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लोककथा को प्रेजेंट में पिरोकर जय ने बनाई डेब्यू मूवी \'गधेड़ो\' एजुकेशन सिस्टम पर प्रहार करती स्टोरी जन्मभूमि जोधपुर में शूट की

3 वर्ष पहले
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गधेड़ो, बड़ा अजीब लगता है ना ये नाम, और फिर किसी फिल्म का हो तो उत्सुकता जागना निश्चित है। इस फिल्म के साथ में डायरेक्टोरियल डेब्यू कर रहे जय शर्मा से हमने पहला सवाल यही पूछा, मूवी का नाम गधेड़ो क्यों? जवाब मिला- फिल्म में एक गधे के माध्यम से आज के एजुकेशन सिस्टम, सरकारी स्कूलों की सच्चाई और शोषित वर्ग को दर्शाया है। किसी पर अंधा भरोसा करने के बाद विश्वास टूटने पर क्या बीतती है, यही बताती है यह कहानी। स्टोरी लोककथा पर आधारित जरूर है, लेकिन इसे आज के परिप्रेक्ष्य में सटायर के रूप में पेश किया है। सरदारपुरा में पले-बढ़े जय का जन्मभूमि जोधपुर से लगाव इतना रहा कि स्टार्ट टू फिनिश शूटिंग झालामंड में ही की। फिल्म में बालिका वधु व हाफ गर्लफ्रेंड फेम विक्रांत मैसी, रंग दे बसंती व हैरी मेट सेजल फेम चंदन रॉय सान्याल, तुम्हारी सुल्लु फेम तृप्ति खानकर व बॉस फेम आकाश धाबड़े मुख्य किरदारों में हैं। फिल्म की स्टोरी, प्रॉडक्शन-डायरेक्शन सब कुछ खुद जय ने किया है। यहां तक कि अन्य रोल्स में भी बचपन के दोस्तों, गांव के बच्चों व परिवार के लोगों को लिया है।

पीके, थ्री इडियट्स, दिल्ली-6 व जिंदगी ना मिलेगी दोबारा जैसी 27 मूवीज में में फर्स्ट असिस्टेंट डायरेक्टर रहे जय शर्मा

सेल्समैन से डायरेक्टर तक सफर

जय शर्मा ने वर्ष 2014 में पहली बार जोधपुर में शूट फिल्म वन नाइट विद द किंग में बतौर सेट प्रॉडक्शन असिस्टेंट काम किया। इसके बाद फिल्मों में कोई मौका नहीं मिला तो एक टेक्सटाइल शोरूम में फॉरेनर्स को कपड़े दिखाते। मन हमेशा मूवीज में ही कॅरियर बनाने का रहा। एक दिन ठानी और मुंबई पहुंच गए। 7 महीने तक 30 लोगों के साथ एक ही डोरमेट्री में रहते। काम मिला नहीं, पैसे खत्म हो गए तो जोधपुर लौटना पड़ा। कुछ समय बाद फिर मुंबई लौटे तो दिल्ली-6 फिल्म में बतौर फिफ्थ असिस्टेंट डायरेक्टर काम मिला। इसके बाद जय ने मुड़कर नहीं देखा। थ्री इडियट्स, जिंदगी ना मिलेगी दोबारा, पीके, दिल धड़कने दो व डैडी जैसी 27 मूवीज में फर्स्ट एडी और 100 एड मूवीज में डायरेक्टर रहे। गत विधानसभा चुनाव से पहले वसुंधरा राजे का कैंपेन एड उनके ही डायरेक्शन में बना।

मैसेज देती मूवीज बनाने के लिए बने डायरेक्टर

इतना काम करने के बाद जय अपने पसंद की फिल्में बनाना चाहते, जो मनोरंजन के साथ सोशल मैसेज भी दें। इसी सोच के साथ पहली फिल्म बनाई है गधेड़ो। फिल्म के सारे कलाकार उनके दोस्त ही हैं। झालामंड गढ़ जहां फिल्म शूट हुई है उसके ऑनर राजवीरसिंह राणावत भी जय के दोस्त हैं। पहली फिल्म और खुद के ही प्रोड्यूसर होने के कारण सबने पूरी मदद की। उन्होंने फिल्म कॉन्स ट्रेवेका और लोकार्नो जैसे कई फिल्म फेस्टिवल्स में भेजी है।

जातरुओं पर बनाएंगे अगली फिल्म

जय कहते हैं- अगली फिल्म जातरूओं पर बेस्ड होगी। इसे मैं जोधपुर में ही बनाऊंगा। जोधपुर में वैसे तो बहुत फिल्मों की शूटिंग हुई है, लेकिन सारी ही जानी-पहचानी जगहों पर। मैं जोधपुर का छोरा हूं, 20 साल मैंने शहर को जिया है। अनदेखी और अछूती लोकेशंस दिखाऊंगा।

जय की फिल्म में मैन आर्टिस्ट से लेकर अन्य कलाकारों तक सभी दोस्त व परिजन हैं। शूटिंग भी झालामंड में की है।

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