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फैक्ट्स  87.27 लाख एमटी गेहूं अबकी बार प्रदेश की मंडियों से खरीदा गया।

3 वर्ष पहले
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मक्के के दाने उबाल कर खाने से आमाशय मजबूत होता है। खून को भी बढ़ाता है।

पहले मक्के के उबले दानों को चबाया जाए और अंत में इस पानी को पिया जाए, तो यह किडनी और मूत्र तंत्र को बेहतर बनाता है। किडनी की सफाई के लिए यह उत्तम फार्मूला है। आदिवासियों के अनुसार ऐसा करने से पथरी होने की संभावनाएं खत्म हो जाती हैं।

करीब 20 ग्राम मक्के के दानों को कुचलकर एक गिलास पानी में खौलाया जाए और जब यह आधा बचे तो इसमें एक चम्मच डाल दें। इस मिश्रण को बच्चों को दिन में 3 बार देने से वे बिस्तर में पेशाब नहीं करेंगे।

मक्का के भुट्टे को जलाकर उसकी राख तैयार करें और इसे पीस लिया जाए। फिर इसमें अपने स्वाद के अनुसार सेंधा नमक डालकर दिन में 4 बार एक चम्मच फांकी लेने से आराम मिलेगा।

दाने निकालने के बाद बचे मक्के को जलाकर राख बनाएं, चुटकी भर राख को शहद में मिला दिन में 2-3 बार लेने से काली खांसी दूर होगी।

मक्के के दाने बड़े काम के

मक्के के दाने का सेवन करने से खून बढ़ता है, किडनी के लिए अच्छा

मौसम अपडेट

19 तक मौसम रह सकता है प्रदेश में परिवर्तनशील, धूलभरी हवा चलेगी

राजधानी हरियाणा | मौसम में लगातार परिवर्तन हो रहे हैं। 19 मई तक इसी तरह के परिवर्तन जारी रह सकते हैं। प्रदेश के कई जिलों में धूल भरी हवाएं चलने व साथ में कहीं-कहीं बूंदाबांदी या हलकी बरसात की संभावना बन सकती है। कई जिलों में बादल छाए रह सकते हैं। दूसरी ओर दिन का पारा कभी कम तो कभी अधिक होता रहेगा। पड़ोसी राज्य राजस्थान में लू चलने का असर हरियाणा के दक्षिणी जिलों में देखा जा सकता है। पहाड़ों में पश्चिम विक्षोभ के असर से मैदानी इलाकों में सुबह-शाम गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है। 31 मई तक मौसम परिवर्तनशील रह सकता है।

काले चने में खूब फायदे

अंकुरित चने का सेवन करने से पोषक तत्वों का लें दोगुना लाभ

काले चने का प्रयोग किसी भी रूप में किया जा सकता है क्योंकि यह सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता हे। यही नहीं, अंकुरित चने खाने पर इसके पोषक तत्वों का दोगुना लाभ उठा सकते हैं।

फाइबर से भरपूर काले चने को यदि आप नियमित रूप से भिगोकर खाते हैं तो पेट या कब्ज से संबंधित सारी समस्याएं दूर हो सकती हैं. ध्यान रहे इसका प्रयोग छिलकों के साथ ही करें।

यदि आप सुस्त हैं या आपको बहुत ज्यादा थकान होती है तो आप काले चने का सेवन कर सकते हैं. जिस तरह चने खाने से घोड़ा सरपट दौड़ने लगता है। यदि इसका नियमित सेवन करते हैं तो ये आपके पूरे दिन को उर्जावान बनाए रखेगा।

काले चने का नियमित सेवन शरीर में आयरन की कमी नहीं होने देती और इसमें मौजूद फास्फोरस और आयरन नई रक्त कोशिकाओं को बनाने में सहायक होते हैं। हीमोग्लोबिन स्तर को भी बढ़ाते हैं जिससे एनिमिया से बचा जा सकता है।

