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आईएएस निर्मला मीणा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, फरार

3 वर्ष पहले
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अब मीणा के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता बचा है। सुप्रीम कोर्ट जाने का मतलब है कि 50 लाख से एक करोड़ रुपए तक खर्च करने होंगे। वहां एक-दो महीने लग सकते हैं। यानी तब तक उसे फरार रहना पड़ेगा। वैसे भी सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानतों के आदेश देखें तो उनमें 80 फीसदी फैसले वे ही होते हैं जो हाईकोर्ट देता है। इसलिए वहां भी राहत की उम्मीद कम ही दिखाई देती है।

कहती थीं- मैं फरार नहीं, अब हो गई, माेबाइल भी बंद

मीणा की पहले सेशन कोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज हुई तब एसीबी ने जोधपुर, जयपुर व उदयपुर में उसके ठिकानों पर छापेमारी की थीं। वह तब भी एसीबी के हाथ नहीं लगी थीं। हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी लगी तो उसकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई। तब वह जोधपुर आईं और भास्कर से बात कर कहा कि वह फरार नहीं थीं, चिकनगुनिया का इलाज कराने अजमेर जाती थीं। वह दो-चार दिन में फोन कर बताती रहीं कि वह जयपुर है या जोधपुर। मंगलवार को फैसला आने से पहले ही भास्कर टीम उसके सरकारी घर पहुंच गई तो नौकर हिम्मत ने बताया कि मैडम और साहब तो सुबह 7 बजे ही कोर्ट के लिए निकल गए। कोर्ट में तलाशा, मगर दोनों वहां भी नहीं थे। फिर उन्हें फोन लगाया गया, परंतु दोनों के मोबाइल फोन भी बंद थे।

एसीबी ने छापा मारा, नोटिस चस्पां

अग्रिम जमानत खारिज होने पर एसीबी के एसपी अजयपाल लांबा ने मीणा की गिरफ्तारी के लिए छापे मारने शुरू कर दिए। एसीबी टीम पीडब्ल्यूडी कॉलोनी स्थित सरकारी आवास पर गई तो मीणा व उसके पति पवन कुमार मित्तल नहीं मिले। जांच अधिकारी मुकेश सोनी ने घर पर नोटिस चस्पां कर दिया है कि इस मामले में उससे व उसके पति, दोनों से अनुसंधान किया जाना है। दोनों को बुधवार सुबह 11 बजे एसीबी ग्रामीण चौकी में उपस्थित होना है।

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