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आईएएस निर्मला मीणा ने किया सरेंडर, गेहूं की कालाबाजारी भी कबूली सुसाइड करने की सोची, नोट भी लिख दिया, अब पति को बचाना चाहती है

3 वर्ष पहले
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8 करोड़ के गेहूं घोटाले और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की आरोपी

रात उदयमंदिर थाने में बीती, आज कोर्ट में पेश कर रिमांड लेगी एसीबी

क्राइम रिपोर्टर| जोधपुर

छह बार जोधपुर की डीएसओ रही सीनियर आईएएस निर्मला मीणा को आखिर 8 करोड़ के गेहूं घोटाले केस में एसीबी के सामने सरेंडर करना पड़ा। मीणा इस केस में नहीं फंसती तो शायद इसी जिले की बड़ी अधिकारी होतीं क्योंकि 29 साल की नौकरी में 24 साल वह जोधपुर में ही रही हंै। मगर अब वह जोधपुर सेंट्रल जेल में आने वाली पहली आईएएस अधिकारी बन सकती हंै। मीणा ने खुद को बचाने के लिए हर जतन कर लिए, मगर कोई काम नहीं आए। हालांकि वह सुप्रीम कोर्ट तक डटी रहीं, परंतु मार्च में जब एसीबी के छापे पड़े और एसीबी ने उसके घर से 10 करोड़ की 19 प्रोपर्टी के कागजात निकाल लिए तो उसे समझ आ गया कि अब वह बुरी तरह फंस गई हैं। उसका पति पवन मित्तल भी फंसेगा क्योंकि वह भी अकाउंट अफसर से सेवानिवृत्त हुआ है। उस वक्त मीणा दिमागी रूप से बेहद कमजोर हो गई और उसने आत्महत्या करने की सोच ली। उसने सुसाइड नोट भी लिख दिया था। यह पत्र उसके पति ने देख लिया और वह उसे इलाज कराने अजमेर ले गया। फिर दोनों बच्चे जो बाहर पढ़ाई करते हैं, उन्हें भी बुला लिया। परिवार की हिम्मत मिलने के बाद उसने हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार किया, जब वह फैसला भी खिलाफ आया तो पति के साथ सुप्रीम कोर्ट तक दरवाजा खटखटाया। वहां भी वही हुआ जो निचली अदालतों में हुआ था तो उसे सरेंडर के लिए मजबूर होना पड़ा। अब वह अपने पति को बचाने का प्रयास कर रही हंै। सरेंडर करने वह वकील के साथ आई थीं, पति साथ नहीं था। एसीबी के दूसरे मुकदमे में पति भी आरोपी है, जब उसके बारे में पूछा तो मीणा ने कहा कि वह कहां है, उसे नहीं पता। वह रोते हुए गेहूं की कालाबाजारी कबूल करने लगी और पति को छोड़ने की गुहार लगाती रही। एसीबी के एसपी अजयपाल लांबा ने बताया कि सरेंडर करने के बाद शाम होने से पहले मीणा को पावटा सेटेलाइट अस्पताल ले जाकर मेडिकल कराया गया, फिर उदयमंदिर थाने भेज दिया। गुरुवार सुबह कोर्ट में पेश कर रिमांड लिया जाएगा।

दैनिक भास्कर ने 11 मई को ही बता दिया था

मीणा के पास अब सरेंडर के अलावा कोई रास्ता नहीं है। एसीबी को उसे गिरफ्तारी के लिए हाथ-पैर मारने की जरूरत नहीं, वह खुद आएगी।

चेहरा छुपा कर आईं, बेनकाब हुईं

अब घोटाले की परतें भी खुल जाएंगी

निर्मला मीणा ने दोपहर में सरेंडर किया तो वह पूरा चेहरा ढंके हुए थी। डीएसपी जगदीश सोनी और जांच अधिकारी मुकेश सोनी ने पूछताछ शुरू करने से पहले दुपट्टा हटाने को कहा तो उसने इनकार कर दिया। उसने किसी सवाल का जवाब भी नहीं दिया। बाद में एसपी अजयपाल लांबा पूछताछ करने पहुंचे तब भी कुछ नहीं बोली। थोड़ी सख्ती हुई तो मीणा ने दुपट्टा भी हटाया और कालाबाजारी भी कबूल कर ली। एसपी लांबा ने बताया कि रिमांड लेकर घोटाले की सभी परतें खोली जाएगी। और भी लोग शामिल होंगे तो उनकी भी गिरफ्तारी होगी।

