा है। पोंडला गांव की आबादी 400 है। यहां सुबह से ही महिलाएं पानी की तलाश में दर-दर भटकती हैं। भीषण गर्मी में पूरा परिवार पानी लेने पहुंचता है। ऐसे में कई बार महिलाएं बीमार भी हो जाती है। ग्रामीणों ने बताया कि हर साल गर्मी में पानी की समस्या से लोग जूझते हैं, लेकिन फिर भी इस बड़ी समस्या का हल नहीं हो पा रहा है।

हैंडपंप हैं, लेकिन चालू नहीं

पोंडला गांव में हैंडपंप तो हैं, लेकिन एक भी चालू नहीं है। इसी समस्या को लेकर माधवी परियोजना से लाइन बिछाई गई और तीन प्वाइंट बनाकर पानी दिया जाने लगा, लेकिन उसके बावजूद भी यहां नई बस्ती सहित अन्य क्षेत्रों के लोगों को एक बूंद पानी नहीं मिल पा रहा है। गांव में स्कूल में भी भारी जल संकट है, हालांकि अभी गर्मियों के अवकाश चल रहे हैं, लेकिन सालभर बच्चे पीने के पानी के लिए भटकते रहते हैं।

सरकारी ट्यूबवेल पर कब्जा

डग कस्बे में इन दिनों भीषण गर्मी के चलते कस्बे में लगी ट्यूबवेलों ने लगभग दम तोड़ दिया भास्कर में प्रकाशित हुई खबर के बाद प्रशासन ने हरकत में आकर डग कस्बे में लगी ट्यूबवेलों पर प्रभावशाली लोगों ने ट्यूबवेल पर लगी नलियों को कटवा दिया था, कस्बे के नाई मोहल्ले में लगी ट्यूबवेल पर कोई कार्यवाही नहीं की गई थी इसके चलते प्रभावशाली लोगों द्वारा ट्यूबवेल पर कब्जा कर अपने घरों में पानी पहुंचाने के लिए अतिक्रमण कर लिया और पाइपों का जाल बिछा दिया। इसके चलते मोहल्लेवासियों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अभी तक इसको नहीं ं हटाया जा सका

आवर. धतुरिया गांव में व्यर्थ बहता श़ुद्ध पानी।

डग. भीषण गर्मी में पीने के लिए पानी भी एक किमी दूर से लाना पड़ रहा है।

हजारों लीटर व्यर्थ बहता है पानी

आवर. भीषण गर्मी में एक तरफ जहां लोग पानी की समस्या से जूझ रहे हैं वहीं कस्बे में हजारों लीटर फिल्टर पानी व्यर्थ बह रहा है। गागरीन पेयजल परियोजना से जुडे कई गांवों में लगी पीएसपी पर लगे नलों में टोटियों के अभाव में रोजाना शुद्ध जल की बर्बादी हो रही है। परियोजना में ढिलाई के चलते इसका कार्य पूरा नहीं हो पाया है। इसके चलते अभी भी इससे जुडे कई गांवों में टंकियों का निर्माण नहीं हो पाया है। डग क्षेत्र में जारी टंकी एवं पाइप लाइनों के कार्य के चलते टेस्टिंग के लिए दिन में दो तीन बार परियोजना से पानी की सप्लाई होती है। ऐसे में परियोजना से जुडे गांवों में लगे नलों से पानी व्यर्थ बहता रहता है।

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