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हाईकोर्ट की बैंच से आदिवासी बेल्ट में राजनीतिक फायदे की कोशिश

3 वर्ष पहले
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राज्य सरकार ने उदयपुर में हाईकोर्ट की तीसरी बैंच खोले जाने की संभावनाओं को तलाशने की कार्रवाई शुरू कर दी है। आगामी विधानसभा चुनाव में आदिवासी बेल्ट की सीटों पर राजनीतिक फायदा लेने की कड़ी में सरकार ने पहली बार इस मामले को आगे बढ़ाया है। गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने गिना भी दिया है कि मेवाड़ में 19 विधायक ट्राइबल है और 50 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा आदिवासी। आदिवासियों के न्याय के अधिकार के तहत हाईकोर्ट बैंच की जरूरत है। अधिवक्ताओं का मानना है कि राज्यपाल को संविधान के तहत अधिकार है। वह आदिवासियों के विकास और जरूरत के लिए हाईकोर्ट बेंच उदयपुर में स्थापित करने की अधिसूचना जारी कर सकते हैं। भूभाग की दृष्टि से राजस्थान देश का पहला राज्य है।

राज्य सरकार का कहना है कि सीएम से हुई बातचीत के आधार पर समिति का गठन किया जा रहा है। समिति की रिपोर्ट पर सरकार कोई निर्णय कर सकती है। हालांकि, हाईकोर्ट की नई बैंच को लेकर विरोध भी है। जयपुर में बैंच खोलने का विरोध आज तक जोधपुर के अधिवक्ता कर रहे हैं। अब उदयपुर को लेकर जयपुर और जोधपुर के अधिवक्ता विरोध में उतर आए हैं। वहीं, कोटा एवं बीकानेर सहित दूसरे शहरों से भी यह मांग उठती रही है। ऐसे में सरकार के लिए नई बैंच की सिफारिश करना आसान नहीं होगा। गौरतलब है कि हाईकोर्ट में 2.60 लाख से ज्यादा प्रकरण पेंडिंग है।

2 राज्य जहां 2-2 बैंच

महाराष्ट्र : हाईकोर्ट की प्रिंसिपल बैंच मुंबई और औरंगाबाद व नागपुर में बैंच।

मध्य प्रदेश : जबलपुर में प्रिंसिपल बैंच, इंदौर एवं ग्वालियर में बैंच।

4 छोटे राज्यों में हाईकोर्ट : मुख्य न्यायाधीश सहित मेघालय हाईकोर्ट में 4, मणिपुर हाईकोर्ट में 5, त्रिपुरा हाईकोर्ट में 4 और सिक्किम हाईकोर्ट में 3 जज हैं। हालांकि, सामरिक दृष्टि से यह हाईकोर्ट महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। यहां प्रकरण भी काफी कम है।

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