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एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज में ‘नो एडमिशन’ घोषित

3 वर्ष पहले
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एजुकेशन रिपोर्टर | जोधपुर

प्रदेश के सबसे पुराने व प्रतिष्ठित तथा जोधपुर की पहचान एमबीएम कॉलेज को लेकर जिस बात की आशंका थी आखिर वो सच हो गई। एआईसीटीई ने कॉलेज में वर्ष 2018-19 में ‘नो एडमिशन’ का आदेश जारी कर दिया। कॉलेज की प्रतिष्ठा बचाने के पूर्व छात्रों के जबरदस्त प्रयासों पर राज्य सरकार की वादाखिलाफी और जेएनवीयू वीसी की अनदेखी भारी पड़ी। आगामी सत्र में यहां कोई नया एडमिशन नहीं होगा। कॉलेज में जीरो सेशन घोषित न हो इसके लिए पूर्व छात्रों की एलुमिनी एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई थी। हाईकोर्ट के आदेश पर एआईसीटीई टीम ने 5 जुलाई 17 को कॉलेज का निरीक्षण कर कमियां बताईं, साथ ही प्रवेश पर रोक की चेतावनी भी दी। कॉलेज को बाकायदा 7 महीने में कमियां सुधारने का मौका भी दिया। राज्य सरकार ने एक बार तो तत्परता दिखा 25 करोड़ फंड की घोषणा कर दी। रिक्त पदों पर भी भर्ती की स्वीकृति भी दी। एकबारगी तो लगा कि कॉलेज अपनी प्रतिष्ठा बचा लेगा। सरकार ने ना तो फंड दिया, नियुक्तियों पर भी रोक लगा दी। कमियों में सुधार नहीं हुआ। हाल ही में स्टेंडिंग अपीलेट कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में 10 में से 9 कमियों को यथावत बताया।

10 कमियां सुधारने को पूरे 7 माह मिले, घोषणा करके भी सरकार ने फंड दिया नहीं, भर्ती भी रोकी

आन इसलिए है एमबीएम कॉलेज

67

साल पुराना प्रदेश का पहला इंजीनियरिंग कॉलेज

80% स्टूडेंट्स की फर्स्ट च्वॉइस

प्रदेश की अनुदानित इंजीनियरिंग की 746 सीटों में से 380 सीटें यहीं हैं।

यहां के सोलर पैसिव हाउस को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने नजीर बताया।

पूर्व छात्र है पूर्व सीएस अशोक जैन, टेक्निकल विवि के पूर्व वीसी दामोदर शर्मा, मंत्री वासुदेव देवनानी, आईएएस कृष्णकुमार, आईपीएस भूपेंद्र दक, बीबीएनएल के सी. जीएम पंकज भंडारी

इनके प्रयासों पर फिरा पानी

एलुमिनी एसो. अध्यक्ष डॉ. पीसी पुरोहित कहना है कि हमने 7 माह में कमियों पूरी करने के संभव प्रयास किए। अब भी हमारा प्रयास रहेगा कि यहां प्रवेश नहीं रोका जाए।

पूर्व छात्र व तत्कालीन सीएस अशोक जैन ने विशेष बैठक बुलाई। पद स्वीकृत किए व 25 करोड़ विशेष फंड घोषित किया। दिसंबर में रिटायर हुए। बाद में फंड मिला ही नहीं, न पद भरे गए।

शान इनकी वजह से खोई हमारे शहर की

गत जुलाई में बताई 10 कमियां: फरवरी में भी 9 जस की तस

1. सेफ्टी इक्यूपमेंट

स्थिति: लैब में फायर सेफ्टी इक्यूपमेंट के कुछ दस्तावेज दिए हैं, लेकिन इंश्योरेंस के कोई दस्तावेज नहीं।

6. शिक्षक

स्थिति: 21 शिक्षकों की नियुक्तियां। टेक्यूप से लगे 43 शिक्षकों की संख्या को एआईसीटीई ने नहीं माना।

किरण माहेश्वरी, उच्च शिक्षामंत्री

एमबीएम में जब जीरो सेशन की चेतावनी दी गई थी तथा ये मामला शिक्षामंत्री के सामने आया तो खुद शिक्षामंत्री नेे कहा कि ‘नो एडमिशन’ नहीं होने देंगे। लेकिन इस कॉलेज में पद भरने की कार्रवाई को खुद उच्च शिक्षा विभाग की ओर से रोक दिया। जब इस मामले में अवगत करवाया तो कहा कि सोमवार को वे जयपुर जाएंगी तो मामले में जानकारी लेंगी।

2. भवन सुरक्षा पत्र

स्थिति: स्ट्रक्चरल विभाग ने प्रमाण पत्र जारी तो किया लेकिन इसे एआईसीटीई ने नहीं माना।

7. तकनीकी स्टाफ

स्थिति: 100 लैब में केवल 33 शैक्षणिक कर्मचारी। सरकार ने पद स्वीकृत किए, लेकिन भर नहीं सके।

3. भवन मरम्मत

स्थिति: इस संबंध में सुधार के कोई दस्तावेज नहीं भेजे गए, अर्थात यथास्थिति।

8. फूड सेफ्टी

स्थिति: कॉलेज में संचालित होने वाली कैंटीन ने फूड सेफ्टी एक्ट के तहत लाइसेंस लिया।

प्रो. आरपी सिंह, कुलपति जेएनवीयू

जेएनवीयू को राज्य सरकार की ओर से इंजीनियरिंग में भर्ती के लिए कुल 102 पद भरने की स्वीकृति मिली। विश्वविद्यालय ने इसे समय पर भरा ही नहीं। इस मामले में कुलपति प्रो. आरपी सिंह का कहना है कि उन्होंने तो पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन खुद सरकार ने ही पद नहीं भरने का फरमान जारी कर दिया। अब इसमें हम क्या कर सकते हैं?

4. प्रयोगशालाएं

स्थिति: उपकरण खरीद के कुछ ही दस्तावेज प्रस्तुत किए। बाकी प्रक्रियागत बताए।

9. लैंड यूज

स्थिति: भूमि सरकार की ओर से जेएनवीयू को लीज पर दी, इसके दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवा पाए।

5. पुस्तकालय

स्थिति: फंड की कमी से पुस्तक खरीद की कोई कार्रवाई नहीं हुई। 203 नेशनल जर्नल की जरूरत थी। लेकिन इन्हें बहुत महंगे बताकर सरकार से अलग फंड मांगा है।

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