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आचरण शुद्धि के लिए विचार शुद्धि जरूरी: मुनि पदमचंद्र

3 वर्ष पहले
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महिलाबाग स्थित चौथ भवन में शुक्रवार को प्रवचन प्रभावक डाॅ. पदम मुनि ने धर्म सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा, आचार शुद्धि और विचार शुद्धि ये दोनों एक दूसरे के पूरक हंै। विचार के बिना आचार की शुद्धि नहीं और आचार के बिना विचार की शुद्धि नहीं। पूरक के अभाव में अपूर्णता है। उन्होंने कहा, किसी के विचार तो बहुत ही नेक है पर आचरण विचारों के बिलकुल विपरीत अभद्र और असुहाना होने पर उसके आचरण से घृणा होने लग जाती है। आचार और विचारों की शुद्धि, विनय और विवेक का व्यवहार, ये जीवन को सुसंस्कृत व परिष्कृत बनाने वाले हैं। मुनि ने कहा, आचरण और विचार शुद्धि के साथ वाकशुद्धि का बहुत बड़ा महत्व है। आचार और विचार दोनों शुद्ध होने से जीवन में निखार आ जाता है।

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