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प्रक्रिया ऑनलाइन, केंद्र वाले पुरानी डेट में ऑफलाइन पीयूसी बना रहे, भास्कर ने टीआई को मौके पर बुलाकर फर्जीवाड़ा पकड़वाया

3 वर्ष पहले
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वाहनों को पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट (पीयूसी) जारी करने की प्रक्रिया करीब एक महीने पहले ऑनलाइन हो चुकी है। अवधि पार होने के एक दिन बाद से ही पीयूसी के नवीनीकरण के लिए विभाग द्वारा 200 से 1000 रुपए तक (वाहनों के आधार पर) पैनल्टी वसूली जाती है, लेकिन मोबाइल वेन में प्रदूषण जांच केंद्र चलाने वाले कुछ लोग इस भारी पैनल्टी से बचने का लालच दे अपनी जेब भर रहे हैं। वाहन मालिकों से ये लोग सरकारी पैनल्टी की आधी कीमत वसूलते हैं। पहले ऑफलाइन प्रक्रिया से बैक डेट में पीयूसी बनाते हैं फिर उसे ऑनलाइन रिन्युअल कर नया पीयूसी बना कर देते हैं। भास्कर ने मंगलवार को स्टिंग किया तो यह खुलासा हुआ। डीटीओ के परिवहन निरीक्षक को भी मौके पर बुलाकर यह फर्जीवाड़ा पकड़वाया।

सभी तरह के वाहनों के लिए प्रदूषण नियंत्रण संबंधी जांच अनिवार्य है। जांच के बाद वाहनों को पीयूसी जारी किया जाता है। विभाग ने विभिन्न प्रदूषण जांच केंद्रों को अधिकृत किया है। सभी तरह के वाहनों के लिए पीयूसीसी की वैधता अवधि छह महीने है। प्रमाण पत्र, स्टीकर आदि संबंधित सामग्री भी इन केंद्रों को विभाग/अधिकृत एजेंसी ही उपलब्ध कराती है। वाहनों की (प्रदूषण संबंधी) जांच व प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया ऑफलाइन थी। केंद्र संचालकों को विभिन्न वाहनों को जारी किए प्रमाण पत्रों का विवरण एक रजिस्टर में इंद्राज करना होता था। एक महीने पहले यह प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई। भास्कर रिपोर्टर मंगलवार को अपनी बाइक का पीयूसी लेने गया तो इस गड़बड़ी का पता चला। डीटीओ मक्खनलाल जांगिड़ को जानकारी दी तो उन्होंने परिवहन निरीक्षक उम्मेद सिंह को मौके पर भेजा।

एक माह पहले ऑनलाइन हुई थी प्रक्रिया, भारी पैनल्टी से बचने के चक्कर में वाहन मालिक आ रहे झांसे में

परिवहन निरीक्षक को देख हड़बड़ाया ऑपरेटर, परिवहन निरीक्षक आज सौंपेंगे रिपोर्ट

पुराने तरीके से प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र जारी करते पकड़ा। वेन में बैठे ऑपरेटर से पूछताछ करते टीआई।

यह है निर्धारित शुल्क व पेनल्टी

दुपहिया वाहन के लिए 50 रुपए, तिपहिया व चार पहिया वाहन (पेट्रोल/एलपीजी/सीएनजी) के लिए 70 तथा डीजल वाहनों के लिए 100 रुपए शुल्क है। प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बाद पैनल्टी भी ई-मित्र से ऑनलाइन ही भरनी होती है। अवधि पार पीयूसी नवीनीकरण के लिए दुपहिया वाहनों के लिए एक माह की अवधि तक 200 व इसके बाद 500 रुपए तक पैनल्टी है। पेट्रोल चलित तिपहिया/चार पहिया वाहनों के लिए 500 रुपए तथा डीजल चलित तिपहिया/चार पहिया वाहनों के लिए 1000 रुपए पैनल्टी है। रिन्युअल के लिए आने वालों को इस भारी पैनल्टी से बचाने का लालच दिया जाता है।

इस तरह हो रहा राजस्व का नुकसान

भास्कर रिपोर्टर ने पीयूसी के लिए डीटीओ के सामने पेट्रोल पम्प के पास खड़ी मोबाइल वेन में संचालित केंद्र के ऑपरेटर से पूछा। उसने कहा कि पीयूसी एक्सपायर हो चुका है तो ई-मित्र पर पैनल्टी जमा करानी होगी। रिपोर्टर ने सस्ते में जुगाड़ की बात कही तो कहा कि 300 रुपए में काम हो जाएगा। बाइक की डिटेल पूछ ऑफलाइन प्रक्रिया से ही बैक डेट का पीयूसीसी बनाने लगा। बाद में इसी पीयूसी का नंबर ऑनलाइन में प्रयोग कर नया पीयूसीसी बना देता। ऐसे नए पीयूसी पर केवल 50 रुपए ही सरकार को देने पड़ते हैं जबकि वाहन मालिक से 300 रुपए वसूलता।

प्रदूषण जांच केंद्र ऑपरेटर ने भास्कर रिपोर्टर से पूछा कि पैनल्टी की रसीद है क्या? रिपोर्टर ने कहा कि वैसे ही बना दाे तो ऑपरेटर ने अपने बैग में रखा ऑफलाइन प्रक्रिया वाले पीयूसीसी का बंच निकाला और उसमें से एक कागज निकाल कर प्रिंटर में लगा दिया। इसके बाद बाइक का फोटो लिया तथा नंबर व मॉडल आदि जानकारी कंप्यूटर में फीड की। वह प्रिंट निकालने ही वाला था कि रिपोर्टर की जानकारी पर डीटीओ से परिवहन निरीक्षक उम्मेद सिंह को वहां आया देख हड़बड़ा गया। रिपोर्टर को पांच सौ रुपए का नोट लौटाते हुए कहने लगा कि मैं गलत काम नहीं करता। इस पर परिवहन निरीक्षक सिंह ने पूछा कि जब गलत काम नहीं करता तो ऑफलाइन वाला पीयूसी तेरे हाथ में क्याें है। नोटिस देने के बाद भी ऑफलाइन के पीयूसीसी तुमने जमा नहीं कराए। इसी दौरान ऑपरेटर का एक और साथी आ गया और कहने लगा कि ये पीयूसी तो दूसरी वेन की मशीन ठीक कर रहा इंजीनियर जमा कराने जयपुर लेकर जाएगा, यह बैग भी उसी का है। वह व्यक्ति बैग वहां से उठा ले गया ताकि परिवहन निरीक्षक उसे जब्त न कर लें। ऑपरेटर से पूछताछ व सारी कार्रवाई में शाम हो गई थी इस कारण पूरे मामले की रिपोर्ट परिवहन निरीक्षक बुधवार को जिला परिवहन अधिकारी को सौंपेंगे। इस संबंध में डीटीओ मक्खनलाल जांगिड़ ने बताया कि परिवहन निरीक्षक से रिपोर्ट लेकर उक्त प्रदूषण जांच केंद्र के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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