देसी कपास के बेहतर उत्पादन के लिए अप्रैल में ही करनी होगी बिजाई
कपास खरीफ में उगाई जाने वाली एक प्रमुख नकदी फसल है। कपास विशेषज्ञों का मानना है कि भारत सरकार की ओर से अधिसूचित और हरियाणा सरकार की ओर से अनुमोदित 50 कपास किस्मों के प्रमाणित बीज का इस्तेमाल कपास बिजाई के दौरान किया जाए तो कपास की उन्नत खेती हासिल की जा सकती है। इस बार प्रदेश में 6.48 लाख हैक्टेयर में कपास बिजाई लक्ष्य निर्धारित किया गया है जबकि, पिछले साल लक्ष्य 6.60 लाख हैक्टेयर था।
उत्तरी भारत में हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में इस बार भारत सरकार सीआईसीआर (केंद्रीय कपास अनुसंधान केंद्र) सिरसा के कपास वैज्ञानिकों के सहयोग से देसी कपास की बिजाई के एरिया में और ज्यादा इजाफा करना चाहती है। सीआईसीआर सिरसा के समन्वयक डॉ. दिलिप मोंगा के मुताबिक पिछले साल उत्तरी भारत की कपास बेल्ट में कपास उत्पादन के कुल 15 लाख हैक्टेयर में से 10 फीसदी एरिया में देसी कपास की बिजाई की गई थी। लेकिन इस बार देसी कपास की बिजाई के एरिया में कम से कम 25 फीसदी इजाफा करने का टारगेट रखा गया है। इस टारगेट को हासिल करने के लिए सीआईसीआर की ओर से विकसित कराई गई देसी कपास की तीन वैरायटियों की बिजाई को िरकमेंड किया गया है।
ये हैं देसी कपास की तीन वैरायटियां और उनकी गुणवत्ता
सीआईसीआर 1
देसी कपास की पहली वैरायटी उन्नत हाईब्रिड सीआईसीआर 2 है: इस वैरायटी को सीआईसीआर की ओर से विकसित किया गया है और सेंट्रल वैरायटल रिलीज कमेटी की ओर से उत्तरी भारत की कपास बेल्ट में उत्पादन के लिए अनुमोदित किया गया है।
सीआईसीआर 2 की गुणवत्ता: सीआईसीआर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आर मीणा के मुताबिक सीआईसीआर 2 वैरायटी का पौधा मजबूत होता है जिसकी बढ़ोत्तरी 5 फीट तक होती है और जमीन पर नहीं गिरता है। पैदावार क्षमता भी 14 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से होती है। कपास जमीन पर नहीं गिरती जिससे हर तीसरे दिन कपास चुगाई भी नहीं करनी पड़ती। यह हाईब्रिड फ्यूजेरियम बिल्ट रोग से प्रतिरोधी भी होती है। इस वैरायटी का उत्पादन सिरसा के गांव बेगू के किसान रतिराम और राजाराम करते हैं।
सीआईसीआर 1 और सीआईसीआर 3 वैरायटियां में खिली हुई कपास नीचे नहीं गिरती है। उत्पादन 10 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से होता है। बीज उत्पादन नेशनल सीड कॉरपाेरेशन हिसार और भारत सीड कंपनी सिरसा की ओर से किया जाता है।
जिलों में इस साल का कपास बिजाई लक्ष्य
हिसार 1.49 लाख हैक्टेयर
फतेहाबाद 0.80 लाख हैैक्टेयर
सिरसा 1.90 लाख हैक्टेयर
भिवानी 0.95 लाख हैैक्टेयर
रोहतक 0.18 लाख हैक्टेयर
झज्जर 0.07 लाख हैैक्टेयर
सोनीपत 0.04 लाख हैक्टेयर
गुड़गांव 0.01 लाख हैक्टेयर
फरीदाबाद 0.00 लाख हैक्टेयर
करनाल 0.00 लाख हैक्टेयर
पानीपत 0.00 लाख हैक्टेयर
कैथल 0.10 लाख हैक्टेयर
अंबाला 0.00 लाख हैक्टेयर
पंचकूला 0.00 लाख हैक्टेयर
यमुनानगर 0.00 लाख हैक्टेयर
जींद 0.65 लाख हैक्टेयर
महेंद्रगढ़ 0.15 लाख हैैक्टेयर
रेवाड़ी 0.06 लाख हैक्टेयर
पलवल 0.04 लाख हैक्टेयर
मेवात 0.04 लाख हैक्टेयर
सीआईसीआर 2
सीआईसीआर 3
अप्रैल के अंत तक देसी कपास की बिजाई हो जानी चाहिए
