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पहले कर्मचारियों को काम करने से रोका फिर फेंका नगर परिषद कार्यालय में कूड़ा

3 वर्ष पहले
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नगर परिषद में लगातार दूसरे दिन मंगलवार को भी कोई कामकाज नहीं हो सका। कुछ कर्मचारी सफाई कर्मियों के समर्थन में हड़ताल पर हैं तो कुछ नगर परिषद कर्मचारियों को सुबह काम करने से रोक दिया गया। इस दौरान दिनभर नगर परिषद के सभी कमरों पर ताले लटके रहे। इतना नहीं सफाई कर्मियों ने सुबह ही नगर परिषद कार्यालय में कूड़ा फेंक कर रोष जताया। हालांकि कूड़े को कुछ देर के बाद उठवा दिया गया लेकिन नगर परिषद में दिनभर कोई भी कामकाज न हो पाने के कारण सैकड़ों लोग जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं। कोई भी कार्य न हो पाने के कारण लगातार दूसरे दिन मायूस होकर लौटना पड़ा। नगर परिषद में कोई भी कामकाज न हो पाने के कारण अब शहरवासी पार्षदों से लेकर सरकार तक को कोसने लगे हैं। लोगों का कहना है कि नगर परिषद में कोई भी कार्य न होने के कारण उनके जरूरी कार्य अटक गए हैं। इसके कारण उन्हें नुकसान होगा।

पिछले 6 दिनों से हड़ताल पर चल रहे विभिन्न नगरपालिकाओं/ नगरपरिषद के सफाई कर्मी मंगलवार को नेहरू पार्क में एकत्र हुए। इस दौरान सर्व कर्मचारी संघ के विभिन्न विभागों की यूनियनों के पदाधिकारी भी पार्क में पहुंचे और सफाई कर्मियों की मांगों का समर्थन किया। इसके बाद सफाई विरोध प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे और एसडीएम वीरेंद्र सहरावत को मांगों का ज्ञापन सौंपा। सफाई कर्मियों ने इसमें सरकार से ठेका प्रथा समाप्त करने, ठेका कर्मचारियों को पक्का करने, 15 हजार रुपए न्यूनतम वेतन लागू करने, शिशु शिक्षा भत्ता दोगुणा करने व पंजाब के समान वेतनमान देने की मांग की है।

जिले की सभी नगरपालिका/नगरपरिषद के सफाई कर्मियों ने मांगों को लेकर किया विरोध प्रदर्शन

जींद. मांगों को लेकर जिलेभर के सफाई कर्मचारी शहर में विरोध प्रदर्शन करते हुए।

शहर की सड़कों पर फैला 450 टन कूड़ा-कर्कट

सफाई की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं

सफाई कर्मियों की हड़ताल के चलते दिनोंदिन शहर में सफाई व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। शहर की कोई भी ऐसी गली या सड़क नहीं रही जिस पर अब कूड़़े की ढेर न लगे हों। करीब 450 टन कूड़ा मंगलवार तक सड़कों पर बिखरा पड़ा है। इसके कारण शहर के कई सड़कों से निकलने में अब वाहन चालकों व राहगीरों को उठ रही बदबू के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इतना सब कुछ होने के बाद न तो शहर की सरकार और न ही प्रशासन इस पर कोई कार्रवाई कर रहा। इससे शहरवासियों में रोष है। शहरवासी शंकर, अतुल, वीरेंद्र, श्यामलाल, भूषण आदि का कहना है कि जब पूरा शहर नगरपरिषद को तमाम तरह के टैक्स देता है तो सफाई करवाना भी उसकी जिम्मेदारी है। यदि सफाई कर्मी हड़ताल पर हैं तो फिर नगर परिषद को शहर की सफाई के लिए कोई दूसरी वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।

जींद. मांगें नहीं माने जाने से नाराज सफाई कर्मचारियों की ओर से नगर परिषद कार्यालय में फेंका गया कूड़ा।

सफाई कर्मियों की हड़ताल के चलते पुराने ठेकेदार को शहर में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर सफाई करने के निर्देश दिए गए हैं। उनके द्वारा सफाई की भी जा रही। इसी कारण शहर में सफाई व्यवस्था इतनी नहीं बिगड़ी है।\\\'- पूनम सैनी, प्रधान नगरपरिषद जींद।

ठेकेदार से करवाएंगे सफाई

काम न करने वाले कर्मियों की भेजेंगे रिपोर्ट

नगर परिषद ईओ को आदेश दिए गए हैं कि जो कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं आ रहे। उनकी गैर हाजिरी लगाई जाए। इसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी। यदि कोई कर्मचारी काम करना चाहता है और उसे कोई दिक्कत है तो वह प्रशासन को बताए। उसे सुरक्षा से लेकर हर तरह की मदद की जाएगी।\\\' - वीरेंद्र सहरावत, एसडीएम जींद

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