एनएलयू ने कैग को ऑडिट से रोका, केवल सरकारी ग्रांट का हिसाब दिया, उसमें भी गड़बड़ी
ऑडिट नहीं करवाने का निर्णय एनएलयू की एग्जीक्यूटिव काउंसिल का था। सोलर प्लांट और गर्ल्स हॉस्टल के निर्माण को लेकर कैग की ऑडिट टीम ने जो सवाल उठाए थे, उनके जवाब हमने भेज दिए हैं।
सोहनलाल शर्मा, कुलसचिव, एनएलयू, जोधपुर
सरकारी ग्रांट के दो प्रोजेक्ट में 1.62 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान करना सामने आया
मनोज कुमार पुरोहित | जोधपुर
जोधपुर की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी ने कंट्रोलर एंड ऑडिट जनरल ऑफ इंडिया (कैग) को ऑडिट करवाने से मना कर दिया। राज्य सरकार के हस्तक्षेप के बाद केवल 3.23 करोड़ रुपए की सरकारी ग्रांट के दो प्रोजेक्ट की ऑडिट करवाई, उसमें भी करीब 1.62 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान का मामला सामने आया है। कैग की ऑडिट टीम 14 दिन एनएलयू में डेरा डाले रही, लेकिन उन्हें केंद्र सरकार से मिली ग्रांट के अलावा कोई हिसाब नहीं दिया गया। यहां तक कि टीम को बैठाया भी वहां गया, जहां एनएलयू के ड्राइवर बैठते हैं।
कैग ऑडिट टीम के तीन सदस्य ओपी व्यास, राजेंद्र पुरोहित व रामनारायण सोलंकी गत 27 जनवरी को एनएलयू पहुंचे, तो यहां के प्रशासन ने उन्हें ऑडिट करवाने से मना कर दिया। इस पर उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया गया। उच्च शिक्षा विभाग ने ऑडिट के लिए कहा तो एनएलयू प्रशासन ने केवल केंद्र सरकार से मिलने वाली ग्रांट की ही ऑडिट करवाने पर सहमति जताई, शेष लेखा दस्तावेज की ऑडिट के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी बना दी और कहा कि यह कमेटी यदि अनुशंसा करती है तो हम ऑडिट करवाएंगे। 14 दिन की कोशिश के बाद 9 फरवरी को कैग की ऑडिट टीम एनएलयू से लौट गई। हालांकि इससे पहले उन्होंने केंद्र सरकार से मिली 3.23 करोड़ की राशि की ऑडिट पूरी कर ली। इसमें 1.62 करोड़ रुपए के अतिरिक्त भुगतान की कमी निकली। ऑडिट टीम ने पेरा बना कर प्रधान महालेखाकार सामान्य एवं सामाजिक लेखा परीक्षा को भेज दिया है।
इन दो कार्यों में ज्यादा राशि का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट भेजा
सोलर प्लांट: 35 लाख की सब्सिडी नहीं ली, नियम विरुद्ध सीपीडब्ल्यूडी से काम करवाया
एनएलयू ने 2 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाया। इसके लिए 2.31 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत हुआ। इस पर 15 प्रतिशत यानी 35 लाख रुपए की सब्सिडी नहीं ली। इतना ही नहीं, राज्य सरकार के लोक उपापन पारदर्शिता नियम 2013 और ऊर्जा मंत्रालय के 10 अगस्त 2015 के आदेश के तहत सोलर का काम राजस्थान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंट्रूमेशन लिमिटेड से ही करवाना आवश्यक होता है, लेकिन एनएलयू ने यह काम सीपीडब्ल्यूडी से करवाया। काम नियमानुसार होता तो केवल 1.20 करोड़ में पूरा हो जाता।
गर्ल्स हॉस्टल: सीपीडब्ल्यूडी ने 99 लाख का प्रस्ताव रखा, एनएलयू ने डेढ़ करोड़ रुपए दिए
गर्ल्स हॉस्टल के लिए 1.50 करोड़ रुपए का फंड स्वीकृत हुआ था। विवि ने सीपीडब्ल्यूडी को जिम्मा सौंपा। सीपीडब्ल्यूडी ने इस काम के लिए 99 लाख रुपए की राशि का प्रस्ताव रखा। विवि ने उसे काम भी दे दिया, लेकिन सीपीडब्ल्यूडी को इस काम के बदले 1.50 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया। इस बारे में एनएलयू ने कैग टीम को बताया कि अन्य कुछ काम भी इसी फंड से पूरे करवाए गए, लेकिन टीम ने इसे गलत माना।
एनएलयू प्रशासन ने एग्जीक्यूटिव काउंसिल पर डाली जिम्मेदारी
एक करोड़ से ज्यादा फंड उपयोग लेने पर ऑडिट करवानी पड़ती है। हमने उच्चाधिकारियों को बता दिया है, उनके निर्देश के बाद नियमानुसार ऑडिट की जाएगी। एनएलयू ने उपयोग से ज्यादा राशि का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट (यूसी) भी भेजा है।
- ऑडिट करने आई टीम