नेताओं के भाषणों तक सिमटा शिविर, न ध्यान लगा न हुआ महायज्ञ
राजकीय महिला कॉलेज में चल रहे दो दिवसीय ध्यान महायज्ञ का रविवार को समापन हो गया। शिविर में नेताओं के भाषण सुनने के अलावा लोगों को कोई खास फायदा नहीं हुआ। पहले दिन की तरह दूसरे दिन भी नेताओं ने लंबे-चौड़े भाषण दिए। नेताओं ने खुद के अनुभव से लेकर राजनीतिक भाषण दिए। इस दौरान कोई ध्यान नहीं लगा, न महायज्ञ हुआ। दूसरे दिन मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने शिविर के बाहर पत्रकारों के समक्ष बातचीत में विपक्षी दलों पर निशाना साधा।
केंद्रीय मंत्री बोले- कांग्रेस के सामने समस्या है, उसे मंथन करने की जरूरत : केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह ने कहा है कि हम तो राजनीतिक आदमी हैं। हमारा ध्यान तो हमारा ही है। ध्यान की तो उसको आवश्यकता है, जो पैसे खा गए। लेकिन मुझे इसकी कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पांच छह खेमे में बंटी हुई है। मेरा भी सातवां खेमा होता था। कांग्रेस के सामने समस्या है उसे मंथन करने की जरूरत है। कौन सा नेता कौन सी पगड़ी पहनेंगे यह उनको तय कर लेना चाहिए।
जींद. राजकीय महिला कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में मंच पर उपस्थित केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह व अन्य। दूसरी तरफ कार्यक्रम में उपस्थित लोग। फोटो | भास्कर
‘बुराइयों को दूर करने के लिए हमें मानवीय कार्य करने चाहिए’
ध्यान महायज्ञ में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ध्यान से बड़ी से बड़ी समस्या व बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है। ध्यान मधु की तरह है इसे जितना पीया जाए उतना अच्छा है। भौतिक युग में नैतिकता की कमी आती जा रही है। समाज मैं फैली बुराइयों को दूर करने के लिए हमें मानवीय कर्म करने चाहिए। इस अवसर पर उनके साथ विधायक प्रेमलता, स्वामी राघवानंद, भाजपा जिलाध्यक्ष अमरपाल राणा, सोनीपत लोकसभा क्षेत्र के प्रभारी ओपी पहल, भाजपा महिला विंग की जिला अध्यक्ष पुष्पा तायल, रामफल लौट, पूर्व कुलपति डाॅ. एके चावला अन्य साधक मौजूद रहे।
ध्यान में बैठने से शांति मिलती है : प्रेमलता
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मनुष्य को काफी परेशानियां घेरे हुए हैं। इसका मुख्य कारण व्यक्ति का किसी न किसी क्षेत्र में कमजोर रहना है। इन सब परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए ध्यान साधना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि ध्यान करने से सामाजिक बुराइयों को जड़ से खत्म तथा अपराध पर अंकुश पाया जा सकता है। विधायक प्रेमलता ने कहा कि ध्यान में बैठने से शांति मिलती हैं। शांति ही जीवन का मुख्य आधार है, इसलिए पूरे विश्व को शांतिमय बनाने के लिए ध्यान को जीवन का अभिन्न अंग बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ध्यान में बैठने के लिए उचित माहौल का होना जरूरी है, इसलिए व्यक्ति को अपने आसपास ध्यान साधना का माहौल तैयार करना चाहिए।