जयपुर/जोबनेर|श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के कुलपति डॉ. पी.एस. राठौड़ ने कहा है कि भारत सब्जी उत्पादन के मामले में चीन के बाद विश्व में दूसरे स्थान पर है। भारत में विश्व की 15 प्रतिशत सब्जियों का उत्पादन किया जाता है। पिछले 5 साल में सब्जियों का उत्पादन तेजी से बढ़ा है और यह 178.2 मिलियन टन तक जा पहुंचा है। वे शुक्रवार को यहां राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा में आयोजित अखिल भारतीय सब्जी अनुसंधान परियोजना (सब्जी फसल) की 36 ग्रुप मीटिंग के उद्घाटन सत्र में अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे।
डॉ. राठौड़ ने कहा कि राजस्थान गर्म प्रदेश है और यहां का जलवायु सब्जियों के उत्पादन को प्रभावित करता है। इसके बावजूद यहां अच्छी उपज होती है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, जल बजट, वर्टिकल सब्जी खेती पर अनुसंधान करने पर बल दिया। किसानों की आय दुगुना करने की योजना में संरक्षित सब्जी खेती किसानों के लिए सहायक साबित हो सकती है। उन्होंने शहरी सब्जी उत्पादन कार्यक्रम की चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश में शहरी सब्जी उत्पादन के अंतर्गत छत पर सब्जियों की खेती योजना चल रही है, इसमें अब उपभोक्ता का किसान बनाया जा रहा है और उसे प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि वो ताजा सब्जियां उगा सके।
उद्घाटन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रख्यात उद्यानिकी वैज्ञानिक और कृषि वैज्ञानिक भर्ती मंडल नई दिल्ली के पूर्व चेयरमैन कीर्ति सिंह ने कहा कि राजस्थान गर्म प्रदेश होने के बावजूद सब्जी के उत्पादन और अन्वेषण करने में अग्रणी रहा है। उन्होंने कहा कि राजस्थान सब्जियों की विविधता का भंडार है। यहां जलवायु अनुकूलित किस्मों के विकास की प्रचुर संभावनाएं हैं। उन्होंने इस ग्रुप मीटिंग में नई तकनीकों के बारे में ठीक से विचार विमर्श कर निष्कर्ष निकालने की आवश्यकता जताई।
राष्ट्रीय सब्जी फसल अनुसंधान संस्थान, वाराणसी के निदेशक डॉ. बिजेंद्र सिंह ने बताया कि देश में सब्जी अनुसंधान संस्थान के अंतर्गत विभिन्न केंद्रों में व्यापक अनुसंधान हुआ है। इनमें सब्जियों की नई किस्मों का तेजी से विकास हुआ है। इसी कारण सब्जियों का उत्पादन दर 9 प्रतिशत तक पहुंच गई है। राजस्थान को उन्होंने सब्जियों के जीव द्रव्यों का खजाना बताया और कहा कि सब्जियों की बढ़ने उत्पादन व संरक्षित खेती के विकास की सराहना की। डॉ. ए.बी. राय परियोजना समन्वयक ने राष्ट्रीय सब्जी फसल अनुसंधान संस्थान की वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।