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खालसा मेरो रूप है खास, खालसा में मैं करूं निवास...

3 वर्ष पहले
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बैसाखी का त्योहार शहर में खालसा साजना दिवस के रूप में मनाया गया। शहर के सभी गुरुद्वारों में रखे गए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के अखंड पाठों का भोग डाला गया और गुरुबाणी शब्द गायन हुए व सिख संगतों ने अमृत समय में अपने गुरु गोबिंद सिंह साहिब के समक्ष माथा टेका।

गुरुघर के प्रवक्ता बलविंद्र सिंह के अनुसार सिंह सभा गुरुद्वारा रेलवे जंक्शन पर धार्मिक दीवान सजाए गए। इसमें भाई संतोख सिंह द्वारा वाहो-वाहो गुरु गोबिंद सिंह, आपे गुरु चेला, अमृत नाम निधान है, रस पियो भाई, खालसा मेरो रूप है खास, खालसा में मैं करूं निवास गुरुबाणी शब्द का गायन किया। इस अवसर पर जत्थेदार गुरजिंद्र सिंह ने खालसा दिवस की स्थापना पर प्रकाश डालते हुए संगतों को अमृत संचार की महत्ता एवं पंज प्यारों की संरचना के बारे में बताया कि पंज प्यारों को अमृत पिलाकर सिर्फ सिख धर्म ही नहीं बल्कि सभी धर्मों की रक्षा को लेकर खालसा पंथ की स्थापना की गई थी। उन्होंने बताया कि ऐतिहासिक गुरुद्वारा गुरुतेग बहादुर साहिब में भी इस अवसर पर धार्मिक दीवान सजाया गया। इसमें भाई सुखप्रीत सिंह के रागी जत्थे ने इन्हीं की कृपा से सजे हम हैं, नहीं मौसो गरीब, करोर परे गुरुबाणी शब्द का गायन किया। भाई मूसा सिंह के ढाडी जत्थे ने पंज प्यारों को अमृत पान से लेकर खालसा पंथ की स्थापना की गाथा अपनी ढाडी वारों में पिरो कर संगतों को निहाल किया। इस अवसर पर सरदार मालिक सिंह चीमा, हेड ग्रंथी ज्ञानी गुरुविंद्र सिंह, सरदार सिंह, दर्शन सिंह कोचर, गुरजिंद्र सिंह, गुरदीप मक्कड़, कमलजीत ग्रेवाल, जसबीर सिंह, नंदलाल मिगलानी, राधेश्याम चिलाना, शालू चिलाना, सुभाष अनेजा, भगवंत सिंह, अशोक छिब्बर, गोबिंद बंसल, अनिल बंसल, सतपाल वर्मा व अमरीक सिंह मौजूद रहे।

धर्म-कर्म
बैसाखी का त्योहार शहर में खालसा साजना दिवस के रूप में मनाया, लगाए भंडारे
जींद. बैसाखी पर्व पर गुरुद्वारे में शबद कीर्तन करते हुए सिख समुदाय के लोग।

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