बॉर्डर विंग होमगार्ड को स्थाईकर्मी के समान सुविधा देने से इनकार
जोधपुर | राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंद्राजोग व विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने विभिन्न अपील याचिका को खारिज करते हुए बॉर्डर विंग होमगार्ड को स्थाई कर्मचारी के समान सुविधा देने से इनकार कर दिया। खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को यथावत रखा है। इससे करीब 10 हजार बॉर्डर विंग होमगार्ड प्रभावित हाेंगे।
अपीलकर्ता लूणसिंह व अन्य की ओर से दायर याचिका में बताया गया, कि वे बॉर्डर विंग होमगार्ड राजस्थान में नियुक्त हैं। उन्हें पांच साल के लिए नियुक्त किया था, लेकिन समय-समय पर उनकी नियुक्ति बढ़ा दी गई। पिछले 10 से 30 साल तक लगातार सेवाएं दे रहे हैं। उन्हें स्थाई करने और स्थाई सरकारी कर्मचारी के समान सभी सुविधाएं, फिक्सेशन, पीएफ, ग्रेच्युटी सहित अन्य सेवानिवृत्ति लाभ देने के लिए एकलपीठ में याचिका दायर की थी। इसे 8 दिसंबर 2008 को खारिज कर दिया गया, जो अनुचित है। इस आदेश के विरुद्ध अपील याचिका दायर की गई। अपील में बहस करते हुए कोर्ट को बताया, कि उन्होंने वर्ष 1971 में इंडो-पाक वार, ऑपरेशन विजय और ऑपरेशन पराक्रम सहित विभिन्न अभियानों में हिस्सा लिया। बॉर्डर विंग होमगार्ड सात राज्यों में कार्यरत हैं, इनमें पांच राज्यों में ज्यूडिशियल ऑर्डर से इन्हें स्थाई कर दिया गया है। संविधान के अनुच्छेद 14 व 16 का भी उल्लंघन है।