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जोधपुर के वकील बोले- कटारिया पूरे प्रदेश के गृहमंत्री, केवल उदयपुर का हित न सोचें

3 वर्ष पहले
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उदयपुर में राजस्थान हाईकोर्ट की पीठ स्थापित करने को लेकर राज्य सरकार की ओर से कमेटी गठित करने के बाद जोधपुर के वकीलों में काफी नाराजगी है। जोधपुर में वकीलों के दोनों संगठन हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन एवं लॉयर्स एसोसिएशन ने सोमवार को संयुक्त रूप से न्यायिक कार्यों के बहिष्कार का फैसला किया है। ऐसे में जोधपुर शहर में अदालती कामकाज पूरी तरह ठप रहेगा और किसी भी न्यायालय में कोई अधिवक्ता पैरवी के लिए उपस्थिति नहीं देंगे।

हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रणजीत जोशी एवं लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलदीप माथुर ने रविवार को संयुक्त बयान जारी कर एक दिन के हड़ताल की घोषणा की। उन्होंने बताया, कि सोमवार सवेरे साढ़े दस बजे इस संबंध में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री के नाम संभागीय आयुक्त को ज्ञापन देकर उदयपुर में बेंच की मांग पर सरकार की ओर से गठित कमेटी को तत्काल भंग करने की मांग की जाएगी। इसके साथ ही आंदोलन की आगामी रणनीति पर भी विचार किया जाएगा। गौरतलब है कि उदयपुर में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे वकीलों को आश्वासन देते हुए सरकार ने विधि मंत्री पुष्पेंद्र सिंह राणावत की अगुवाई में एक समिति गठित कर दी है। इससे वकीलों में काफी नाराजगी है।

राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के पूर्व महासचिव हस्तीमल सारस्वत ने उदयपुर में हाईकोर्ट बैंच की मांग को लेकर गठित उच्च स्तरीय कमेटी को गैर कानूनी बताते हुए कहा कि गुलाबचंद कटारिया पूरे प्रदेश के गृहमंत्री हैं। सिर्फ उदयपुर का हित न सोचें। उन्होंने आशंका जताई कि अशोक गहलोत का गृह जिला होने से सरकार कोई भी कदम उठा सकती है। उन्होंने जोधपुर के राजनेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।। एसोसिएशन के पूर्व महासचिव मनीष व्यास, जितेंद्र विश्नोई, अतुल डोबाल, एनडी निंबावत, भंवरसिंह शेखावत, राजेंद्र सारस्वत, जुगलकिशोर सेवग, रेखा सांखला और हिम्मतसिंह शेखावत ने भी इस निर्णय का विरोध किया।

मंत्रियों से मिलकर जताया विरोध

हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन एवं लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्षों की अगुवाई में रविवार को वकीलों के एक प्रतिनिधि मंडल ने केंद्रीय विधि राज्य मंत्री पीपी चौधरी एवं केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत से मुलाकात कर उदयपुर में बैंच की मांग का विरोध जताया। वकीलों का कहना था कि राजस्थान के एकीकरण के समय से जोधपुर न्यायिक राजधानी है। उदयपुर में देवस्थान विभाग, आबकारी और खनन विभाग के मुख्यालय हैं। इसी प्रकार बीकानेर में शिक्षा विभाग और अजमेर में राजस्व मंडल के मुख्यालय तय किए गए थे। ऐसे में अब हाईकोर्ट के टुकड़े करने की मांग बेमानी और अतार्किक है। वकीलों ने जयपुर बैंच के खिलाफ जोधपुर में करीब 40 साल से चल रहे विरोध का हवाला देते हुए हाईकोर्ट को मारवाड़ का अधिकार बताया और उदयपुर की मांग को सिरे से खारिज करने की आवश्यकता जताई। दोनों मंत्रियों ने भी इससे सहमति व्यक्त करते हुए जोधपुर के साथ अन्याय नहीं होने देने का भरोसा दिलाया है।

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