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राम-रहीम की तरह आसाराम मामले का फैसला जेल में ही सुनाया जाएगा, 25 को जेल में बनेगा कोर्ट रूम

3 वर्ष पहले
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अपने ही गुरुकुल की नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म करने के आरोपी आसाराम मामले का फैसला अब कोर्ट की बजाय जेल में ही सुनाया जाएगा। राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश गोपालकृष्ण व्यास व रामचंद्र सिंह झाला की खंडपीठ ने मंगलवार को यह फैसला दिया है, उससे शहर को बड़ी राहत मिली है। पुलिस भी चिंतित थी कि 25 अप्रैल को फैसला आने पर राम-रहीम को सजा सुनाने के बाद पंचकुला में जैसा उपद्रव हुआ था, वैसा जोधपुर शहर में न हो जाए। इसलिए डीसीपी अमनदीपसिंह कपूर ने जेल में फैसला सुनाने की अर्जी लगाई थी जिसे हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली है। खंडपीठ ने जेल प्रशासन, पुलिस व प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वे जेल में आवश्यक बंदोबस्त कर लें तथा शहर में कानून-व्यवस्था बहाली के हरसंभव उपाय करें और सख्ती से भी निपटें। अब जोधपुर सेंट्रल जेल में ही अस्थाई कोर्ट रूम तैयार किया जाएगा। फैसला सुनाने वाले एससी-एसटी कोर्ट के पीठासीन अधिकारी मधुसूदन शर्मा को कड़ी सुरक्षा में घर से जेल लाया जाएगा और फैसला सुनाने के बाद उसी सुरक्षा में घर पहुंचाया जाएगा।

हाईकोर्ट ने कहा- शहर व शहरवासियों के जीवन में कोई खलल न डालें आसाराम के समर्थक, पुलिस-प्रशासन करे पुख्ता इंतजाम, सख्ती की जरूरत हो तो वह भी बरतें

वकीलों का विरोध | सुनवाई के शुरुआत में आसाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश बोड़ा ने कोर्ट को बताया कि पहले भी ट्रायल सेंट्रल जेल में शिफ्ट करने का नोटिफिकेशन जारी किया गया था, जिसे विड्रॉ करना पड़ा। केवल हाईकोर्ट, सेशन कोर्ट और सीआरपीसी की धारा 482 में ही प्रावधान है, लेकिन उस वक्त इनमें किसी प्रावधान की पालना नहीं की गई। वरिष्ठ अधिवक्ता सज्जनराज सुराणा ने कहा कि प्रार्थना पत्र में पुलिस की ओर से किए गए कथन पूरी तरह से झूठे हैं। प्रार्थना पत्र में बताया गया कि आसाराम को लाने-ले जाने वाली गाड़ी को समर्थकों ने रोका। आसाराम को कड़ी सुरक्षा में लाया जाता रहा है। कोर्ट को गुमराह किया जा रहा है। हालांकि, बाद में आसाराम की ओर से कोर्ट में एक अर्जी देकर कहा कि न्यायालय, पुलिस व प्रशासन के अधिकारी जहां भी उचित समझे, वहां फैसला सुनने को सहमत है।

जेल में पुख्ता बंदोबस्त, कोर्ट की अनुमति से ही प्रवेश

सेंट्रल जेल में कोर्ट के लिए जो भी इंतजाम करने हैं, वे पूरे किए जा चुके हैं। फैसले के दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं या किसी अन्य की उपस्थिति के संबंध में कोर्ट के निर्देशानुसार ही जेल में प्रवेश की अनुमति होगी। - विक्रमसिंह कर्णावत, डीआईजी (जेल)

पीठासीन अधिकारी मधुसूदन शर्मा का निवास।

पुलिस की दलील | कोर्ट ने डीसीपी डॉ. अमनदीप कपूर से पूछा कि फैसला जेल में सुनाया जाएगा, तब भी पुलिस को कानून व्यवस्था बनाए रखनी होगी। फिर कोर्ट में क्या दिक्कत है? डीसीपी ने आग्रह किया कि कोर्ट के आसपास आबादी है और अन्य सघन क्षेत्र है। स्थिति बिगड़ने की आशंका पर नियंत्रण में दिक्कत आ सकती है, जबकि जेल परिसर के आसपास ऐसा कुछ नहीं है, आसानी से स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है।

सेंट्रल जेल के आसपास एकत्रित नहीं होने देंगे भीड़

कोर्ट से जो भी दिशा-निर्देश मिले हैं, उसी आधार पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के इंतजाम करेंगे। सेंट्रल जेल के बाहर पर्याप्त पुलिस बल तैनात करेंगे और आसपास के इलाकों में भी पुलिस पार्टियां जरूरत के आधार पर तैनात रहेगी। - डॉ. अमनदीप सिंह कपूर, डीसीपी (ईस्ट)

कोर्ट का फैसला | हाईकोर्ट ने कहा कि यह नहीं कहा जा सकता कि आसाराम के समर्थक अड़चन नहीं डालेंगे और माहौल नहीं बिगाड़ेंगे। जनहित और कानून व्यवस्था को देखते हुए सीआरपीसी की धारा 482 के तहत कोर्ट ने यह निर्देश जारी किए।

जेल अधीक्षक और जिला मजिस्ट्रेट जेल में सजा सुनाने की प्रोसिडिंग संपन्न कराने के पुख्ता बंदोबस्त करें।

फैसले के वक्त आसाराम व पीडि़ता के पक्षों के वकीलों को मौजूद रहने की व्यवस्था भी हो।

पुलिस कमिश्नर और प्रशासन वे सारे प्रबंध करें जिससे शहरवासियों व उनकी प्रॉपर्टी की आसाराम के समर्थकों से हिफाजत की जा सके।

पुलिस को यह छूट रहेगी कि वह जेल एरिया में आसाराम के समर्थकों को एकत्र होने से रोकने के लिए सख्ती से निपटे।

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