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आज से शहर के भीतर भी 50 हजार से अधिक माल के परिवहन करने पर लगेगा ई-वे बिल

3 वर्ष पहले
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देश के 19 राज्यों एवं केंद्र शासित राज्यों में लागू होने के बाद रविवार से प्रदेश में भी इंट्रा स्टेट ई-वे बिल प्रणाली लागू होगी। इसके तहत 50 हजार से अधिक माल के राज्य के भीतर भी परिवहन करने पर यह व्यवस्था लागू होगी। इंटर स्टेट ई-वे बिल प्रणाली लागू होने के बाद अब इंट्रा यानी राज्य के भीतर ई-वे बिल प्रणाली व्यवस्था शुरू की जा रही है। इसमें यदि बिल में माल की टैक्स सहित कीमत 50 हजार रुपए से अधिक है तो माल पर ई-वे बिल जनरेट करना पड़ेगा। यदि एक ही बिल से करमुक्त माल एवं कर योग्य माल दोनों का परिवहन होता है तो कन्साइनमेंट वैल्यू की गणना करने के लिए उसमें टैक्सेबल माल की कीमत एवं टैक्स की राशि ही जोड़ी जाएगी। करमुक्त माल की कीमत को 50 हजार रुपए की लिमिट तय करने के लिए कन्साइनमेंट वैल्यू की गणना में नहीं जोड़ा जाएगा। जैसे कन्साइनमेंट वैल्यू साठ हजार रुपए है, जिसमें कर योग्य एवं करमुक्त माल व टैक्स की राशि सम्मिलित है और इसमें 25 हजार रुपए का कर मुक्त माल है तो इसे घटाने पर कन्साइनमेंट वैल्यू 35 हजार रुपए ही होने से माल पर ई-वे बिल नहीं जनरेट करना पड़ेगा। जीएसटी में करमुक्त सभी वस्तुओं एवं जीएसटी से बाहर रहे लिकर, पेट्रोल, डीजल, क्रूड, नेचुरल गैस, एटीएफ के परिवहन की दशा में माल पर ई-वे बिल नहीं बनाना पड़ेगा। माल के परिवहन पर ई-वे बिल को जनरेट करने के 24 घंटे के भीतर ऑनलाइन कैंसिल किया जा सकता है। पार्ट बी को अपडेट करने अर्थात वाहन नंबर दर्ज करने के लिए 15 दिन मान्य होंगे।

जीएसटी में करमुक्त सभी वस्तुओं के परिवहन पर ई-वे बिल नहीं बनाना पड़ेगा

50 किमी से कम दूरी पर माल परिवहन में बिल में केवल वाहन नंबर चेंज करने हैं

अगर माल जयपुर से जोधपुर आता है तो उसके लिए ई-वे बिल जनरेट हुआ होता है पर वह जोधपुर में ट्रांसपोर्ट कंपनी से व्यापारी की दुकान तक पहुंचता है और उसकी दूरी 50 किलोमीटर से अधिक है तो उसे ई-वे बिल पार्ट बी को जनरेट करना होगा। अगर व्यापारी अपने गोदाम या दुकान से माल ट्रांसपोर्ट कंपनी भेजता है और उसकी दूरी 50 किलोमीटर से अधिक है तो उसे ई-वे बिल जनरेट करना होगा। अगर 50 किलोमीटर से दूरी कम है तो उसे केवल पूर्व में जारी हो चुके ई-वे बिल को अपडेट करना है और वाहन के नंबर चेंज करने हैं।

ई-वे बिल नहीं मिला तो होगी कार्रवाई

ई-वे बिल जारी नहीं करने या ई-वे बिल में गलत या अधूरी सूचना भरने पर व्यापारियों का माल परिवहन करने वाले वाहन को मय माल डिटेन या सीज किया जा सकता है तथा उस पर धारा 129 के तहत टैक्स एवं पेनल्टी की कार्रवाई की जा सकेगी।

वीपी सिंह, संयुक्त आयुक्त (प्रशासन) वाणिज्यिक कर विभाग

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