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मैन पॉवर की कमी के कारण नहीं हो पाती समय पर मेंटेनेंस, प्रतिदिन बह जाता है 10 लाख लीटर पानी

3 वर्ष पहले
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शुक्रवार को न्यू कोहिनूर सिनेमा के आगे केबल डालने वाले ठेकाकर्मियों ने जेसीबी से पीएचईडी की पाइप लाइन फोड़ डाली। ऐसे में मसूरिया व बाॅम्बे मोटर की तरफ होने वाली सप्लाई बाधित हो गई। घरों में पीने का पर्याप्त पानी नहीं आया। जल मित्र मनमोहन सिंह मौके पर पहुंचे अौर ठेकेदार के कर्मचारियों को उलाहना दिया, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद उन्होंने पीएचईडी अधिकारियों को अवगत करवाया, लेकिन करीब एक घंटे बाद पानी बंद किया गया।

21 सब डिवीजन पर औसतन 10 कर्मचारी कर रहे हैं काम

शहर में 300 तकनीकी कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें से करीब 80 कर्मचारी चौपासनी, कायलाना, तखतसागर व झालामंड फिल्टर हाउस पर कार्यरत हैं। शेष 220 कर्मचारी 21 सब डिवीजन में काम रहे हैं। एक सब डिवीजन में आैसतन 50 से 70 किलोमीटर लंबी लाइन है। यानी एक कर्मचारी को करीब 5 से 6 किलोमीटर लंबी लाइन की देखरेख का जिम्मा दिया हुआ है। इसके अलावा कर्मचारी को वाल्व खोलने, पंप चलाने, मेंटेनेंस, विभागीय डाक निस्तारित करने की भी जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में कोई लीकेज या सीपेज की कंपलेन आ भी जाती है तो उसे निकालने के लिए कर्मचारी के पास समय ही नहीं होता।

20 हजार लोगों के पीने जितना पानी रोजाना सड़कों पर व्यर्थ बह जाता है

सड़क पर फूटी लाइन, रोज बहता है हजारों लीटर पानी

विद्याशाला स्थित मावड़ियों की घाटी मोड़ पर एक घरेलू पाइप लाइन पिछले एक साल से फूटी होने से सड़क पर रोजाना हजारों लीटर पानी फालतू बहता है। पाइप लाइन के ऊपर से रोजाना चार सौ से पांच वाहन गुजरते हैं और सड़क पर पानी ही पानी फैल जाता है, लेकिन पीएचईडी ने आज तक इसे ठीक नहीं किया।

70 रुपए में लीकेज निकालने का ठेका, कैसे रोके पानी

पीएचईडी ने शहर के सभी मुख्य मार्गों पर स्थित पाइप लाइनों के लीकेज को ठीक करने का ठेका अनिल गहलोत को दे रखा है, जिन्हें प्रति लीकेज तकरीबन 70 रुपए मिलते हैं। राशि कम होने से ठेके के कर्मचारी भी कई दिनों तक लीकेज नहीं निकालते हैं। ऐसे में पीएचईडी न तो अपने कर्मचारियों से लीकेज को दुरुस्त करवा पा रही है और न ही ठेके के कर्मचारियों का उपयोग हो रहा है। लिहाजा भुगतना जनता को पड़ रहा है। शहर में आए दिन कई क्षेत्रों में जल व्यर्थ बह रहा है, मगर विभाग मौन है।

नाले में लगे वाल्व से व्यर्थ बह रहा पानी

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय महात्मा गांधी के बाहर कॉर्नर पर नाले के अंदर लगा वाल्व रोजाना लीक होता है। वाल्व का प्रेशर इतना होता है कि तीन फीट गहरे गड्ढे के अंदर से भी पानी का प्रवाह बहता रहता है। पानी बहने से लाेगों का यहां से निकलना मुश्किल हो गया है। कई बार आसपास के लोगों ने जलदाय विभाग से शिकायत भी की मगर विभाग ने अभी तक इस ओर ध्यान नहीं दिया है।

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