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भूमिगत आग से प्रभावित 54 हजार परिवार बेलगढ़िया में बसाए जाएंगे

3 वर्ष पहले
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अग्नि और भू-धंसान प्रभावित इलाकों के 54 हजार परिवारों का बेलगढ़िया नया आशियाना बनेगा। गगनचुंबी इमारतों में विस्थापितों का आवास आकार ले रहा है। इन आकार ले रहे आवासों में खुशियों के सपने पल रहे हैं। खुशियां... एक नई बेहतर जिंदगी की। एक ऐसी जिंदगी की... जो जमीनी आग में न जले। जो गैस की घुटन से मुक्त हो।

हर परिवार को 4.50 लाख का घर : प्रभावित लोगाें को 400 स्क्वायर फीट का मकान मिलेगा। जिसमें किचन, डायनिंग हॉल, एक बेडरूम, शौचालय शामिल है। कॉलोनी में सड़कों का जाल बिछेगा।

500 दिनों की मजदूरी विस्थापित यहां आकर तत्काल आर्थिक संकट का सामना न करें, इसके लिए जेआरडीए हर परिवार को शिफ्टिंग के साथ ही 500 दिनों का न्यूनतम मजदूरी मिलेगी।

मुफ्त बिजली और पानी

विस्थापितों को मुफ्त बिजली और पानी की सुविधा है। यहां विद्यालय, बैंक और मार्केटिंग काम्पलेक्स भी बनाया गया है। मंदिर और मस्जिद दोनों ही बनाया गया है।

जमीनी आग के सवाल पर एक्सपर्ट की राय

जलते कोयले को बचाना है तो जल्द खनन कर निकालना होगा

झरिया व आसपास के इलाके में जल रहा कोयला विश्व स्तरीय है। इसे जलने से बचाने का एक ही उपाय है कि इन्हें निकाला जाए। फायर प्रोजेक्ट में खनन ही इसका रास्ता है। फायर प्रोजेक्ट में खनन कर सिर्फ आप कोयले को बर्बाद होने से ही नहीं बचाते, बल्कि आग पर भी काबू पाते हैं। समय रहते जल रहे कोयले को खनन कर निकाल लेना जरूरी है। - दीपक कुमार, माइंस सेफ्टी विषय पर शोधकर्ता

दीपक कुमार, माइंस सेफ्टी विषय पर शोधकर्ता

ओपनकास्ट माइनिंग के जरिए निकालना होगा जलता कोयला

झरिया जैसे फायर एरिया में बिना ओपन कास्ट कोयला निकालना संभव नहीं है। ऐसे क्षेत्रों में ऊपरी सतह में पहले ओपन कास्ट माइनिंग से कोयला निकालना होगा, फिर आग बुझ जाने के बाद नीचे के कोयले को सामान्य माइनिंग प्रक्रिया से खनन करना होगा। जल रहे कोयले को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर खनन करना होगा। इसके लिए व्यापक योजना बनानी होगी। - डॉ. राजेंद्र सिंह, मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईआर सिंफर

डॉ. राजेंद्र सिंह, मुख्य वैज्ञानिक, सिंफर

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