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बाड़मेर में बादाम की आकृति के दुर्लभ जीवाश्म मिले

3 वर्ष पहले
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जोधपुर| विश्व से डायनासोरों के लुप्त होने के बाद बाड़मेर शहर में जेएनवीयू भू विज्ञान विभाग की टीम को फिल्ड वर्क के दौरान बाड़मेर में पेलियोसीन काल के बादाम जितनी आकृति के जीवाश्म मिले हैं। जेएनवीयू भू विज्ञान के प्रो. एससी माथुर एवं उनकी टीम को मिले जीवाश्म की पहचान विलुप्त मई मक्खी (मे फ्लाई) के रूप में की गई है। जो पेड़ के मोटे तनों में छत्ते की तरह कॉलोनी रूपी रचना के तहत पाए गए। विभाग का दावा है, कि ये जीवाश्म भारत में सबसे पहले बाड़मेर शहर के गेहू गांव की पहाडिय़ों पर मिले, जो कि उत्तम एवं अविकल प्रजाति के जीवाश्म है।

टीम के प्रमुख सदस्य जेएनवीयू भू विज्ञान व प्राणी शास्त्र के सहायक प्रोफेसर डाॅ. वीएस परिहार एवं डाॅ. शंकरलाल नामा ने बताया, कि बादाम एवं कैप्सूल आकृति के कुछ मिमी से तीन सेंटीमीटर बड़े द्विआयामी जीवाश्म पेड़ों के तनों में अपना आश्रय स्थल बनाते थे। जो लाखों की संख्या मे एक कॉलोनी के रूप में बालू पत्थर में परिलक्षित है। इस खोज में सबसे महत्वपूर्ण बात यह, है कि भारत में पहली बार और विश्व में चौथी जगह इस तरह के जीवाश्म की खोज की गई हैं। ये जीवाश्म उष्ण कटिबंधीय (ट्रोपिकल) वातावरण की नदियों के अवसादन में बनते हैं। ऐसे दुर्लभ परिलक्षित जीवाश्म बाड़मेर से सात किमी दूर लूणू पहाडिय़ों पर भी मिले है।

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