पति से लिया जाएगा काली कमाई का पूरा हिसाब

निर्मला मीणा व पवन मित्तल के नाम से मिली करोड़ों की प्रोपर्टी के कुछ कागजात एसीबी ने रजिस्ट्री ऑफिसों से निकाले हैं। इनमें असली कागजात कहां है, वह मित्तल काे पता है। पचपदरा में रिफाइनरी के पास 20 बीघा जमीन ली हो अथवा माउंट आबू के रिसॉर्ट में छुट्टियां बिताने के लिए कॉटेज खरीदा हो, इनका पैसा कहां से आया, यह भी मित्तल से पता किया जाएगा। तीन बैंकों के लॉकर भी अब तक नहीं खुल पाए थे क्योंकि पति-प|ी दोनों अंडरग्राउंड थे। मित्तल के आने से काली कमाई का पूरा हिसाब लिया जाएगा।

पहली महिला आईएएस होगी जेल की मेहमान

जोधपुर सेंट्रल जेल में भंवरी अपहरण व हत्या मामले के आरोप में पूर्व मंत्री मदेरणा, पूर्व विधायक मलखानसिंह विश्नोई बंद रहे हैं। मलखानसिंह अजमेर शिफ्ट हैं, मदेरणा व इंद्रा विश्नोई यहीं हैं। इसी जेल में सलमान खान कुछ दिन बिता चुके हैं और आसाराम पिछले साढ़े चार साल से बंद है। वैसे तो भ्रष्टाचार के मामलों में आरएएस, आरएमएस व कई इंजीनियर तथा जेडीए के पूर्व चेयरमैन राजेंद्र सोलंकी, जेएनवीयू शिक्षक भर्ती केस में पूर्व कुलपति बीएस राजपुरोहित व पूर्व विधायक जुगल काबरा भी जेल जा चुके हैं, मगर निर्मला मीणा पहली महिला आईएएस होंगी जो इस जेल की मेहमान बनेगी।

बुधवार सुबह 10 बजे निर्मला मीणा के वकील एसीबी के एसपी अजयपाल लांबा के ऑफिस आए और बताया कि दो-तीन घंटे बाद वह सरेंडर कर रही है। इस तरह 1:15 बजे मीणा ने एसीबी की स्पेशल यूनिट में सरेंडर कर दिया।

कस्टडी का पहला दिन

ढाई घंटे में ही खत्म हो गई अफसरी

डीएसपी के सामने कुर्सी पर बैठी मीणा को पानी ऑफर किया गया, मीणा ने मना कर दिया। डीएसपी ने कहा कि इसे अपना ही घर समझें, तो बोली मेरा घर यह कहां से हुआ? डीएसपी बोले कुछ दिन तो यही घर रहेगा। खामोश हो गई मीणा, थोड़ी देर में गिलास उठाया, थाेड़ा नकाब हटाया और पानी पिया। सवालों का दौर शुरू किया तो जवाब नहीं दिया। एसपी ने भी पूछा, फिर भी नहीं बोलीं। एसआई सुमन को भीतर बुला कर एसपी ने कहा कि सच बता दो, नहीं तो यह अपने तरीके से पूछताछ करेगी। इतने में पूरी अफसरी खत्म हो गई, नकाब हटा कर रोने लगीं और हर सवाल का जवाब देने लगीं।

कचौरी खाई, मिठाई का पूछा तो बोली- गिरफ्तारी की मिठाई?

