प्रेम पुरी बने 400 साल पुराने बाबा राजपुरी डेरा के 22वें महंत
गांव बाबा लदाना स्थित डेरा बाबा राजपुरी में महंत पद को लेकर चल रहा विवाद समाप्त हो गया है। ग्रामीणों की सहमति से संत प्रेम पुरी को महंत बनाया है। वे डेरा की गद्दी संभालने वाले 22वें महंत बन गए।
पूर्व महंत दूजपुरी को मंगलवार शाम हुई पंचायत ने कारोबारी (डेरा में दूसरे नंबर का पद) बनाने का प्रस्ताव रखा था लेकिन उन्होंने कारोबारी बनने से इनकार कर दिया। साधू और पानी चलते ही अच्छे-कहते हुए रात करीब नौ बजे उन्होंने डेरा छोड़ दिया। अब मथुरापुरी को कारोबारी बनाया गया है। पूर्व में बनाई गई 11 सदस्यों की कमेटी भी बर्खास्त कर दी है। विवाद निपटने के बाद डेरा से ज्यादातर पुलिस फोर्स हटा ली है हालांकि सुरक्षा की दृष्टि से कुछ पुलिसकर्मी अब भी तैनात हैं।
रामकृष्ण परमहंस से है डेरा का संबंध : डेरा राजपुरी का इतिहास काफी गौरवमयी रहा। विश्व में प्रसिद्धि हासिल करने वाले अध्यात्मिक गुरु रामकृष्ण परमहंस के गुरु तोता पुरी इसी डेरा के सातवें महंत थे। रामकृष्ण परमहंस ही स्वामी विवेकानंद के गुरु हैं। वर्तमान में महंत बनाए गए संत प्रेमपुरी ने करीब 50 वर्ष पूर्व चोला धारण किया था वे डेरा राजपुरी क्योड़क के महंत रह चुके हैं।
कैथल | डेरा राजपुरी के नए महंत प्रेम पुरी बैठे हुए।
1690 में जन्मे बाबा राजपुरी ने 8 साल में धारण किया चोला
गांव बाबा लदाना में 1690 में बाबा राजपुरी का जन्म हुआ था। जिन्होंने करीब आठ साल की उम्र में गांव बात्ता में जाकर चोला धारण किया और संत सरस्वती पुरी को गुरु बनाया। इसके बाद उन्होंने गांव बात्ता में गुरु से अलग डेरा बनाया। बाबा राजपुरी 52 शक्तिपीठ में शामिल माता हिंगलाज को काफी मानते थे। इसके बाद गांव बाबा लदाना में डेरा की स्थापना हुई। बाबा राजपुरी के 360 धूणे हैं।
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पहले महंत सिद्ध पुरी-10 संतों ने ली है समाधी
डेरा बाबा राजपुरी के पहले महंत सिद्ध पुरी थे, जिन्होंने 1709 में समाधी ली। उनके बाद महंत भंडार पुरी ने 1745, महंत शुद्ध पुरी ने 1778, महंत भण्डार पुरी ने 1803, महंत ज्ञान पुरी ने 1871, महंत तोतापुरी ने 1884, महंत चेतनपुरी ने 1897, महंत हजारी पुरी ने 1905 में समाधी ली। संत दूज पुरी 12 जुलाई 2011 को डेरा के 21वें महंत बने थे। जो इस साल पांच मई तक गद्दीनशीन रहे। करीब 10 दिन गद्दी पर विवाद चलता रहा।
डेरे में प्रतिदिन होती चार टाइम आरती
पुजारी संजय पुरी ने बताया कि डेरा में प्रतिदिन चार बार आरती होती है। पहली आरती सुबह चार बजे, दूसरी भोग आरती दोपहर 11:30 बजे, तीसरी आरती तीन बजे व इसके बाद संध्याकालीन आरती होती है। 31 ज्योत जगाई जाती है। उन्होंने बताया कि डेरा राजपुरी बाबा लदाना की पूजा, बात्ता डेरा का भंडारा और क्योड़क की अलख काफी प्रसिद्ध है। मान्यता है कि बाबा लदाना डेरा में अगर कोई लगातार 12 साल पूजा कर ले या बात्ता डेरा में भंडारा लगा ले अथवा क्योड़क में लगातार 12 साल अलख मांग ले तो सिद्धी हासिल हो जाती है।
डेरा के पास 80 एकड़ भूमि, 135 पशु
गांव बाबा लदाना स्थित डेरा पर दशहरे से अगले दिन विशाल मेला लगता है, जिसमें हरियाणा व आसपास के राज्यों से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां पशुओं की सुख समृद्धि की कामना की जाती है। श्रद्धालु घी, दूध चढ़ाते हैं। चांदनी एकादशी पर भी यहां मेला लगता है। डेरा के पास करीब 80 एकड़ जमीन व 135 पशु हैं। कोई पशु खरीदा नहीं गया मनोकामना पुरी होने पर श्रद्धालु पशुओं को दान देकर जाते हैं। यहां दो समय देसी घी का भण्डारा लगता है। डेरा परिसर में 400 साल पुराना जैल का पेड़ है।
गांव बाबा लदाना स्थित राजपुरी डेरा।