शिकायतकर्ता ने अपर कलेक्टर को दिया आवेदन
भास्कर संवाददाता | बड़वानी
जिले में सरकारी योजनाओं में अब तक पात्र व्यक्ति को लाभ दिए बिना राशि निकालने के मामले सामने आते थे लेकिन अब दो विभागों द्वारा आंगनवाड़ी भवनों की मरम्मत के नाम पर दो करोड़ रुपए से ज्यादा राशि के घोटाले का मामला सामने आया है।
शिकायतकर्ता मोहम्मद फैयाजुद्दीन हाशमी ने जनसुनवाई में अपर कलेक्टर को आवेदन दिया था। हाशमी ने बताया पीडब्ल्यूडी व आरईएस विभाग ने जिले में 62 से अधिक भवनों की डुप्लीकेसी कर 2 करोड़ रुपए से अधिक राशि का भ्रष्टाचार किया है। उन्होंने बताया जिले में 101 भवनों में डुप्लीकेसी हुई है लेकिन दोनों विभाग अब पूरी जानकारी नहीं दे रहे हैं। अब तक सिर्फ 62 भवनों की जानकारी सामने आई है। उन्होंने पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन ईई जीपी पटेल व आरईएस के ईई एसएस डावर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है।
दो साल पहले आंगनवाड़ी भवनों की मरम्मत के लिए दो विभागों ने कराए काम
बारिश में छत से टपकता है पानी, फर्श भी नहीं लगाए
जुलवानिया के आदिवासी माेहल्ला के आंगनवाड़ी भवन में पीडब्ल्यूडी ने 118309.47 रुपए व आरईएस 91947 रुपए का काम होना बताया है। इसी तरह बड़वा फलिया में भवन की मरम्मत पर पीडब्ल्यूडी ने 106057.33 व आरईएस ने 88758 रुपए खर्च होना बताया है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने बताया बड़वा फलिया के आंगनवाड़ी भवन की मरम्मत दो साल पहले शुरू हुई थी लेकिन फर्श लगाने की बजाय बंडा डाला। छत की मरम्मत की गई। बावजूद बारिश में छत से पानी टपकता है। छत की मोटाई भी पहले की तरह ही है।
पीडब्ल्यूडी ने बगैर प्रशासकीय स्वीकृति के कराए काम
हाशमी ने बताया पीडब्ल्यूडी ने बिना प्रशासकीय स्वीकृति (एएस) आदेश हासिल किए 1.22 करोड़ रुपए खर्च कर दिए, जबकि तकनीकी स्वीकृति ली थी। इसमें भी हर भवन की मरम्मत पर 1 लाख रु. खर्च करने की सीमा थी। बावजूद ज्यादा राशि खर्च करना बताया लेकिन एक भी काम नहीं हुआ है। वहीं आरईएस विभाग ने भी इन भवनों के लिए राशि निकाली है। दोनों विभाग काम को लेकर अपना दावा कर रहे हैं। पूर्णता प्रमाण पत्र भी जारी कर दिए हैं।
विभागों ने बताए ये काम
दोनों विभागों ने भवनों की 21 सेमी यानी 9 से 10 इंच की छत बनाना बताया है। जबकि पहले से बनी छत 10 सेमी, पीडब्ल्यूडी ने 4 व आरईएस ने 7 सेमी की छत बिना तोड़फोड़ के बनाना बताया है। उन्होंने बताया भवनों में 10 सेमी से अधिक मोटाई की छत नहीं है। भवनों में कोटा फर्श व लोहे के नए दरवाजे व खिड़की लगाना दर्शाया है। उन्होंने बताया पीडब्ल्यूडी ने बगैर किसी प्रावधान के कोटा फर्शी पर 40 हजार रुपए, लोहे के दरवाजे-खिड़की पर 20 हजार, सीमेंट पुट्टी पर 20 हजार रुपए खर्च करना बताया है।
गुमराह करने अलग-अलग दर्ज किए काम
पीडब्ल्यूडी ने गुमराह करने के उद्देश्य से कामों को अलग-अलग स्थानों पर दर्ज कर कार्य पूरा होने की दिनांक को छिपाया है। उन्होंने बताया ठेकेदारों पर पेनाल्टी न लगाना पड़े, इसी कारण वास्तविक तारीख नहीं दर्शाई गई। वहीं आरईएस ने आंगनवाड़ी भवन भोरवाडा 1 व 2 में शौचालय पर 35-35 हजार रुपए खर्च कर दिए। जबकि स्टीमेट में प्रावधान ही नहीं था। माप पुस्तिका में इसके प्रमाण है।
दल ने अब तक पेश नहीं की जांच रिपोर्ट
मामले को लेकर उन्होंने सीएम हेल्प लाइन व अधीक्षण यंत्री आरईएस इंदौर को शिकायत की थी। हाशमी ने बताया अधीक्षण यंत्री ने 27 अगस्त 2016 को अफसरों की टीम बनाकर जांच के आदेश दिए थे लेकिन अफसरों ने अब तक जांच रिपोर्ट पेश नहीं की है।