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किसानों को 20 हजार गेहूं और 3 हजार फाने के नुकसान का मिला हर्जाना, मुआवजा बाद में मिलेगा
भारतीय किसान यूनियन व डीसी के बीच 24 दिनों बाद 20 हजार रुपए गेहूं, तीन हजार रुपए फानों का हर्जाना व तीन माह में कचरा डंपिंग ग्राउंड शिफ्ट करने पर सहमति बन गई। डीसी ऑफिस में भाकियू प्रतिनिधि मंडल व डीसी के बीच करीब 20 मिनट बातचीत चली।
भाकियू प्रदेशाध्यक्ष रतन मान ने फानों का हर्जाना तीन हजार रुपए कम बताया लेकिन डीसी सुनीता वर्मा बोलीं कि इतना ही मिल सकता है। मान ने कहा कि आप किसी से भी पता करवा लो। यह राशि कम है। इस बात पर कुछ मिनट तक बातचीत हुई, लेकिन डीसी ने अंत में कहा कि पैसा उनके पास है और मामला अब निपटाओ। वे फानों के लिए तीन हजार ही दे सकती हैं। इस पर प्रदेशाध्यक्ष ने सहमति जता दी। सहमति के बाद डीसी ने मौके पर हर्जाने की राशि वितरित करने के लिए पांच सदस्यों की कमेटी गठित करने के आदेश दिए, जिसमें तहसीलदार, नप सचिव, दो किसान सुखपाल व सतपाल दिल्लों वाली व एक पटवारी को शामिल किया। समिति को राशि वितरित करने का अधिकार दिया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामफल कंडेला, सतपाल दिल्लोंवाली, प्रेमचंद शाहपुर, महताब कादयान, सुरेंद्र, वेद सागवान, सुखपाल व दूसरे किसान उपस्थित रहे। तहसीलदार रविंद्र मलिक ने नप सचिव कुलदीप मलिक, भाकियू सदस्य सुखपाल व सतपाल दिल्लोंवाली की उपस्थिति में पीडि़त किसानों को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में बुलाकर 20 किले गेहूं के हिसाब से किसान को 20 हजार की राशि व 39 किले फाने के हिसाब से तीन हजार की नकद राशि किसानों को वितरित कर दी। हर्जाने की राशि सिटी में कचरा उठान ठेकेदार से ली गई हैं। किसानों की दूसरी मांग थी कि प्रशासन लिख कर दे कि तीन माह में कचरा डंपिंग ग्राउंड को शिफ्ट कर दिया जाएगा। बातचीत में यह सहमति भी बनी। डीसी ने कहा कि समिति पर लिख कर देगी। समिति ने हर्जाना तो वितरित कर दिया, लेकिन डंपिंग ग्राउंड को शिफ्ट करने का आश्वासन नहीं दिया। भाकियू प्रदेश उपाध्यक्ष सुखपाल ने बताया कि भाकियू सदस्य मामले को लेकर शाम को फिर से डीसी ऑफिस पहुंचे, लेकिन डीसी मिली नहीं। डीसी से बात करने पर उन्होंने 17 मई को लिखित आश्वासन देने का वादा किया है। इसलिए उन्होंने धरना भी समाप्त नहीं किया है। धरना तब तक जारी रहेगा, जब तक उनको लिखित आश्वासन नहीं मिलता है।
सुनीता वर्मा से बातचीत करते हुए किसान।