कम्युनिटी रिपोर्टर | जोधपुर
पंडित ऋषिराज गौड़ ने कहा, कि ‘जाने बिनु न होई परतीती, बिनु परतीति होई नहिं प्रीती’ यानी सर्वव्यापक परमात्मा को जानकर ही उन पर प्रतीति यानी विश्वास किया जा सकता है। इसके लिए स्वयं अपने भीतर निरीक्षण करके देखना है, कि क्या सचमुच मुझमें शांति है। विश्व के सभी संतों, सत्पुरुषों और मुनियों ने यही सलाह दी है कि ‘अपने आपको जानो’। वे रविवार को झालामंड चौराहा, महादेव मंदिर के पीछे स्थित गोवर्धन वाटिका में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत के पहले दिन साधकों का मार्गदर्शन कर रहे थे।
पवन सोनी व मीडिया प्रभारी मनोज सिनावड़िया ने बताया, कि सुबह 11 बजे हरिसभा आश्रम, मीरा नगर से कलश यात्रा निकाली गई। बैंडबाजों की स्वरलहरियों के साथ शुरू हुई कलश यात्रा में 151 महिलाएं कलश धारण किए चल रहीं थीं। राकेश कुमार सोनी और अन्य भक्त भागवत पोथी सिर पर उठाए चल रहे थे। रास्ते में जगह-जगह कलश यात्रा पर पुष्प वर्षा की गई। शिव ज्वैलर्स की ओर से 151 कलश की व्यवस्था की गई। कथा शुरू होने से पहले पंडित ऋषिराज गौड़ का स्वागत किया गया। उन्होंने परीक्षित जन्म एवं शुकदेव आगमन प्रसंग का वर्णन किया। इस दौरान झांकियां भी सजाई गई। कथा 27 मई तक सुनाई जाएगी। इस अवसर पर रामगोपाल, नवर|मल, दुर्गाराम, हरिनारायण, कन्हैयालाल, पन्नालाल सोनी, श्री श्रीयादे माता पावन धाम अध्यक्ष मोतीलाल प्रजापत, सुरजाराम, प्रेमाराम, डॉ. महेंद्र कुमावत, मनोज, कैलाशचंद्र, परीक्षित, सरिता, प्रिया, भगवती, प्रीति, संजीवनी, सुरेंद्र रामावत, रेवत, सोमराज, शंकर ओडिया, राकेश बटाणिया, भोमाराम बंजारा आदि मौजूद थे।
कृष्ण जन्म का वर्णन
कैलाश नगर स्थित शिव मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन कृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। कथा वाचक बाल व्यास अभिषेक शास्त्री महाराज ने कृष्ण जन्म का वृतांत सुनाया। महेंद्र गौड़ के भजनों पर श्रोता भावविभोर हो गए। महेश दाधीच ने गऊ सेवा के बारे में बताया।
कलश यात्रा में 151 महिलाएं हुईं शामिल। जगह-जगह पुष्प वर्षा से स्वागत हुआ।