जींद | भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय संगठन मंत्री मुकुल कानिटकर ने गुरुवार को सीआरएसयू का दौरा किया। इस मौके पर उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के समक्ष भारतीय शिक्षण पद्घति पर अपने विचार सांझा किये। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो आरबी सौलंकी ने की।
इस दौरान कुलपति प्रो. सोलंकी ने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल स्कूलों, कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर कार्य करता है। सोलंकी ने विश्वविद्यालय के बारे में जानकारी दी एवं कहा कि संस्थान छोटा हो या नया पर उसमें काम बड़ा किया जा सकता है। इस दौरान मुकुल कानिटकर ने कहा कि हम सब शिक्षक हैं, हमें अपने आचार्यों की प्रतिष्ठा को पुन: जागृत करना है। आचार्य आचरण है, शिक्षण है। एक बेहतर शिक्षक वह है जिसे देखकर विद्यार्थियों को उर्जा मिले। शिक्षक विद्यार्थियों को विकसित कर उन्हें बेहतर इंसान बनाता है।
सीआरएसयू ने वर्ष 2017 में पुनरूत्थान के लिये शोध संस्थान नागपुर से एमओयू किया था, जिसमें दोनों संस्थान एक दूसरे के साथ शोध, शिक्षण, स्टूडेंट्स एक्सचेंज कार्यक्रमों में सहभागिता करेंगे। इसी कड़ी में उज्जैन में शिक्षण पद्घति पर हुए कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने भाग लिया। इसी कड़ी को आगे बढाते हुए मुकुल कानिटकर सीआरएसयू में अपने संबोधन के लिये आए थे। इस मौके पर डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स प्रों. संजय कुमार सिन्हा भी उपस्थित थे।