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700 प्राइवेट बसें चलाने के विरोध में रोडवेज के 618 कर्मी हड़ताल पर रहे, नए भर्ती 42 चालकों को नोटिस

3 वर्ष पहले
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निजीकरण पॉलिसी के तहत 700 प्राइवेट बसें चलाने व मोटर व्हीकल एक्ट संशोधित बिल-2017 को वापस करवाने की मांग को लेकर रोडवेज का मंगलवार को चक्का जाम रहा। डिपो चालक, परिचालक, वर्कशाप, ड्यूटी सेक्शन व क्लेरिकल से 618 कर्मियों ने हड़ताल, प्रदर्शन व विरोध में हिस्सा लिया। विभाग के आदेश पर जीएम कैथल ने इसी साल चालक पद पर ज्वाइन करने वाले 42 कर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। हड़ताल पर बैठे पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि बुधवार को नोटिस वाले चालकों को रूट पर नहीं भेजा तो एकदिवसीय हड़ताल को नए चालकों की बहाली होने तक के समय में बदल देंगे।

मांगों को लेकर हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सयुंक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर सुबह चार बजे हड़ताल का समर्थन करते हुए चालक-परिचालक अपने रूट पर नहीं गए। सोमवार को नाइट पर गई 56 बसें भी मंगलवार सुबह 7:36 बजे तक डिपो में पहुंच गई। बस स्टैंड से सभी 90 रूटों पर दिनभर में एक भी बस नहीं गई। इससे विभाग को 13 लाख रुपए का नुकसान हुआ। हड़ताल पर बैठे कर्मियों ने मांगों को पूरा करने की मांग करते हुए सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। धरने की अध्यक्षता डिपो प्रधान रामफल शिमला व कृृष्ण गुलियाणा ने की। मंच संचालन डिपो सचिव महावीर सिंह व राजकुमार नेपेवाला ने किया। बस स्टैंड पर पहुंचकर बिजली विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, जन स्वास्थ्य विभाग व अन्य संगठनों ने समर्थन किया।

यूनियन पदाधिकारी बोले-42 कर्मियों को रूट पर न भेजा तो फिर करेंगे हड़ताल

कैथल|रोडवेज का चक्का जाम कर नारेबाजी करते रोडवेज कर्मचारी।

एक-एक सीट के लिए हुई मारा-मारी : रोडवेज की हड़ताल के कारण दैनिक यात्रियों का भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्राइवेट बसों व जीपों में एक-एक सीट के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा था। बसों में लोग ठूंसे हुए थे। यात्री राजेंद्र व निशा ने बताया कि उन्हें जींद जाना था। उन्हें बस अड्डा पर आकर पता चला कि हड़ताल है। रोज हड़ताल से लोग परेशान हो चुके हैं। छात्रा निशु ने बताया कि सुबह तो वह किठाना से कैथल बस में आई लेकिन अब उसे वापस जाने में बड़ी समस्या हो रही है। प्राइवेट बसों में जगह नहीं मिल रही है। हड़ताल के कारण जींद, हिसार, अम्बाला, चंडीगढ़, कुरुक्षेत्र रूटों के यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

नारेबाजी के साथ रागनियों का आनंद : रोडवेज कर्मचारियों ने हड़ताल के दौरान सरकार के साथ नारेबाजी कर देशभक्ति की रागनियों का भी आनंद लिया। बस अड्डा में जहां पूरी तरह से माहौल शांत रहा।

ये हैं कर्मचारियों की मांगें

प्राइवेट पॉलिसी के तहत 700 बसें चलाने की योजना को रद्द किया जाए।

मोटर व्हीकल एक्ट संशोधित बिल-2017 को वापस लिया जाए।

केंद्र में 2004 और हरियाणा में 2006 के बाद लगे कर्मचारियों पर तैयार पेंशन नीति को बदलकर पुरानी पेंशन नीति लागू की जाए।

कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए।

समान काम समान वेतन लागू किया जाए।

कंडक्टर व बचे हुए चालकों का रिजल्ट जल्द जारी किया जाए।

कर्मियों ने हर साल किया चक्का जाम

2 सितंबर 2015 में एक दिवसीय चक्का जाम रहा।

2 सितंबर 2016 को एक दिवसीय चक्का जाम रहा।

11 से 13 अप्रैल 2017 को तीन दिवसीय चक्का जाम रहा।

सात अगस्त 2018 को एक दिवसीय चक्का जाम किया।

132 बसें प्रतिदिन करती 52 हजार किमी का सफर तय कैथल रोडवेज में इस समय 132 बसें जिलावासियों की सेवा में लगी हैं। ये बसें प्रतिदिन 90 रूटों पर 52 हजार किमी का सफर तय करते हुए 29 हजार यात्रियों को उनके स्कूल, कॉलेज, शहर, गांव व ऑफिस तक पहुंचाती हैं। बसें चलने से प्रतिदिन रोडवेज को लगभग 13 लाख रुपए की इनकम होती है। कैथल रोडवेज के बेड़े को इस समय 100 बसों की जरूरत है।

आदेश मिले तो दिए 42 कर्मियों को नोटिस

हमारे पास विभाग से आदेश आए कि जो चालक इस वर्ष ज्वाइन करने वाले हैं। उनको कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए। आदेश पर 42 कर्मियों को नोटिस भेजा है। रामकुमार, जीएम कैथल।

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