नगर परिषद चेयरमैन चुनाव की तारीख अभी तय नहीं लेकिन भाजपा व कांग्रेस सक्रिय हो गए हैं। 31 सदस्यीय सदन में बहुमत का दावा कर रही भाजपा के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली चेयरमैन के लिए किसी एक नाम को फाइनल करना और दूसरी कांग्रेस विधायक रणदीप सुरजेवाला की स्ट्रेटजी से पार पाना। कांग्रेस के पास 8 पार्षदों का समर्थन है।
अग्रवाल समाज से आने वाले एक पार्षद तो चुनाव लडऩे की पूरी तैयारी कर चुके हैं, लेकिन वो भाजपा के खेमे से नहीं हैं। भाजपा का 21 पार्षदों के समर्थन का दावा है लेकिन इनमें से कम से 4 चेयरमैनी पर दावा जता रहे हैं। भाजपा को अंदेशा है कि किसी एक नाम को फाइनल करते ही पार्षद बगावत न कर दें। शुक्रवार को राज्य मंत्री कृष्ण बेदी ने राय जानने के लिए पार्षदों को बुलाया तो 16 ही पहुंचे।
पांच पार्षद इस बैठक में नहीं पहुंचे थे। एक पार्षद प्रतिनिधि बुलावे पर पहुंचा तो जरूर लेकिन साफ कह दिया कि भाजपा के साथ नहीं है। डीसी ने चुनावी प्रक्रिया के लिए एडीसी पार्थ गुप्ता को अधिकृत किया गया है। बता दें कि पिछली बार वार्ड 28 से पार्षद मोहन लाल शर्मा कांग्रेस की तरफ से उम्मीदवार थे, जिन्हें 11 वोट मिले थे। जबकि भाजपा के यशपाल प्रजापति को 14 वोट मिले थे। पिछली 17 अगस्त को भाजपा के कई असंतुष्ट पार्षदों ने कांग्रेसियों के साथ मिलकर प्रजापति को अविश्वास प्रस्ताव के जरिये कुर्सी से उतार दिया था।
नाम तय होते ही सीएम से मिलेंगे पार्षद
चर्चा है कि भाजपा की ओर से एक नाम तय होते ही समर्थक पार्षदों के दल को सीएम से मिलवाया जाएगा। इसके बाद सभी को शहर से दूर रखा जाएगा और चुनाव वाले दिन ही उनको शहर में लगाया जाएगा। भाजपा खेमे में अग्रवाल व बीसी समाज के पार्षदों के नामों की अधिक चर्चा है।