मलेशिया के काला आलमपुर में खेली गई पहली एशियन महिला सर्कल कबड्डी चैँपियनशिप में गांव देवबन के राजेश कैंरो ने रेफरी की भूमिका निभाई। आठ देशों के बीच हुई प्रतियोगिता में रेफरी के तौर पर अमचयूर कबड्डी फेडरेशन ऑफ इंडिया की तरफ से राजेश कैंरो का चयन किया था।
गांव के बेटे को रेफरी चुने जाने के बाद से ही देवबन के ग्रामीण खुश हैं। प्रतियोगिता में निर्णायक की शानदार भूमिका निभाकर लौटे राजेश कैंरो का बुधवार गांव पहुंचने पर स्वागत हुआ। राजेश के देश लौटने की सूचना गांव पहुंची तो सैकड़ों ग्रामीण बाइकों का काफिला लेकर देवबन कैचीं पहुंच गए। जहां राजेश को खुली जीप में चौपाल तक लेकर आए। राजेश की कामयाबी पर ग्रामीणों की ओर से राजेश को बुलेट बाइक देकर सम्मानित किया। राजेश ने बताया कि 12 से 13 मई तक हुई प्रतियोगिता में भारत, पाकिस्तान, इरान, इराक, नेपाल, इंडोनेशिया, थाईलैंड, श्रीलंका सहित आठ देशों की टीमों ने हिस्सा लिया था। प्रतियोगिता में हुए 16 में से 14 मैचों में रेफरी की भूमिका निभाने का मौका मिला। मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे राजेश ने बताया कि बचपन से ही उनका खेलों के प्रति रुझान रहा है।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से सीपीएड करने के बाद 2010 में उनका चयन शिक्षा विभाग में पीटीआई के तौर पर हुआ। इस समय गांव सौंगल में कार्यरत हैं। राजेश कैंरो ने बताया कि प्रतियोगिता का फाइनल मैच भारत और पाकिस्तान के बीच खेला गया। उस मैच में भी वह बतौर रेफरी तैनात थे जिसमें भारत की टीम ने ऐतिहासिक जीत हासिल की। राजेश कैंरो ने इसके लिए जेएस गहलोट, डीपी रामशरण,डीपी सतपाल पेगा, सतदेव छौत, ईन्द्र, सुरेश कैंदल और ग्रामीणों का आभार जताया।