मंडी समीक्षा

बैगन, हरी धनिया, मटर के दामों में आई थोड़ी तेजी, अन्य सब्जी स्थिर

पानीपत | सब्जी व फल के व्यापारी ज्ञान सिंह बैरागी सीतामाई के अनुसार सब्जियों के दाम कभी कम तो कभी ज्यादा हो रहे हैं। मंडी में मटर 45 से 50 रुपए, बैंगन 25 से 27 रुपए किलो, हरा धनिया 20 से 27 रुपए किलो, लहसुन 35 से 40 रुपए, हरी मिर्च 20 से 22 रुपए किलो, मूली 14 से 16 रुपए किलो, पेठा 8 से 10 रुपए किलो, आलू 15 से 17 और प्याज 10 रुपए किलो, खीरा 10 से 12 रुपए, भिंडी 18 से 20 रुपए किलो, टमाटर 5 से 7 रुपए किलो, अदरक 80 से 90 रुपए किलो, पत्ता गोभी 8-10 रुपए, शिमला मिर्च 10 रुपए किलो,फूल गोभी 15 से 18 रुपए, तोरी 22 रुपए, घीया 8-10 रुपए किलो है।

सेंधा नमक है गुणकारी

सेंधा नमक प्रयोग करने से इम्यून सिस्टम में सुधार, कई रोगांे में लाभ

अगर अक्सर मांसपेंशियों में ऐंठन होती है तो सेंधा नमक राहत पहुंचा सकता है। एक गिलास पानी में थोड़ा सा सेंधा नमक मिला कर पिएं।

जो लोग साइनस और सांस की समस्या से पीड़ित है उन्हें रोजाना सेंधा नमक का सेवन करना चाहिए। सेंधा नमक से गार्गिल करने से गले में सूजन, दर्द, सूखी खांसी और टॉन्सिल से राहत मिलती है। जो लोग ब्रोंकाइटिस, दमा या सांस की अन्य समस्याओं के शिकार है वो सेंधा नमक की भाप ले सकते हैं।

सेंधा नमक जरुरी मिनर्लस प्रदान करता है और आपके इम्यून सिस्टम को सुधारता हैं। इसके अलावा ये संचार, श्वसन और तंत्रिका तंत्र को एक हद तक सुधारता है।

सेंधा नमक दातों को सफेद करता है, मुंह के फ्रेशनर के तौर पर इस्तेमाल होता है।

यह प्रभावी ढंग से पाचन और लार के रस को स्वस्थ बनाए रखता है। सामान्य नमक की बजाय खाने में सेंधा नमक का प्रयोग करें।

यदि आपके पास खेती से संबंधित कोई रोचक फोटो या जानकारी है तो हमें वाॅट्सएप पर भेजें।

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प्याज के रेट गिरे बेचने की जगह भंडारण करने में जुटे किसान

एक एकड़ में उत्पादन कर अच्छी कमाई कर सकते हैं किसान

गुणकारी है गुड़मार, लाभकारी है इसकी खेती, लगातार बढ़ रही मांग और निर्यात

भास्कर न्यूज | हिसार

बेलनुमा एक औषधीय लता है गुड़मार। काष्ठयुक्त रोएंदार इस लता के पत्ते गुणकारी हैं और खेती अति लाभकारी। कई तरह की बीमारियों में यह एक दवा है। खास कर मधुमेह और लिवर संबंधी समस्याओं में इसे बेहद कारगर माना जाता है। इसे मधुमेह का दुश्मन और लिवर का टॉनिक भी कहते हैं। इसमें शर्करा विरोधी तत्वों जिमनेमिक एसिड एबीसी है, इसीलिए यह औषधीय गुण वाल है। इस पर पीले भड़कीले फूलों के गुच्छे लगते हैं। इसकी पत्तियां 5 से 7 सेंटीमीटर लंबी होती हैं। इसके पत्ते चबाने से मुंह का स्वाद थोड़ी देर के लिए समाप्त हो जाता है। इसलिए इसे गुड़मार कहा जाता है। गुड़मार की खेती कर किसान इसे निर्यात कर सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों में लगातार इसका निर्यात बढ़ रहा है।

