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लाॅन्ग टर्म वीजा: निस्तारित व लंबित आवेदनों पर असमंजस

3 वर्ष पहले
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राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश गोपालकृष्ण व्यास व रामचंद्रसिंह झाला की खंडपीठ ने लॉन्ग टर्म वीजा के आवेदन पत्रों के निस्तारण की स्थिति को लेकर एफआरओ श्वेता धनखड़ को व्यक्तिगत रूप से 25 मई को तलब किया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार व राज्य सरकार दोनों स्तर पर आवेदन पत्रों के निस्तारण में देरी पर कड़ी नाराजगी जताई।

पाक विस्थापितों के पुनर्वास व अन्य सुविधाओं को लेकर स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लेते हुए दर्ज की गई जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान लांग टर्म वीजा के कितने आवेदन केंद्र सरकार को भेजे गए और कितने निस्तारित किए गए, इस संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं होने पर सुनवाई लंच तक स्थगित कर दी गई। लंच के बाद शुरू हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अधिवक्ता विपुल सिंघवी ने कहा, कि उन्हें केवल पत्र मिला है, उसमें यह बताया गया, कि एफआरओ को निस्तारित प्रकरणों की जानकारी दे दी है, इसके अलावा उन्हें कोई जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई गई है। उन्होंने यह भी कहा, कि केंद्रीय गृह मंत्रालय से इस सुनवाई के लिए जोधपुर आए कर्मचारी पीके मिश्रा को एसीबी ने अपनी निगरानी में ले रखा है। कोर्ट ने इस पर हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा, कि आप तो हमें रिपोर्ट बताइए, कितने आवेदन पत्र मिले और कितने निस्तारित किए गए।

जबकि राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता कांतिलाल ठाकुर ने बताया, कि कुल 2418 आवेदन लांग टर्म वीजा के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को भिजवाए थे, उसमें करीब 798आवेदन पत्र निस्तारित कर दिए गए हैं, शेष आवेदन पत्र लंबित है। इस पर कोर्ट ने उनसे पूछा कि उन्हें मई तक अपडेट चाहिए। निस्तारित और पेंडिंग आंकड़ों को लेकर असमंजस होने तथा स्थिति स्पष्ट नहीं बता पाने की स्थिति में कोर्ट ने एफआरओ को व्यक्तिगत रूप से 25 मई को तलब किया। उन्हें लांग टर्म वीजा के लिए केंद्र गृह मंत्रालय को भिजवाए गए आवेदन पत्रों और निस्तारित किए गए आवेदन पत्रों की स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। न्यायमित्र कमल जोशी व सज्जनसिंह राठौड़ ने भी पैरवी की।

वहीं दूसरी ओर निगरानी में लिए गए गृह मंत्रालय के कार्मिक पीके मिश्रा को एसीबी अपनी कस्टडी में लेकर हाईकोर्ट पहुंची। जैसे ही सुनवाई पूरी हुई, एसीबी ने उसे फिर से अपनी कस्टडी में लेकर एसीबी ऑफिस लेकर गई। दो घंटे तक कोर्ट रूम के बाहर ही एसीबी ने कार्मिक को अपनी निगरानी में ही रखा।

पाक विस्थापित मामले में सुनवाई के लिए एसीबी की कस्टडी में हाईकोर्ट में पेश होने जाते पीके मिश्रा।

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