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कामनवेल्थ में ब्राॅन्ज मेडल जीतने वाले दीपक के स्वागत में नहीं पहुंचे अधिकारी

3 वर्ष पहले
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जिले के गांव शादीपुर निवासी 18 वर्षीय वेटलिफ्टर दीपक लाठर देश के लिए कॉमनवेल्थ में कांस्य पदक जीतकर दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे। दैनिक भास्कर संवाददाता से पदक जीत के बाद अपना अनुभव सांझा करते हुए दीपक लाठर ने कहा कि गोल्ड से चुकने पर मायूस तो था लेकिन कांस्य जीतने की खुशी भी थी। एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत की उम्मीद थी लेकिन जब सुबह करीब 6 बजे एयरपोर्ट पर पहुंचा तो वहां मायूसी हाथ लगी। एक भी खेल अधिकारी व स्टाफ स्वागत के लिये वहां नहीं था। वहां मेरे गांव से राहुल कोच व हिसार से स्वागत करने पहुंचे गांव भोजराज के वीरेंद्र चौधरी व उनके 5 साथी। जिन्होंने ढोलक व फूल माला सहित जीत पर मान सम्मान दिया। इस दौरान रेसलिंग फेडरेशन के सचिव भी बाद में वहां पहुंचे। ढोलक व फूल माला से स्वागत देख लोगाें ने मेरे बारे में पूछा और फिर शुरू हुआ सेल्फी का दौर। इसके बाद जिसने मेरे बारे में जाना मुझसे मिलने पहुंचा। ऐसे में हिसार के उन लोगों की वजह से एयरपोर्ट पर मुझे जीत के बाद यादगार पल मिले।

पिता भी नहीं हो पाए शामिल
किसान परिवार से संबंध रखने वाले दीपक लाठर के पिता बिजेंद्र लाठर ने दो एकड़ में फसल बो रखी थी और बेटे को घी समय पर मिल सके उसके लिए तीन गाय बांध रखी थी। बारिश का मौसम था फसल खराब न हो जाए व पशु की संभाल के लिए दीपक के पिता अपने बेटे के स्वागत में शामिल नहीं हो पाए।

दीपक का सफर: दीपक छठी कक्षा में था तभी आर्मी की ओर से चयन किया गया। पूना आर्मी के स्पोटर्स संस्थान में पढ़ाई व खेल की शुरुआत की। के रवि कुमार को अपना आइडियल मानते हुए वेटलिफ्टिंग की शुरुआत की। इसके बाद एनआईएस में खेल अभ्यास किया और अब कॉमनवेल्थ में 295 किलोग्राम भार उठाकर 69 किग्रा कैटेगरी में कांस्य पदक जीता।

मायूसी
शादीपुर गांव के 18 वर्षीय वेटलिफ्टर दीपक लाठर ने कहा-उन्हें उम्मीद थी कि दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचने पर उनका भव्य स्वागत होगा, लेकिन मायूसी हाथ लगी
एयरपोर्ट पर दीपक लाठर का स्वागत करते उनके साथी।

काम में व्यस्तता के कारण नहीं पहुंच सकी : विनोद बाला
दीपक के एयरपोर्ट पर पहुंचने की सूचना मिल गई थी लेकिन कार्य में व्यस्तता के चलते मैं या स्टाफ सदस्य एयरपोर्ट नहीं पहुंचे। लेकिन उनकी जीत की सूचना मिलते ही उनके गांव जुलाना में उनके पिता से मुलाकात की अौर मिठाई बांटते हुए उसके परिवार व ग्रामीणों के साथ जीत की खुशी सांझा की। साथ ही खेल निदेशक का संदेश मिला है कि प्रतियोगिता के बाद सभी विजेता खिलाड़ियों को एक साथ सम्मानित किया जाएगा। -विनोद बाला, जिला खेल अधिकारी, जींद।

खिलाड़ियों का स्वागत होने से बढ़ता है मनोबल : वीरेंद्र चौधरी

मैं गांव भोजराज का हूं। कॉमनवेल्थ गेम्स को शुरुआत से देख रहे हैं। हरियाणा के खिलाड़ी दीपक के जीत के बाद दिल्ली आने की सूचना मिलने पर मैं और मेरे साथी मनदीप, सचिन, एस जैन, विवेक व अरुण उसके स्वागत के लिए पहुंचे। लेकिन जब वहां किसी को नहीं देखा तो हैरानी हुई। यह गलत है। देश को पदक दिलाने वाले खिलाड़ी का एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत हो ताकि उनका मनोबल ओर बढ़े। -वीरेंद्र चौधरी, निवासी गांव भोजराज

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