आठ करोड़ रु. के इस घोटाले में गेहूं आवंटन करने के निर्णय की पुष्टि के लिए एसीबी तत्कालीन उपायुक्त मीणा के ले रही बयान
क्राइम रिपोर्टर | जोधपुर
रसद विभाग के 35 हजार क्विंटल गेहूं घोटाले के मामले में सोमवार को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के तत्कालीन उपायुक्त व आरएएस अधिकारी मुकेश मीणा एसीबी के समक्ष पेश हुए। उन्हें और घोटाले की मुख्य आरोपी निलंबित आईएएस निर्मला मीणा से आमने-सामने पूछताछ की गई। जिस तीन लाइन की चिट्ठी के आधार पर विभाग ने 35 हजार क्विंटल गेहूं आवंटित किए थे, उसकी पत्रावली आरएएस मुकेश के हाथ से ही निकली थी। उनकी सहमति के आधार पर गेहूं आवंटित किए गए थे। यह चिट्ठी आरएएस मुकेश ने ही मंगवाई थी। इसके चलते उनसे पूछताछ कर एसीबी इसकी पुष्टि कर रही है और उनके बयान ले रही है।
आमने-सामने पूछताछ में सवालों से पल्ला झाड़ती रही निर्मला, मुकेश मीणा ने डिमांड आने की बात स्वीकारी
ठेकेदार उपाध्याय को अदालत ने न्यायिक अभिरक्षा में भेजा
एसीबी की पूछताछ के दौरान निलंबित आईएएस निर्मला उनके सवालों से पल्ला झाड़ती रही। वहीं तत्कालीन उपायुक्त मुकेश ने जोधपुर से डिमांड का पत्र आने की बात स्वीकारी है। इस प्रकरण में गिरफ्तार गेहूं सप्लाई ठेकेदार सुरेश उपाध्याय को अदालत ने सोमवार को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया। रविवार को सरेंडर करने के बाद उसकी तबीयत खराब हो गई थी। इसके चलते एमडीएमएच में भर्ती कराया गया था। वहां से डिस्चार्ज होने के बाद न्यायालय में पेश किया गया था।
आज पूरी होगी निर्मला की रिमांड अवधि, कोर्ट में पेश कर फिर लेंगे रिमांड
आठ करोड़ रुपए के इस घोटाले में निलंबित आईएएस निर्मला मीणा की रिमांड अवधि मंगलवार को पूरी हो जाएगी। उन्हें एक बार फिर अदालत में पेश कर एसीबी रिमांड लेने का प्रयास करेगी। गौरतलब है कि मार्च 2016 में निर्मला मीणा ने जयपुर रसद विभाग को तीन लाइन की चिट्ठी लिखी कि शहर में 33 हजार परिवार बढ़ गए हैं, इसलिए 35 हजार क्विंटल अतिरिक्त गेहूं आवंटित किया जाए। यह चिट्ठी रसद विभाग के डिप्टी कमिश्नर मुकेश मीणा ने मंगवाई थी और उन्होंने गेहूं आवंटित कर दिया। निर्मला मीणा की चिट्ठी को सही माना जाए तो प्रति परिवार पांच सदस्य व 5 किलो गेहूं के हिसाब से 8250 क्विंटल गेहूं ही चाहिए था। फिर 35 हजार क्विंटल क्यों मंगवाकर घोटाले को अंजाम दिया गया।