पिछले करीब एक दशक से बाट देख रहे सीवन क्षेत्र के सात गांवों के किसानों की मुराद अब पूरी होने जा रही है। प्रशासन की ओर से क्षेत्र में बाढ़ के पानी की निकासी के लिए सीवन ड्रेन का कार्य शुरू कर दिया गया है।
उम्मीद है कि आगामी रेनी सीजन में बाढ़ के पानी से किसानों को परेशानी नहीं रहेगी। बता दें, ड्रेन न होने से बाढ़ के समय किसानों की सैकड़ों एकड़ धान की फसल बर्बाद हो जाती थी।
इसके निर्माण के लिए किसान एक दशक से संघर्षरत थे। अब इसके बनने से उनकी मुराद पूरी होने की उम्मीद जगी है। इसे सरस्वती ड्रेन आरडी 19050 में डाला जाएगा।
निर्माण पर 93.06 लाख खर्च होंगे : सीवन ड्रेन के निर्माण कार्य पर 93 लाख 6 हजार रूपए खर्च होंगे। सरकार व जिला प्रशासन द्वारा आरसीसी पाइप लाइन की यह ड्रेन आरडी 500 से 11000 तक बनाई जाएगी। प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन द्वारा बनाई जा रही इस ड्रेन से कस्बा सीवन, गांव पोलड, फिरोजपुर, मलिकपुर, रसूलपुर, मांडी सदरा में बरसात का पानी एकत्र होकर सीवन के दाबन क्षेत्र, खेड़ी, गोघ, नागल, घोघ, उमेदपुर व जनेदपुर के किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाता था।
ऐसे बढ़ी थी समस्या : पिछले समय से दाबन एरिया में किसानों ने अपनी फसलों को बाढ़ के पानी से बचाने के लिए कच्चे रास्तों को पक्का करके उसे ऊंचा कर दिया था जिससे बाढ़ का पानी आगे नहीं निकल पाता था और जल भराव का एक कारण यह भी था। किसान डीसी कैथल व वाटर रिसोर्स कैथल से मिले और उन्हें अवगत करवाया कि अंडरग्राउंड चैनल के जरिए नजदीक सरस्वती ड्रेन में पानी डालने से समस्या का समाधान हो सकता है। किसानों के सामूहिक प्रयास से 30 दिसंबर 2017 को बाढ़ कंट्रोल विभाग की इंचार्ज डीसी सुनीता वर्मा ने स्वयं सीवन के दाबन एरिया का अवलोकन कर किसानों के सुझाव को स्वीकृति दी थी। जिसका खाका वाटर रिसोर्स कैथल ने तैयार किया है। सीवन ड्रेन आस-पास के खेतों को बाढ़ के पानी से होने वाले नुकसान के लिए बचाव का काम करेगी। गांव दाबन व आसपास के सैकड़ों एकड़ फसलों को बाढ़ के पानी से बचाने में कारगर सिद्ध होगी।
सीवन | सीवन ड्रेन का कार्य शुरू कराते हुए।