पत्तियां ही नहीं जड़ भी औषधि : एचएयू के औषधीय, सगंध एवं क्षमतावान फसलें संभाग की मानें तो इसे औषधि के रूप में प्रयोग करते हैं। सिर्फ मधुमेह या लिवर ही नहीं डायरिया, पेचिश, पेट दर्द आदि में उपयोग किया जा सकता है। खास बात है कि गुड़मार के पत्ते ही नहीं बल्कि इसकी जड़ों से भी काफी फायदे होते हैं। इसकी जड़ों का प्रयोग वात रोग, पुराने बुखार में काफी लाभदायक होता है।

सब्जी की खेती कर कई गुणा बढ़ाई आमदनी, 72 एकड़ के बन गए मालिक

रामचंद्र शर्मा | सीवन (कैथल)

गोबिंदपुरा गांव के तीन भाइयों के पास 18 एकड़ जमीन थी। परंपरागत फसलें बोने से उनके परिवार का मुश्किल से गुजर बसर होता था। पंजाब में रहने वाले अपने चाचा से प्रेरित होकर उन्होंने सब्जी की खेती शुरू की तो उनके वारे न्यारे हो गए। इससे जहां आमदनी बढ़ी तो वहीं जमीन रकबा भी चार गुणा तक पहुंचा दिया। कमाई के पैसों से उन्होंने 54 एकड़ जमीन और खरीद ली। जिस पर वे तीनों भाई सब्जी की खेती कर अपनी अलग पहचान किए हुए हैं। तीनों भाई अब 72 एकड़ जमीन के मालिक बन गए हैं।गोबिंदपुरा के प्रगतिशील किसान जंगीर सिंह कंबोज ने बताया कि वह अपने भाई अमरीक सिंह व नरेंद्र सिंह के साथ मिलकर खेती करते हैं। प्रति एकड़ उन्हें औसतन सवा लाख रुपए से अधिक की आमदनी होती है। वे सभी प्रकार से साधन संपन्न है वही क्षेत्र के किसानों के लिए एक मिसाल बने हुए है।

सफल किसान

जठलाना में केसर से महक रहा है किसान के खेत का कोना-कोना

निर्मल सैनी | जठलाना (यमुनानगर)

जठलाना के किसान सोमनाथ के खेत का छोटा सा हिस्सा केसर से महक रहा है। उन्होंने प्रयोग के तौर पर कश्मीर से जानकारी हासिल कर आधा कनाल में केसर की खेती की है। फसल तैयार हो चुकी है। डिब्बे में फूल चुन कर सुखाया जा चुका है। अब इसकी गुणवत्ता जांच कर बाजार मंे पहुंचाने की तैयारी है। उम्मीद के मुताबिक सफलता मिली तो अगली बार बड़े पैमाने पर केसर की कहानी लिखी जाएगी। कश्मीर में 12 महीने ठंड पड़ती है। इसलिए वहां फसल की लंबाई मात्र 2 फीट ही होती है, जबकि यहां पर 4 फीट के करीब है। दोनों की जगह की केसर एक समान है। फसल तैयार करने में 6 महीने का समय लगा है।

जड़ी बूटियों की खेती करने वाले सोमनाथ ने किया प्रयोग, कश्मीर से जानकारी हासिल कर आधा कनाल में केसर की खेती की, आज फसल देखने आ रहे किसान

पानीपत | किसानों के लिए समस्याओं की कमी नहीं है। टमाटर के रेट गिरने से जहां किसान परेशान थे, वहीं अब प्याज ने किसानों को रुलाना शुरू कर दिया है। प्याज के रेट भी गिर गए हैं और मंडियों में किसानों का प्याज 3 से 4 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। इसमें उनका खर्च भी नहीं निकल रहा है। ऐसे में काफी किसान बेचने की जगह भंडारण करने में ही फायदा समझ रहे हैं। यमुना के साथ लगते गांवों में तो प्याज का किसानों ने स्टोर करना शुरू कर दिया है। इसके लिए भी किसानों अतिरिक्त खर्च भी करना पड़ रहा है लेकिन, उम्मीद है कि कुछ माह के बाद रेट बढ़ जाएंगे और उस समय इन्हें बेच कर इस खर्च की भरपाई हो पाएगी।

