‘अरे आप बाइक से आए हैं बच्चे को लेकर और हेलमेट भी नहीं पहना है’, ‘भाई साहब, हेलमेट तो सिर के लिए है और आपने हाथ में लटका रखा था।’, ‘सर, आपने सीट बेल्ट नहीं लगाया था, मैंने देखा सीसीटीवी फुटेज में, ये गलत बात है।’
इस तरह की बातें कहने वाले ये कोई ट्रैफिक पुलिस के सिपाही नहीं हैं, ये हैं शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. पीएल काजला, जो अपने यहां आने वाले बच्चों के परिजनों को इस तरह की सीख देते हैं। वे साफ कहते हैं, ‘देखिए, अगली बार आप बाइक से आते हैं और हेलमेट नहीं पहना होगा, कार से आते हैं और सीट बेल्ट नहीं लगाया होगा तो आई एम वैरी सॉरी टू से, मैं आपके बच्चे का इलाज नहीं करूंगा।’ शहर में चूरू रोड स्थित अस्पताल ‘पल्स’ में प्रभारी डॉक्टर काजला बच्चे को तो बाद में देखते हैं (अगर बच्चा सीरियस न हो), पहले उसे लेकर आए परिजनों से कहते हैं कि वे बाइक से आए हैं और हेलमेट को हाथ में लटका रखा था तो ऐसा क्यों किया?
डॉ. काजला के ऐसे सवाल सुन कर वे शर्मिंदा तो होते ही हैं, अचंभित होते हैं कि डॉक्टर को यह सब कैसे पता चला। डॉक्टर उन्हें बताते हैं कि अस्पताल के बाहर भी सीसीटीवी कैमरे लगा रखे हैं। मॉनीटरिंग के लिए एक आदमी बैठा रखा है जिसका यही काम है कि बिना हेलमेट और बिना सीट बेल्ट लगाए कार में आने वालों पर नजर रखे। वह इसकी जानकारी तत्काल डॉक्टर को देता है। डॉ. काजला कह देते हैं कि अगली बार बिना हेलमेट पहने या बिना सीट बेल्ट लगाए आए तो वे बच्चे का इलाज नहीं करेंगे।
एक डाॅक्टर ऐसे भी, जो कहते हैं-आपने हेलमेट हाथ में लटका रखा था, कार चलाते वक्त सीट बेल्ट नहीं लगा रखा था, अगली बार ऐसा हुआ तो सॉरी...मैं आपके बच्चे का इलाज नहीं करूंगा
अस्पताल में बीमार बच्चों के परिजनों को यातायात नियमों की जानकारी देते डॉ. काजला।
बिना हेलमेट आने वाले एमआर की कॉल भी स्वीकार नहीं करते
डॉ. काजला उनसे मिलने बाइक पर आने वाले एमआर को भी नहीं बख्शते, वे बिना हेलमेट आए एमआर की कॉल स्वीकार नहीं करते। वे साफ कहते हैं, ‘आप लोग दिनभर शहर में, हाइवे पर बाइक चलाते हैं, कोई हादसा हो गया तो?, अब उनके पास कोई एमआर ऐसा नहीं आता, हां पैदल आने वाले एमआर का पता उनको सीसीटीवी कैमरे से चल जाता है।
यूं मिली प्रेरणा : साथी के पिता के साथ हादसा हुआ तभी तय कर लिया था कि उन्हीं का इलाज करूंगा जिनके परिजन नियमों की पालना करेंगे
डॉ. काजला बताते हैं, ‘मेरे स्टाफ का एक साथी अपने पिता को बाइक पर लेकर कहीं गया था। रास्ते में बाइक फिसलने से दोनों गिर गए, दोनों ने ही हेलमेट नहीं पहना था, चालक को तो चोट नहीं आई, लेकिन उनके पिता के सिर में गंभीर चोट आई। एक महीने तक इलाज कराना पड़ा, थैंक गॉड, वे अब ठीक हैं। उसके बाद तय कर लिया, मैं उन्हीं के बच्चों को ट्रीट करूंगा, जो इन नियमों का पालन करेंगे।’ डॉ. काजला बताते हैं, रोज 80-90 की ओपीडी है। 70% लोग बाइक पर बच्चे को लेकर आते हैं। अधिकांश या तो बिना हेलमेट होते हैं या हेलमेट को हाथ में लटकाया होता है। अब उनकी समझाइश का असर नजर आने लगा है। दुबारा बच्चे को लेकर आते हैं तो हेलमेट पहना होता है और कार में सीट बेल्ट लगाया होता है।
कैंप लगा निशुल्क इलाज भी करते हैं
डॉ. काजला जरूरतमंद परिवार के बच्चों को दवा भी फ्री देते हैं। बिल में भी रियायत देते हैं। वे प्रधानमंत्री मातृत्व दिवस, स्वास्थ्य सेवा आपके द्वार अभियानों से भी जुड़े हैं। इस सप्ताह जिले के 5 गांवों व शहर के एक स्कूल में निशुल्क कैंप लगाए जिनमें हरेक में 70 से 80 बच्चों का इलाज किया। भ्रूण हत्या के खिलाफ वे स्कूलों में जाकर भी जागरूक करते हैं। जिला मुख्यालय पर जीबी मोदी स्कूल सहित बिसाऊ, हमीरी, लोयल, जाखल आदि स्थानों पर स्कूलों में वे कैंप लगा चुके हैं।
(अगर बच्चा सीरियस न हो)