एसीबी की पूछताछ में उसने बताया कि वह गृह मंत्रालय के विदेश शाखा में, जहां विस्थापितों के मामले डील किए जाते हैं वहां पोस्टेड है और तीन साल से राजस्थान के दलालों के संपर्क में है। राजस्थान से एलटीवी-नागरिकता की जो भी फाइलें दिल्ली आती थी, वह उन्हें अपने पास होल्ड कर देता था। फिर दलालों को कहता, दलाल विस्थापितों से मिल कर प्रति व्यक्ति हजार-दो हजार रुपए एकत्र करते। पहले तो ये दलाल दिल्ली जाकर पैसा देते थे। छह माह से हाईकोर्ट की याचिका चल रही है, इसलिए वह अपनी ड्यूटी लगवा कर जोधपुर आता और होटल में बैठ वसूली करता था।
एसीबी की गिरफ्त में मिश्रा (बाएं) व तीन अन्य दलाल।
दिनभर सीआईडी एसपी ऑफिस में रहा, रात में पकड़ा गया-
मिश्रा जब भी जोधपुर आया, उसके रहने तथा गाड़ी की व्यवस्था सीआईडी जोधपुर ही करती थी। गुरुवार को वह दिन भर सीआईडी ऑफिस में बैठा रहा और हाईकोर्ट का जवाब तैयार करता रहा। एसीबी की इंटेलीजेंस विंग उसका पीछा कर रही थी, वह भी रात 8 बजे तक सीआईडी आॅफिस के आस-पास बैठी रही। करीब 9 बजे वे होटल पहुंचा और तीनों दलाल पैसा लेकर वहां आए। जैसे ही पैसा दिया गया, एसीबी ने चारों को हिरासत में ले लिया।
दलाल भी विस्थापित थे, अब भारत के नागरिक
नेहरू नगर व डाली बाई मंदिर के पास रहने वाले तीनों दलाल अशोक, भगवानाराम व गोविंद भी बरसाें पहले भारत आए थे, यहां की नागरिकता ले ली। इन्हें पता था कि कौन विस्थापित पैसा देगा, उनके नाम वे मिश्रा को बताते ताकि फाइलें राेक पैसा वसूल सकें। अशोक व गोविंद कोर्ट में टाइपिस्ट का काम करते हैं व भगवानाराम की कपड़े की दुकान है। एसीबी ने दिन में अशोक की दुकान की भी तलाशी ली, वहां 200 विस्थापितों के पासपोर्ट व वीजा दस्तावेज बरामद हुए हैं।
नेक्सस की शिकायत कई बार की: सोढ़ा
विस्थापितों के लिए काम करने वाली सीमांत लोक संगठन संस्था के अध्यक्ष हिंदूसिंह सोढ़ा ने बताया कि केंद्र सरकार को रिजिम दिए 18 माह हो गए हैं। अब तक सिर्फ 2 प्रतिशत लोगों को ही नागरिकता मिली है तथा एलटीवी के भी 88 प्रतिशत केस पेंडिंग है। यह नेक्सस लंबे समय से चल रहा था, उन्होंने प्रिंसिपल सेक्रेटरी व इंटेलीजेंस के एडीजी को कई बार शिकायत की थी। ये लोग अदालतों को गुमराह करते रहे और दिल्ली में फाइलें अटका कर वसूली करते रहे हैं।