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डंपिंग ग्राउंड 3 माह में शिफ्ट करने का नहीं मिला लिखित आश्वासन, धरना जारी

3 वर्ष पहले
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भारतीय किसान यूनियन के प्रतिनिधि मंडल व किसानों के बीच हर्जाना व तीन माह में कचरा डंपिंग ग्राउंड शिफ्ट करने पर सहमति हो गई थी। प्रशासन ने पीड़ित किसानों को हर्जाना भी दे दिया, लेकिन मामला अब भी अटका हुआ है। बातचीत के अनुसार डीसी को डंपिंग ग्राउंड को शिफ्ट करने का लिखित आश्वासन 17 मई को देना था, जो किसानों को नहीं मिला, जिससे किसानों में रोष है। भाकियू प्रदेश उपाध्यक्ष सुखपाल, कोषाध्यक्ष सतपाल दिल्लोंवाली ने बताया कि प्रशासन को लिखित आश्वासन देने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

ऐसा कर पंचायती समझौते से प्रशासन पीछे हट रहा है। उन्होंने कहा कि किसान 23 अप्रैल से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहा है, अब वो भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों को हर्जाना देकर प्रशासन ने जिस तरह से बेहतर काम किया है, उसी प्रकार लिखित आश्वासन भी दिया जाना चाहिए। सुखपाल ने बताया कि जब तक प्रशासन उनकी मांगों को पूरा नहीं करता, तब तक उनका धरना जारी रहेगा। चाहे इसके लिए कितना ही समय लगे। बतां दें कि किसान 23 अप्रैल से आगजनी का हर्जाना व कचरा डंपिंग ग्राउंड को शिफ्ट करने की मांग को लेकर धरना दे रहे थे। कई मीटिंगों के बाद किसानों व डीसी के बीच 15 मई को मांगों को लेकर समझौता हुआ था। जिसमें डीसी के आदेश पर पैसा वितरित करने के लिए तहसीलदार के नेतृत्व में बनाई कमेटी ने पीड़ित किसानों को 20 हजार रुपए गेहूं व 3 हजार रुपए फाने के हिसाब से दे दिया। इससे किसान संतुष्ट हो गए, लेकिन दूसरी मांग डंपिंग ग्राउंड को शिफ्ट करने के लिए तीन माह का समय व लिखित आश्वासन की मांग की गई थी, जिसे पूरा नहीं किया।

कैथल | धरने पर बैठे किसान नारेबाजी करते हुए।

पीड़ित किसानों को हर्जाना दिया जा चुका है। डंपिंग ग्राउंड को लेकर उनको आश्वासन दिया गया है। किसानों को अब धरना समाप्त करना चाहिए। डीसी, कैथल

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