सामान्य महिला वर्ग में आरक्षित वर्ग की महिला अभ्यर्थी भी शामिल होने की हकदार
राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश अरुण भंसाली ने तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती 2013 के एक मामले में सामान्य महिला वर्ग के अंतर्गत आरक्षित वर्ग की महिला अभ्यर्थियों को सम्मिलित होने का हकदार माना है। सामान्य वर्ग की चयन से वंचित महिला अभ्यर्थी मुक्ता पुरोहित व अन्य द्वारा याचिका दायर कर सामान्य वर्ग की विधवा व परित्यक्ता वर्ग की महिला अभ्यर्थियों के रिक्त पदों को आरक्षित वर्ग की महिला अभ्यर्थियों द्वारा भरे जाने की प्रक्रिया को चुनौती दी। जिला परिषद जैसलमेर द्वारा तृतीय श्रेणी अध्यापिका लेवल प्रथम के सामान्य विधवा व परित्यक्ता महिला वर्ग के विज्ञापित ग्यारह पदों के विरुद्ध आरक्षित वर्ग की महिला अभ्यर्थियों को चयनित कर विद्यालय आवंटित कर दिए गए। याचिका की प्रारंभिक सुनवाई में नियुक्ति पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
आरक्षित वर्ग की एकता रतनु व अन्य अप्रार्थी की ओर से अधिवक्ता हनुमानसिंह चौधरी ने पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया, कि सामान्य वर्ग एक अनारक्षित वर्ग है, जिसमें किसी भी वर्ग के अभ्यर्थी सम्मिलित होने के हकदार है। सामान्य महिला वर्ग के विधवा व परित्यक्ता वर्ग के अंतर्गत भी कोई भी आरक्षित वर्ग की महिला मेरिट के अनुसार सम्मिलित हो सकती है। इस पर कोर्ट ने अंतिम निर्णय देते हुए विभाग के पूर्व निर्णयों में प्रतिपादित सिद्धांत के अनुरूप ही नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए।