भारत में 1 साल में 74 हजार से अधिक महिलाओं की मौत सर्वाइकल कैंसर से होती है : डॉ. रंजना
सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला दूसरा कॉमन कैंसर है। यह जितना आम है, उतना ही खतरनाक भी। इसे बच्चेदानी, गर्भाशय या फिर यूट्राइन सर्वाइकल कैंसर भी कहते हैं। सर्वाइकल कैंसर ह्यूमन पैपीलोमा वायरस (एचपीवी) के कारण होता है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन का आंकड़ा देखे तो भारत में एक साल में 74 हजार से अधिक महिलाओं की और दुनिया में लगभग 2 लाख 73 हजार महिलाओं की मौत इसी कैंसर की वजह से होती है। यह कहना है डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज गायनी विभागाध्यक्ष व उम्मेद अस्पताल की अधीक्षक डॉ. रंजना देसाई का। वे रविवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की ओर से आयोजित सीएमई में बोल रही थीं। कार्यक्रम में 100 से अधिक डॉक्टरों ने विचार व्यक्त किए।
एम्स में महिलाओं में होने वाले कैंसर पर सीएमई का उद्धाटन करतीं एम्स गायनी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतिभा सिंह।
40 साल या इससे अधिक उम्र की महिलाओं को चैकअप करवाना चाहिए
उन्होंने कहा, 40 साल या इससे अधिक उम्र की महिलाओं को अपना चैकअप करवाना चाहिए। प्राथमिक स्तर पर डायग्नोसिस कर इलाज किया जा सकता है। इस कैंसर की वैक्सीन भी आ गई है। कोकिलाबेन अस्पताल मुंबई के डॉ. योगेश कुलकर्णी ने कैंसर सर्जरी में रोबोटिक्स के योगदान के बारे में बताया। सीएमई में एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. एसबीएल श्रीवास्तव ने राजस्थान चैप्टर की घोषणा की। इसमें मुंबई के टाटा मैमोरियल से डॉ. अमिता माहेश्वरी, किंग जार्ज मेडिकल यू्निवर्सिटी की डॉ. उमा सिंह, सीएमसी वेल्लोर के डॉ. अब्राहम पिडिसाइल, मेदांता अस्पताल की डॉ. सभ्यता गुप्ता, स्त्री एवं कैंसर विशेषज्ञ डॉ. अमृत गुप्ता, जयपुर से डॉ. रानू पाटनी, दिल्ली की डॉ. सतिंद्र कौर, एम्स पटना की डॉ. हमाली एवं एम्स भुवनेश्वर की डॉ. सौभाग्य, डॉ. बीएस जोधा, डॉ. कल्पना मेहता ने भाग लिया।