राजकीय अस्पताल में नवनिर्मित वातानुकूलित ओपीडी भवन का लाभ यहां आने वाले मरीजों को नहीं मिल रहा है। अस्पताल में प्रतिदिन करीब 800 रोगियों की ओपीडी रहती है। भामाशाह सुरेश भगेरिया परिवार ने 55 लाख रुपए की लागत यह भवन बनवाया था। इसका लोकार्पण 14 दिन पहले छह मई को कलेक्टर दिनेश कुमार यादव ने किया था। लेकिन अस्पताल प्रभारी व डॉक्टरों की आपसी खींचतान के चलते वे पुराने भवन में ही बैठ रहे हैं। इसके कारण रोगियों को सीएचसी के प्रवेश द्वार व बाहर खुले में फुटपाथ पर बैठ कर बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। ओपीडी के नए भवन में कमरों के बंटवारे को लेकर चिकित्सकों में खींचतान इतनी बढ़ी कि सीएमएचओ डॉ. सुभाष खोलिया को हस्तक्षेप करना पड़़ा। डॉ. खोलिया द्वारा कमरा आबंटन के आदेश की पालना करने के बजाय प्रभारी चिकित्सक डॉ. सुमित्रा ओला, उनके पति डॉ. कर्णसिंह ओला पुराने भवन के कमरों में ही मरीज देखते रहे। जिसके चलते राजकीय अस्पताल के प्रवेश द्वार और उसके बाहर रोगियों की लगी रही। रोगी व उनके परिजन तेज गर्मी में परेशान हो रहे हैं।
चिड़ावा. धूप में फुटपाथ पर बैठकर बारी का इंतजार करते रोगी।
सीएमएचओ ने कमरे आबंटित किए थे, फिर भी खींचतान जारी
चिड़ावा सीएचसी के नए वातानुकूलित ओपीडी भवन में सीएमएचओ डॉ. सुभाष खोलिया ने प्रभारी चिकित्सक डॉ. सुमित्रा ओला को कमरा नंबर दो, उनके पति डॉ. कर्णसिंह ओला को एक, डॉ. रघुवीर सिंह मील तीन, डॉ. कैलाश राहड़ को चार, डॉ. परमेश्वर व डॉ. देवेंद्र को पांच, डॉ. जितेंद्र को छह, डॉ. शिवा को सात, डॉ. टीना को कमरा नंबर आठ, दंत चिकित्सक डॉ. तरुण और डॉ. प्रेरणा को नए भवन में जगह नहीं होने के कारण पुराने ओपीडी ब्लॉक के कमरा नंबर पांच में रोगी देखने के लिखित निर्देश दिए थे। सीएमएचओ के निर्देशानुसार नई डेंटल चेयर भी इसी कमरे में रखनी थी, लेकिन प्रभारी चिकित्सक ने सीएमएचओ की आदेशों की पालना नहीं करवाई।
नए भवन में अलग कमरे और ओपीडी पर्ची काउंटर : नए ओपीडी भवन में चिकित्सकों के लिए आठ कमरे, महिला-पुरूषों के लिए अलग-अलग ओपीडी पर्ची के दो काउंटर, वातानुकूलित प्रतीक्षालय व भवन के बाहर बड़ा टीन शैड लगवाया गया।
भामाशाह द्वारा बनवाए ओपीडी भवन पर लगा ताला।
पहले भी प्रसव केस को लेकर हो चुकी खींचतान
चिड़ावा सीएचसी में चिकित्सकों के बीच आपसी खींचतान की ये स्थिति पहली बार नहीं बनी है। इससे पहले भी प्रसव के दौरान ऑपरेशन थियेटर में सीजेरियन-नार्मल डिलेवरी की बात को लेकर महिला चिकित्सक आपस में उलझ चुकी हैं। इसके चलते संबंधित चिकित्सकों को एपीओ-स्थानांतरण तक की कार्रवाई झेलनी पड़ी थी। नया ओपीडी भवन बनवा कर देने वाले ट्रस्ट के स्थानीय प्रतिनिधि डॉ. केएम मोदी ने इस स्थिति को पीड़ादायक बताया।