3 बार एचटेट व सीटेट पास किसान ने कनाडा से बीज लाकर उगाया केसर
बांगर की धरती पर पहली बार केसर की फसल उगी है। जोखिम भरी व महंगी खेती को अमरहेड़ी गांव के 3 बार एचटेट व सीटेट पास 25 वर्षीय किसान रामनिवास दक्ष ने किया हुआ है। हालांकि उसने केसर की खेती उसके गुरु (अध्यापक) अलेवा निवासी राष्ट्रीय कवि पंडित रामकुमार भारतीय के कहने पर की। उन्हीं ने कनाडा से लाखों रुपए किलों से हिसाब से बिकने वाले बीज को कनाडा से लाकर उनको दिया। इसके बाद उसने कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेकर पूरी तरह आर्गेनिक तरीके से फसल को उगाया। हालांकि इसमें लागत भी परंपरागत फसल की तुलना में ज्यादा आई। लेकिन अब फसल पूरी तरह से पक कर तैयार हो गई। इसको देखने के लिए इन दिनों दूर-दूर के किसान अमरहेड़ी गांव पहुंच रहे हैं। वे उगाई केसर न केवल हैरानी जता रहे साथ में उनकी इच्छा भी रहती है कि थोड़ी सी केसर उन्हें भी मिल जाए। यदि अब मौसम ने साथ दिया तो उम्मीद है कि किसान रामनिवास को आधा एकड़ फसल से लाखों की बचत होगी। क्योंकि फसल तोले के हिसाब से बिकती है।
जींद जिले के अमरहेड़ी गांव के किसान रामनिवास दक्ष ने विदेश गए गुरु की प्रेरणा से की केसर की खेती, दूर-दूर के किसान पहुंच रहे फसल देखने
अगस्त में बीजी केसर की फसल
किसान रामनिवास ने बताया कि उनके मन में केसर की खेती करने का कोई विचार नहीं था। वे सब्जी की खेती करते हैं। उनके गुरू रामकुमार भारतीय पिछले साल कनाडा गए थे। उन्होंने वहां केसर की खेती देखी और फिर उनको इसके बारे में बताया। उन्होंने सलाह दी कि वे भी अपने खेत में केसर उगाएं तो उन्हें अच्छी आय हो सकती है। इस पर उन्होंने उनको बीज लाने के लिए कहा। वे कनाडा से केसर का 1.25 लाख रुपए का 400 ग्राम बीज लेकर आए। इसके बाद उन्होंने जिस आधा एकड़ में केसर की बिजाई करनी थी। उस खेत को खाली छोड़ा और उसमें केंचुआ खाद आदि डालकर तैयार किया। इसके बाद अगस्त में उन्होंने टिंडा व केसर की बिजाई की। टिंडे को कई माह पहले बेच दिया गया और अब केसर की फसल तैयार हो गई। किसान रामनिवास का कहना है कि फसल की देखभाल अन्य फसलों की तुलना में ज्यादा है और जोखिम भी है। लेकिन अब फसल पककर तैयार हो गई है और उम्मीद है कि 7 से 8 किलो तक इसकी पैदावार निकल आएगी। इसके बाद इसे पतंजलि, डॉबर आदि कंपनियों से संपर्क कर बेचा जाएगा।
ज्यादा आमदनी हो इसी उद्देश्य से दी सलाह
कवि रामकुमार भारतीय ने बताया कि वे कनाडा में केसर की खेती देखकर हैरान हो गए थे। उन्हें पता लगा कि यह काफी महंगी फसल है। इसके बाद उन्होंने कृषि विशेषज्ञों व अन्य लोगों से पता किया कि यह फसल यहां भी उगाई जा सकती है या नहीं। जब उन्हें पूरी संतुष्टि हुई तो उन्होंने अपने शिष्य रामनिवास जो काफी पढ़ा लिखा है और सब्जी की खेती करता है। उसे केसर उगाने की सलाह दी। वह इससे सहमत हो गया। उनकी इच्छा थी कि उसका शिष्य केसर की खेती कर अच्छी आय प्राप्त करे। अब फसल तैयार है और इसे तोड़ा जा रहा। सारी फसल टूटने के बाद प्राइवेट कंपनियों से संपर्क इसे बेचा जाएगा।
रामकुमार भारतीय बताते हैं कि मनुष्य के लिए केसर काफी फायदेमंद है। यह कैंसर रोधी है। इसके अलावा यह बुद्धिवर्धक भी है। गर्भवती महिला यदि इसका सेवन करती हैं तो उन्हें इससे काफी फायदा होता और बच्चा तंदुरूस्त व सुंदर पैदा होता है।