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एसीबी ने निलंबित आईएएस मीणा से गबन की राशि का पूछा तो कहा- मेरा सिर चकरा रहा है

3 वर्ष पहले
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गरीबों के नाम पर फर्जीवाड़ा कर आठ करोड़ रुपए का गेहूं घोटाले की आरोपी निलंबित आईएएस निर्मला मीणा ने शुक्रवार को भी एसीबी को जांच में सहयोग नहीं किया। घोटाले के बारे में जब एसीबी ने उससे महज पांच सवाल किए तो आठ घंटे में बार-बार उसका सिर चकरा जाता। इस मामले पूछताछ के दौरान डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल गहलोत ने घोटाले के बारे महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। इस आधार पर शनिवार को एसीबी फिर से मीणा व गहलोत से आमने-सामने पूछताछ करेगी। गहलोत ने अपनी दुकानों का रिकाॅर्ड एसीबी को सौंप दिया है। इस आधार पर इस प्रकरण में एसीबी गहलोत को सरकारी गवाह बनाएगी। वहीं नागरिक आपूर्ति एवं खाद्यान्न विभाग के बाबू शिवप्रकाश शर्मा ने जोधपुर से पत्र मिलने के बाद नोट शीट पर डिमांड लिखकर उच्चाधिकारियों को भेजने की बात मीणा के सामने कबूली, लेकिन मीणा ने जांच में सहयोग नहीं किया। मीणा की रिमांड अवधि पूरी होने के बाद शनिवार को एसीबी मामलात की अदालत में पेश किया जाएगा। एसीबी पांच दिन का फिर रिमांड मांगेगी। खादी एवं नागरिकता आपूर्ति विभाग जयपुर के सीनियर आरएएस अधिकारी मुकेश मीणा को एसीबी ने पूछताछ के लिए तलब किया है।

उदयमंदिर पुलिस थाने से सुबह दस बजे बाद एसीबी की टीम आईएएस मीणा को लेकर स्पेशल यूनिट के ऑफिस पहुंची। यहां पर एएसपी के कक्ष में सवालों का दौर शुरू हुआ। जांच अधिकारी मुकेश सोनी ने मीणा से प्रमुख पांच सवाल पूछे- गबन की राशि कहां गई, आपको कितनी राशि मिली और उसे कहां पर निवेश किया, घोटाले में सहयोगी कौन थे, जयपुर में उच्चाधिकारी कौन घोटाले में शामिल थे। हर सवाल का जवाब देने से पहले मीणा चुप्पी साध लेती या फिर कहती कि इसकी उसे जानकारी नहीं है। किन लोगों ने पूरे घोटाले को अंजाम दिया है, ये जयपुर में बैठे अफसरों को पता है। वहीं गबन की राशि के बारे में पूछने पर तो सीधा सिर ही दुखता था। वह चुप हो जाती और बीमार होने का बहाना बनकर रेस्ट करने का आग्रह करती। इस दौरान महिला एसआई व कांस्टेबल की भी मदद ली गई, बावजूद इसके मीणा ने मुंह नहीं खोला।

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