लीवर टॉनिक और डाइबिटीज में फायदेमंद गुड़मार के पत्ते

हल्की दोमट मिट्टी में उगा सकते हैं

गुड़मार को हर प्रकार की मिट्टी में देश में कहीं भी उगाया जा सकता है। इसके लिए हल्की दोमट मिट्टी ज्यादा अच्छी होती है। इसकी खेती में जल निकासी अच्छी हो, यह जरूरी है। अभी इसकी खेती जंगलों में से एकत्रित किए गए पौधों से ही की जाती रही है। इसे बीज व कलम दोनों से लगाना संभव है। इसके ताजा बीज जनवरी माह में एकत्रित किए जाते हैं। इसके बाद इन्हें नर्सरी में 10 बाई 10 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाया जाता है। इसमें लगभग सप्ताह भर के बाद अंकुरण शुरू होता है। जब नर्सरी में पौधों की ऊंचाई 15 सेंटीमीटर हो जाएं तो उन्हें पॉलीथिन में लगा देना चाहिए। इसकी कलम लगाने के लिए फरवरी मार्च तथा सितंबर अक्टूबर का समय उचित होता है। बेलनुमा पौधा होने के कारण इसके लिए बांस या किसी सहारे की आवश्यकता होती है।

18 साल से कर रहा हूं जड़ी-बूटियों की खेती

पिता से प्रेरणा लेकर जड़ी-बूटियों की खेती शुरू की थी। पिछले 18 साल से यही कर रहा हूं। अब तक सतावर, इशबगोल, कालाबांसा, सफेद मूसली, एलोवेरा, अकरकरा, जीरा व फूलों की खेती कर चुका हूं। करीब 6 वर्ष पहले कैंसर की बीमारी से ग्रस्त होने के बाद भी खेती नहीं छोड़ी। 65 वर्ष की उम्र में अकेले ही 5 एकड़ की खेती संभाल रहा हूं। कई बार कृषि अधिकारी व अन्य प्रशासनिक अधिकारी सम्मानित कर चुके हैं। दो वर्ष पहले श्रीनगर में रहने वाले दोस्त रामकुमार सैनी ने केसर की खेती करने की सलाह दी। केसर की फसल देखने के लिए पिछले साल श्रीनगर में दोस्त के पास गया। वहां अमेरिकन केसर की खेती के फार्म की विजिट की। फिर मैंने भी केसर की खेती करने का मन बनाया। अक्तूबर माह में आधे कनाल भूमि पर केसर की खेती करने के लिए साढ़े आठ हजार रुपए का बीज खरीद कर लाया और केसर की खेती शुरू कर दी। सिली कलां के किसान सोमनाथ ने बताया कि अब उसकी केसर की फसल तैयार है। दूर-दूर से लोग केसर की इस फसल को आकर देख चुके हैं।

दिल्ली, यूपी व पंजाब में जाता है नामधारी खरबूजा

सीवन और गोबिंदपुरा सब्जी उत्पादन के मामले में अपनी एक अलग पहचान बना चुके है। सब्जी के उत्पादन के कारण आज वह हरियाणा में ही नही बल्कि पंजाब, दिल्ली , राजस्थान, यूपी की मंडिय़ों में भी सब्जियों में खासकर अपने नामधारी खरबूजे के कारण उसे इतनी प्रसिद्धी मिली है कि मंंंडी में उसका खरबूजा हाथों हाथ बिक जाता है। क्षेत्र के प्रगतिशील किसान जंगीर सिंह ने बताया कि वह पंजाब के जिला अमृतसर से सन 1970 में गांव सीवन में थे। वह तीन भाई है और उन्होंने यहां आकर 18 एकड़ जीमन खरीदी । जिसमें उसे काफी अच्छा मुनाफा हुआ । उसके बाद तो उन्होंने पीछे मुड़ कर नही देखा।

उत्पादन: 1 एकड़ में 12 क्विंटल पत्ते

इसके पत्तों की औसत उपज 10 से 12 क्विंटल प्रति एकड़ आंकी गई है। इसके पत्ते एक वर्ष बाद तोड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं। पत्तों को अक्टूबर से फरवरी तक तोड़कर साफ करने के बाद छाया में सुखाएं। जड़ों को अप्रैल मई में उखाड़ना चाहिए। जड़ों को धोकर साफ करके छोटे-छोटे भागों में बांटकर सुखाना चाहिए। इसको प्लास्टिक के थैलों में रख सकते हैं।