जोधपुर में हर वीवीआईपी विजिट के दौरान खाने व नाश्ते का इंतजाम करने वाली डीएसओ मीणा की एसीबी ने भी खातिरदारी करने में कोई कमी नहीं छोड़ी। पूछताछ लंबी चलने वाली थी और वह दोपहर में ही आ गई थी इसलिए नाश्ता मंगवाया गया। मीणा से पूछा कि वह नाश्ते में क्या लेंगी तो पहले उसने कुछ भी खाने से इनकार कर दिया। कहा गया कि अब घर तो जाना नहीं है, तो बोली कि प्याज की कचौरी खाएंगी। कचौरी मंगवाई गई। इस बीच मीठे में क्या लेंगी? पूछा तो बोली कि उसकी गिरफ्तारी की मिठाई है क्या?

वह सब कुछ जो अाप जानना चाहते हैं

केस क्या: मीणा ने महज 15 दिन के खेल में 8 करोड़ का गेहूं बाजार में बेच दिया। मार्च 16 में उसने जयपुर रसद विभाग को तीन लाइन की चिट्‌ठी लिखी कि शहर में 33 हजार परिवार बढ़ गए हैं इसलिए 35 हजार क्विंटल अतिरिक्त गेहूं दिया जाए। यह गेहूं 7 लाख परिवारों में बंट सकता था, मगर उसे आटा मिलों को बेच दिया गया। हकीकत में तो इतने बीपीएल परिवार बढ़े ही नहीं थे, सितंबर 15 में पोस मशीनें लागू हुईं तब तक 35 हजार क्विंटल गेहूं आता था, मगर राशन कार्ड के सत्यापन व शुद्धीकरण में 33 हजार राशन कार्ड ही फर्जी निकले थे, इसलिए यह संख्या कम कर दी थी। परंतु मीणा ने चार्ज लेते ही इन्हीं लोगों का फिर से गेहूं आवंटित करवा कर बेच दिया।

कोर्ट के दांव

पांच माह पहले यह केस दर्ज हुआ था। गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालतों में अग्रिम जमानत लगाती रहीं। एसीबी कोर्ट से खारिज होने पर जनवरी में हाईकोर्ट गई। चार जजों ने सुनवाई की, उस समय गिरफ्तारी पर रोक लग गई। हाईकोर्ट ने 17 अप्रैल को अग्रिम जमानत खारिज की तो वह सुप्रीम कोर्ट चली गईं। आखिर में 10 मई को सुप्रीम कोर्ट ने भी उसे अग्रिम जमानत नहीं दीं।

रिमांड क्यों

एसीबी मीणा का कस्टोडियल इंटेरोगेशन चाहती थी। गबन की राशि कहां खपाई है, यह पूछना है। क्योंकि छापों के दौरान उसके यहां करीब 10 करोड़ की प्रोपर्टी के कागजात मिले हैं। इसी आधार पर 12 मई को मीणा व उसके पति पवन मित्तल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज हुआ है। प्रोपर्टी खरीद के लिए पैसों का सोर्स भी पता लगाना है।

फरारी में कहां

चार महीनों से चल रहे लुका-छिपी के खेल में मीणा दो माह तक गैर हाजिर होकर फरार रहीं। इस दौरान एसीबी छापे मारती रही तब वह जयपुर, जोधपुर, अजमेर व उदयपुर में इधर-उधर छुपती रहीं। सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद वह पांच दिन तक नोएडा में रहीं और बुधवार सुबह जोधपुर पहुंचीं। पहले अपने सरकारी घर गईं, फिर दोपहर में सरेंडर कर दिया।

जेल के दिन

पूछताछ में एसीबी मीणा के जवाब से संतुष्ट हुई तो रिमांड सप्ताह भर में पूरा हो जाएगा, अन्यथा दस दिन से लंबा भी खिंच सकता है। उसके बाद मीणा को जेल भेजा जाएगा। निचली अदालत से जमानत में मुश्किल हुई तो फिर हाईकोर्ट जाना पड़ेगा। इस तरह उस प्रक्रिया में भी 15 दिन तो लग ही जाएंगे। इस हिसाब से अब 1 महीने तो मीणा का बाहर आना मुश्किल लगता है।

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