देसी कपास की बिजाई अप्रैल माह के अंत तक अवश्य कर लेनी चाहिए क्योंकि जब देसी कपास अंकुरित होती है तो उस वक्त अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से कम होना जरूरी होता है। अन्यथा फसल का उत्पादन कमजोर हो जाएगा। देसी कपास का रेट नरमा के रेट से लगभग एक हजार रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा ही रहता है। इसलिए देसी कपास की बिजाई कर अच्छी फसल लेकर कपास उत्पादन करने वाले किसान अच्छी आय हासिल कर सकते हैं। - डॉ. दिलीप मोंगा, समन्वयक, सीआईसीआर, सिरसा।
इधर... कपास उत्पादन में पाक को पछाड़ने का टारगेट, एचएयू में 250 वैज्ञानिक जुटे
भारत में 6 लाख लोग करते हैं कपास की खेती, प्रति हेक्टेयर उत्पादन 565 किलोग्राम, जबकि पाकिस्तान में 748 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
भास्कर न्यूज | हिसार
भारत में करीब 6 लाख लोग कपास की खेती करते हैं। पिछले दिनों कपास में आई दिक्कतों से बचने का रास्ता अब किसानों ने जागरूकता के चलते खोज लिया है। भारत अब कपास का बड़ा निर्यातक देश बन सकता है, इसकी संभावना कृषि वैज्ञानिकों ने जताई है। अब कपास उद्योग को पाकिस्तान से आगे ले जाने की तैयारी में वैज्ञानिक जुट गए हैं। इसके लिए चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के जैनेटिक्स एवं प्लांट ब्रीडिंग विभाग के कपास अनुभाग ने कपास की ऑल इंडिया कोआर्डिनेटिड रिसर्च प्रोजेक्ट की दो दिवसीय वार्षिक समूह की बैठक का सोमवार काे शुभारंभ किया। इसमें देश के विभिन्न राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों के कपास अनुसंधान केंद्र, केंद्रीय सरकार के नागपुर, सिरसा, मुंबई व कोयम्बटूर केंद्रों सहित कपास क्षेत्र से जुड़ी निजी कंपनियों से आए करीब 250 वैज्ञानिक व प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।
इस बैठक का उद्घाटन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. एके सिंह ने किया। इस दौरान कपास की खेती से जुड़ी पुस्तिका का भी विमोचन किया। कार्यक्रम को सीआईसीआर, नागपुर के निदेशक डॉ. वाईएन वाघमरे ने भी संबोधित किया। इससे पूर्व विश्वविद्यालय के रिसर्च डायरेक्टर डॉ. एसके सहरावत, एग्रीकल्चर काॅलेज के डीन डॉ. केएस ग्रेवाल आदि उपस्थित रहे।
रिपोर्ट में क्या कहते हैं वैज्ञानिक
उत्तर भारत में पिछले वर्षों के मुकाबले कपास का उत्पादन 28 प्रतिशत बढ़ा है जिसमें राजस्थान का विशेष योगदान है।
किसानों द्वारा समेकित उपाय अपनाने से इस वर्ष गुलाबी सुंडी का प्रकोप केवल 5 से 10% ही रहा।
वर्तमान वित्तीय वर्ष में कपास के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए 60 लाख की राशि उपलब्ध कराया जाएगा।
आंकड़े आईसीएआर के एडीजी एवं ऑल इंडिया प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर (कपास) डॉ. एएच प्रकाश ने साझा किए।
कपास के उत्पादन करने वाले देश
कैसे पछाड़ सकते हैं पाक को
पाकिस्तान में कपास उत्पादकता 748 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर व भारत में 565 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर है।
लागत को कम करते हुए खाद-उर्वरकों तथा रासायनिक दवाओं व कीटनाशकों का कम उपयोग।
कपास के फसल की गुणवत्ता अच्छी है इसलिए किसान जोन के अनुकूल, वर्षा आधारित तथा रूई की उच्च गुणवत्ता वाली कपास की किस्में विकसित करें।
कपास प्रोडक्शन को बढ़ाने के लिए एचएयू, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद व निजी कंपनियों के साथ कपास की खेती को लेकर नया रोडमैप तैयार करेंगे।
आॅस्ट्रेलिया
इजराइल
चीन
ब्राजील
पाकिस्तान
किलोग्राम प्रति हेक्टेयर में
1833
1769
1633
1522
748