पाकिस्तान में जुल्मों सितम से पीड़ित होकर भारत की शरण में आने वाले हिंदू विस्थापितों से वसूली जानी जाने वाली घूस तीन हिस्सों में बंटती थी। एक विस्थापित से लॉन्ग टर्म वीजा या अन्य आवेदन के फॉर्म प्रोसेस के लिए तीन हजार की वसूली की जाती थी। इसमें से ये राशि गृह मंत्रालय के सीनियर सेक्रेटेड असिस्टेंट (एसएसए) पंकज कुमार मिश्रा सहित दलालों में बंटती थी। ये वसूली हर बार की जाती थी, यानी जितनी बार भी वीजा एक्सटेंशन करने, स्थाई नागरिकता का आवेदन करने, वापस पाकिस्तान जाने या लॉन्ग टर्म वीजा के लिए आवेदन करते समय पैसे वसूले जाते थे। ये राशि सरकारी फीस के अलावा दलाल वसूलते थे। इस तरह एक बार में छह जनों के एक परिवार को तीस हजार रुपए से ज्यादा की चपत लगती थी। इस मामले में गृह विभाग के अनुभाग अधिकारी कुंदनलाल की तलाश की जा रही है। इस मामले में दो दिन पहले एसीबी के जाल में फंसे एसएसए मिश्रा, स्थानीय दलाल अशोक, गोविंद तथा भगवानाराम को सोमवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा।
पैसे जुटाने के लिए दिहाड़ी ही सहारा
पाकिस्तान से भारत आने वाले इन विस्थापितों के पास पैसे तो होते नहीं थे। पैसे जुटाने के लिए इनके पास दिहाड़ी ही सहारा था। परिवार के बड़े लोग सूरसागर क्षेत्र में माइंस में या डालीबाई मंदिर के पास दिहाड़ी कर पैसे जुटाते। ये परिवार अधिकांश राशि इस नेक्सस के हवाले कर देते ताकि उनका फॉर्म प्रोसेस होकर राजस्थान के गृह विभाग के पास आ जाए और इन्हें रहने के लिए एक्सटेंशन मिल जाए। अधिकांश विस्थापित धार्मिक वीजा पर भारत आ रहे हैं, इसके बाद वे वीजा अवधि बढ़वाते और फिर एलटीवी के लिए आवेदन करते। ऐसे में जितनी बार आवेदन किया जाता, उतने ही ज्यादा पैसे इन्हें देने पड़ते हैं। इस मामले में एसीबी की टीम ने रविवार को सूरसागर, डीपीएस सर्किल, डालीबाई मंदिर के पास रहने वाले विस्थापितों से पूछताछ की। अधिकांश पीड़ित लोग इस गिरोह के चंगुल में फंस चुके हैं।