- Hindi News
- National
- लोकल रूट पर डेढ़ बजे के बाद नहीं चलती बसें, प्राइवेट वाहनों में खाने पड़ते हैं धक्के
लोकल रूट पर डेढ़ बजे के बाद नहीं चलती बसें, प्राइवेट वाहनों में खाने पड़ते हैं धक्के
इस विषय में ट्रैफिक मैनेजर पंचकूला डिपो अरविंद शर्मा ने बताया कि स्टाफ की कमी के कारण लोकल रोड पर परेशानी आ रही है। सरकार द्वारा ड्राइवरों की भर्ती की प्रक्रिया चलाई जा रही है अभी काउंसलिंग चल रही है बाद में कंडक्टरों की कमी भी दूर हो जाएगी। आने वाले एक से डेढ़ महीने बाद समस्या का समाधान हो जाएगा।
दो महीने से चंडीगढ़ जाने वाले लोगों को हो रही परेशानी
बलविंदर शम्मी|कालका
हरियाणा रोडवेज की कालका सब डिपो से चंडीगढ़ तक लोकल रोड पर चलने वाली बसें केवल दोपहर 1.30 बजे तक ही चलाई जा रही हैं। उसके बाद बसों का पहिया थम जाता है, जिससे रोज हजारों यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। करीब 2 महीनों से आ रही परेशानी के बारे में रोडवेज स्टाफ और बस कम होने की दलील देकर पल्ला झाड़ रहा है। रोडवेज के सूत्रों के अनुसार कालका सब-डिपो में 55 बसों में से 3 बसें कंडम हो चुकी हैं जबकि 52 बसें बची हैं जिनमें से अगले महीने तक 3 बसें और कंडम होने की स्थिति में है। यही नहीं, यहां पर कंडक्टरों की भी भारी कमी है, जिसके चलते आधी गाड़ियां चल नहीं पा रही सब-डिपो में 55 कंडक्टर, 65 ड्राइवर हैं। जबकि 22 कंडक्टर और 12 ड्राइवर की पोस्ट खाली है। स्टाफ की कमी के चलते कालका से वाया बद्दी रोपड़ रूट को बंद किया जा चुका है। सुबह कालका से हरिद्वार जाने वाली बस भी लंबे समय से बंद की जा चुकी है। हालांकि अंबाला रोड पर बस सर्विस सामान्य होने का भी दावा किया जा रहा है। कालका निवासी जमुनादास, ललित कुमार, साहिल, विशाल शर्मा, रामचंद्र ने बताया कि कालका से चंडीगढ़ पंचकूला आदि के स्कूल-कॉलेजों और दफ्तरों में जाने वाले लोगों को सुबह के समय कम बस सर्विस होने और शाम को वापसी पर कोई बस से न मिलने के कारण यात्रियों को मजबूरन ठूंस-ठूंस कर भरे ऑटो रिक्शा, मैक्सी कैबों में जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है। लोगों ने बताया कि कालका से लोकल बसों के न चलने से यहां पर ऑटो रिक्शा में बढ़ोतरी हुई है जो नियमों का पालन नहीं करते यही नहीं, कई वाहन अवैध रूप से सवारियों को भी ढोते हुए नजर आते हैं, जिससे कभी भी बड़ी दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। कई बार सरकार और अधिकारियों को बस सर्विस बढ़ाने की मांग की गई लेकिन परिवहन विभाग और सरकार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है।
उधर, रोडवेज कर्मचारी इसके लिए बनाई गई नई परिवहन नीति पर भी दोष लगाते हुए कह रहे हैं कि लोकल रूट पर विभाग ने 48 किलोमीटर की स्पीड रखी हुई है जबकि यह स्पीड 35 किलोमीटर की जाए तो इससे कंडक्टर और ड्राइवरों का ओवरटाइम लगेगा जिसका अलग से लाभ मिलता है। परिणामस्वरूप अब ड्राइवर और कंडक्टर अपनी 8 घंटे की ड्यूटी पूरी करके बस को खड़ा कर देते हैं। इसलिए दोपहर 1.30 बजे के बाद चंडीगढ़ लोकल रूट पर बसें नजर नहीं आती। इससे कालका और पिंजौर बस स्टैंड पर यात्रियों की भारी भीड़ इकट्ठा हो जाती है जो लंबे इंतजार के बाद ऑटो या मैक्सी कैब में बैठकर रवाना होते हैं।
दोपहर 12 बजे कालका बस स्टैंड पर खड़ी सिर्फ एक रोडवेज बस
स्टाफ की कमी पूरी करेंगे