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सोनीपत, जींद, कैथल में 30 हजार एकड़ बढ़ाया जाएगा कपास का रकबा

3 वर्ष पहले
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सुशील भार्गव | राजधानी हरियाणा

सोनीपत, जींद, कैथल जिलों के किसानों के लिए कृषि विभाग ने नई योजना तैयार की है। इन जिलों में उन 12 हजार किसानों को कपास बीज के पैकेट फ्री में उपलब्ध कराए जाएंगे, जो किसान पहले कपास उगाते थे। अब वे धान उगाने लगे हैं। उन्हें फिर से कपास की ओर ले जाया जाएगा। ताकि प्रदेश में लगातार घट रहे भू-जल स्तर को बचाया जा सके। क्योंकि प्रदेश में करीब 8.12 लाख ट्यूबवेंलों से किसान सिंचाई करते हैं। इससे भू-जल का दोहन तेजी से हो रहा है। धान रोपाई के समय जून में बड़े स्तर पर पानी का आउटपुट होता है, लेकिन इनपुट नहीं हो पाता। तीनों जिलों में 30 हजार एकड़ कपास का रकबा बढ़ाने का प्रयास है।

किसानों को 60 हजार पैकेट कपास बीज दिया जाएगा निशुल्क, तीनों जिलों में पहले उगाया जाता था कपास, अब धान की ओर लौटे किसानों को मिलेगा लाभ

बीटी कॉटन के मिलेंगे 60 हजार पैकेट

कृषि विभाग की ओर से तीनों जिलों के करीब 12 हजार किसानों को बीटी कॉटन सीड के 60 हजार पैकेट उपलब्ध कराए जाएंगे। एक पैकेट में आधा एकड़ का बीज है और एक किसान अधिक से अधिक पांच पैकेट ही ले सकता है। यानि ढाई एकड़ का बीज एक किसान को फ्री दिया जाएगा।

उन्हीं किसानों को लाभ जो धान की ओर मुड़े: इस योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा, जो पहले अपने खेत में कपास उगाते थे और गत कई सालों से कपास को छोड़कर धान उगाने लगे हैं। किसानों को वापस कपास की ओर लाने के लिए कृषि विभाग की टीम सर्वे कर रही है, उन्हीं किसानों को योजना का लाभ मिले, जो कपास छोड़कर धान उगाने लगे हैं।

एडीओ देगा परमिट, कपास का एरिया होगा 6.60 लाख हेक्टेयर

संबंधित इलाके का एडीओ परमिट देगा, इसके बाद हरियाणा बीज वितरण निगम के काउंटर से यह बीज किसान ले सकेंगे। यदि अस्थाई काउंटर बनाने की जरूरत पड़ी तो वे भी बनाए जाएंगे, ताकि किसानों को बीज लेने में किसी तरह की दिक्कत न आए। प्रदेश में फिलहाल 6.48 लाख हेक्टेयर में कपास उगाई जाती है। इस एरिया को कृषि विभाग ने बढ़ाकर 6.60 लाख हेक्टेयर करने के फैसला किया है। प्रदेश के करीब 12 जिलों में कपास उगाई जाती है। 12 हजार हेक्टेयर का बीज निशुल्क देकर धान का एरिया कम किया जाएगा। प्रदेश में करीब 13 लाख हेक्टेयर में धान होता है, भू-जल की स्थिति ठीक करने के लिए यह योजना चलाई गई है।

पांच पैकेट बीज ले सकते हैं

किसानों को जल्द ही बीज उपलब्ध कराया जाएगा। जींद, सोनीपत व कैथल के उन किसानों को फिर से कपास की ओर लाया जाएगा, जो कपास छोड़कर धान उगाने लगे थे। एक किसान अधिकतम पांच पैकेट बीज ले सकता है। -डॉ. सुरेश गहलावत, अतिरिक्त कृषि निदेशक, हरियाणा।

सफेद मक्खी के पेट से निकले वाला वायरस कपास में कर रहा पत्ता मरोड़ रोग, 80% तक फसल हो जाती है बर्बाद

वैभव शर्मा | हिसार

उत्तर भारत में कपास की पैदावार पर एक वायरस का खतरा मंडरा रहा है, अगर किसान कुछ सावधानियां नहीं बरतेंगे तो हो सकता है उनकी 80% तक फसल बर्बाद हो जाएगी। दरअसल कुछ वर्षों से कपास का नुकसान करने वाली सफेद मक्खी पर तो काफी हद तक काबू पा लिया है मगर अब चिंता का विषय सफेद मक्खी के पेट से निकलने वाला जीवाणु बना हुआ है। अप्रैल माह में कपास की बिजाई शुरू होती है। फसल के शुरुआती दौर में सफेद मक्खी से यह जीवाणु पत्ते पर आ गया तो पत्ता मरोड रोग हो जाता है। यह पत्तों को डैमेज कर देता है। एचएयू में हाल ही में जेनेटिक्स एवं प्लांट ब्रीडिंग विभाग के कपास अनुभाग द्वारा कपास की ऑल इंडिया कोआर्डिनेटिड रिसर्च प्रोजेक्ट की दो दिवसीय वार्षिक समूह बैठक आयोजित हुई। इसमें साउथ इंडिया से 250 वैज्ञानिकों का दल सिर्फ कपास पर आने वाली चुनौतियों और उसके समाधान के लिए एकत्रित हुआ।

बचाव के लिए यह दिए सुझाव

किसानों को थोड़े पानी से बिजाई की आदत डालनी होगी। इसके लिए ड्रिप इरीगेशन सिस्टम व नालियां बनाकर पानी का प्रबंधन करना होगा।

15 अप्रैल से 15 मई तक ही कपास की बिजाई करें।

वैज्ञानिकों द्वारा सिफारिशी कपास किस्मों का प्रयोग करें।

पैदावार से खरपतवार न हो इसका प्रबंध करें क्योंकि सफेद मक्खी खरपतवार पर आकर्षित होती है।

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