टूटे बाजूडां री लूंग लड़ उलझी-उलझी जाय...। शनिवार सुबह 10 बजे बनाड़ से शुरू हुई आनंद गोठ की बस में सीनियर सिटीजंस जब सिटी की सैर के लिए निकले तो इस लोकगीत पर पूरी मस्ती से नाचते-झूमते दिखे। दोस्तों के साथ स्कूल की बस में जैसे बच्चे घूमने निकलते हैं, वैसे ही ये सीनियर सिटीजंस पूरे उत्साह से लबरेज दिखाई दे रहे थे। दैनिक भास्कर की इस आनंद गोठ में बनाड़ क्षेत्र के 35 लोग भ्रमण पर निकले। पहला पड़ाव हाइकोर्ट की नई बिल्डिंग आया। सीनियर सिटीजंस ने अवलोकन किया और वहां खूब फोटोशूट किए। यहां के इंटीरियर की सभी ने तारीफ की। इसके बाद पाल बालाजी रवाना हुए। दर्शन के बाद सभी साईं धाम पहुंचे और आरती में भाग लिया। यहां से सभी माचिया पार्क पहुंचे जहां पार्क के ऑडिटोरियम में करीब दो घंटे गीत संगीत का दौर चला और फिर सभी लोगों ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों में बैठकर पार्क का भ्रमण किया। इसके बाद डीपीएस चौराहा स्थित न्यू अरोड़ा रेस्टोरेंट में सभी लंच के लिए पहुंचे, जहां मोतिबा नगर, पाल रोड स्थित साईं धाम मंदिर के संचालक गोवर्धन अग्रवाल और उर्मिला अग्रवाल ने सीनियर सिटीजंस का स्वागत किया। इस बार भी आनंद गोठ में आए करीब 90 प्रतिशत सीनियर सिटीजंस ने साईं धाम, माचिया सफारी पार्क और हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग पहली बार देखी। पूरी यात्रा में सभी साथ में हंसते-गाते नजर आए। अधिकतर लोग भले ही एक दूसरे से पहली बार मिल रहे हों, लेकिन जब संगत मिली तो ऐसा लगा जैसे बरसों से एक-दूसरे को जानते हों।
ये बने सफर के साथी : प्रकाशचंद दाधीच, चंद्रावती मालानी, विजयलक्ष्मी राठी, लीला देवी, आशा, रामप्यारी देवी, ऋषी देवी, जिया देवी, गीता देवी, सुआ देवी, देवी, संतोष कंवर, तेजसिंह राठौड़, लक्ष्मणसिंह, आशा, हस्तीमल सैन, आची कंवर, रुकमा कंवर, आशा सेणचा, दाऊलाल टेलर, रेखा भाटी, पार्वती देवी, लाली कंवर, सरिता कंवर, नाथी देवी, शशि शर्मा, भंवरलाल, हरिसिंह सिसोदिया, भारतसिंह, अर्जुनसिंह, विजेंद्रसिंह पूनावत, तेजसिंह राठौड़, और जबरसिंह कच्छवाह।
आनंद गोठ के समापन पर सभी सीनियर सिटीजंस को स्मृति चिह्न के रूप में भ्रमण के दौरान लिया गया ग्रुप फोटो फ्रेम में भेंट किया गया। साईंधाम के गोवर्धन-उर्मिला अग्रवाल, शेखावाटी आर्ट एंड हैंडीक्राफ्ट के ललित जौहरी व भास्कर के जनरल मैनेजर (ऑपरेशंस) बिश्वाकांत सिंह ने स्मृति चिह्न भेंट किए। इस मौके पर ललित जौहरी ने कहा कि सीनियर सिटीजंस के लिए किए गए इस आयोजन से जुड़ना ही अपने आप में रोमांचक है।
माचिया सफारी पार्क में जमी गीत-संगीत की महफिल
माचिया बायोलॉजिकल पार्क में वन्यजीवों को निहारने जाने से पहले वहां स्थित ऑडिटोरियम में सीनियर सिटीजंस की एक महफिल सजी, जिसमें सभी ने अपने टैलेंट को प्रस्तुत किया। थाळी भरने लाई रे खीचड़ो...मारवाड़ी गीत के साथ शुरुआत शशि शर्मा ने की, जिसके बाद दाऊलाल ने घरती काश्मीर री ...गीत प्रस्तुत किया। इस तरह धीरे-धीरे सांवरिया सेठ, गिरिराज और राधा-कृष्ण के भजनों की सरिता भी ऑडिटोरियम में बहने लगी। कौड़ी रे कौड़ी माया जोड़ी, दिन रात मालिक के दरबार में... भजन जब लीला देवी ने सुनाया तो महिलाओं के पैर भी थिरकने लगे। सीनियर सिटीजंस देवी और विजय लक्ष्मी राठी ने जहां किशन प्यारा लागे रे भजन अपनी मधुर आवाज में सुनाया तो नाथी देवी ने आज सूरज भगवान का वार है.. भजन की सुंदर प्रस्तुति दी। वहीं रेखा भाटी ने बडेरां री मनवार पर अपने विचार रखे। इस महफिल में भास्कर की ओर से सभी लोगों को माचिया पार्क के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी भी दी गई।