खेती के लिए सिंचाई प्रबंधन

इसकी खेती के लिए लगभग 5 टन प्रति एकड़ गोबर की गली सड़ी खाद पर्याप्त रहती है। इसे अधिक पानी की आवश्यकता नहीं पड़ती। गर्मी के दिनों में 15 दिन में तो सर्दी में 25 दिन में सिंचाई करनी चाहिए। पौधे लगाने के 25 दिन बाद पहली और 30 दिन बाद दूसरी गुड़ाई करनी चाहिए।

खेत से खुशहाली तक आपके साथ

एक कहानी से समझिए किसानों की व्यथा

यमुना से लगते गांवों में अभी प्याज की काफी खेती हो रही है। वहीं के 12वीं पास अनीश चंद ने बताया कि प्याज का रेट अभी गिरा हुआ है और खर्च भी नहीं निकल रहा। इसलिए पढाई के बाद रोज दोपहर बाद महिला मजदूरों को लेकर प्याज साफ कराकर जमा करा रहा है। कहता है जब भाव बढ़ेंगे तो ही इन्हें बेचेगा। उसका सपना आर्मी में भर्ती होने का है, जिसकी वो तैयारी कर रहा है। अनीश ने प्याज को स्टोर करने का नया तरीका निकाला है। खेत में छोटी-छोटी झोपड़ी बनाई हैं जिनमें हवा जाती रहे और प्याज खराब न हो।

ओलावृष्टि व बारिश का भी नही पड़ा बुरा प्रभाव केसर का पूरा पौधा है उपयोगी

गत दिनों ओलावृष्टि व तेज बारिश का भी इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। फसल में बीमारी व कीड़ा लगने की भी कोई शिकायत नही आई है। नील गाय भी इसे नुकसान नहीं पहुंचाती। केसर के फूलों को तोड़ कर छांव में सुखाकर तैयार किया जाता है। इसके बाद इसके पौधे पर डोडियां आती हैं। जिससे केसर का बीज बनता है। वहीं पौधे का शेष भाग हवन सामग्री बनाने में काम आता है। केसर के बीज का प्रयोग तेल बनाने के लिए भी होता है।

31 हजार हैक्टेयर में होता है प्याज

हरियाणा में वर्ष 2016-17 के बागवानी विभाग के रिकॉर्ड अनुसार 31005 हैक्टेयर में प्याज की खेती की जाती है। इस दौरान 682936 टन प्याज का उत्पादन हुआ था। उत्पादन बढ़ने से मंडी में प्याज 300 से 350 रुपएक्विंटल बिक रहा है।

भावांतर का सहारा: प्याज को भी इस बार सरकार ने भावांतर भरपाई योजना में शामिल किया हुआ है। इसमें रजिस्ट्रेशन का समय 20 दिसंबर से 28 फरवरी था और अब अप्रैल मई में प्याज की बिक्री होती है। इस योजना में प्याज का रेट 500 रुपए प्रति किवंटल निर्धारित किया गया है।

दिल्ली खारी बावली मंडी में बेचने जाऊंगा

किसान सोमनाथ का कहना है कि बागवानी विभाग व प्रशासन से मदद नहीं मिल पा रही है। करीब एक सप्ताह पहले विभाग के डीएचओ ने केसर देखने के लिए देवेंद्र नाम के अधिकारी को भेजा था। वे आए और देख कर चले गए। अब मैं केसर बेचने दिल्ली की खारी बावली मंडी जाऊंगा। बेचने से पहले केसर का लैबोरेटरी में जांच कराएंगे। केसर का बाजार भाव करीब 400 रुपए प्रति तोला (10 ग्राम) है। बागवानी विभाग के डीएचओ हीरालाल ने कहा कि किसान के केसर और उसकी गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी।

पानीपत, गुरुवार 17 मई, 2018 | 02

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