पिंजौर, कालका क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए सीएचसी व पीएचसी तो है लेकिन इनमें बहुत सी सुविधाओं का अभाव होने के कारण लोगों को मजबूरन निजी क्लीनिक में जाकर मुंह मांगी फीस देकर इलाज करवाना पड़ रहा है। कालका सीएचसी जिस पर आसपास क्षेत्र के हजारों लोग इलाज के लिए निर्भर रहते हैं। उधर, पिंजौर पीएचसी जिस पर क्षेत्र के करीब 41573 लोग व पिंजौर शहर समेत करीब 59 गांवों के लोग निर्भर हैं।
दोनों जगहों पर डाॅक्टरों की कमी के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। सरकार आज तक इन दोनों जगहों पर ईएनटी और आई स्पेशलिस्ट डाॅक्टर नहीं लगा पाई, जिस कारण इन रोगियों को निजी क्लीनिक में जाकर डाॅक्टरों से मुंह मांगी फीस में अपना इलाज करवाना पड़ता है। यहां पर डाॅक्टर न होने पर लोगों को अगर सरकारी अस्पताल में जाना पड़ता है तो उसके लिए उन्हें सेक्टर 6 पंचकूला जनरल अस्पताल पिंजौर, कालका से करीब 15 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है जहां पर पहले से ही रोगियों की लंबी कतारें रहती हैं। इसके अलावा कई घंटे इस काम में लग जाते हैं। कालका, पिंजौर निजी क्लीनिक में भी इन दोनों रोगों के इलाज के लिए फीस भी काफी होती है। पिंजौर ब्लाॅक महापंचायत के अध्यक्ष हरदेव सिंह ने कहा कि पिंजौर पीएचसी में तो पहले से ही सुविधाओं का अभाव है। आज तक यहां पर सरकार एक एक्ऋरे मशीन तक नहीं लगवा पाई। इसके अलावा कालका सीएचसी में अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं है, जिससे निजी क्लीनिक में जाकर आम आदमी को बजट से बाहर जाकर मजबूरन खर्चा करना पड़ता है। दोनों जगहों पर ईएनटी और आंखाें के डाॅक्टर न होने से लोग परेशान हैं। सरकार इन दोनों जगहों पर इन डाॅक्टरों को लगाए।
कहां पर कितने डाॅक्टर
इस मामले में अधिकारियों से बात करेंगे: एमएमओ
एसएमओ कालका राजीव नरवाल ने बताया कि कालका व पिंजौर में ईएनटी व आई डाॅक्टर परमानेंट नहीं हैं। जबकि कालका में केवल शनिवार के दिन सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक आंखों के डाॅक्टर आते हैं। उन्होंने कहा कि पंचकूला अस्पताल में भी इन डाॅक्टरों का अभाव है। इसके अलावा आंखों के डाॅक्टर को सप्ताह में एक दिन पिंजौर पीएचसी में बैठने के लिए अधिकारियों से बात करेंगे।
भास्कर न्यूज|कालका/पिंजौर
पिंजौर, कालका क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए सीएचसी व पीएचसी तो है लेकिन इनमें बहुत सी सुविधाओं का अभाव होने के कारण लोगों को मजबूरन निजी क्लीनिक में जाकर मुंह मांगी फीस देकर इलाज करवाना पड़ रहा है। कालका सीएचसी जिस पर आसपास क्षेत्र के हजारों लोग इलाज के लिए निर्भर रहते हैं। उधर, पिंजौर पीएचसी जिस पर क्षेत्र के करीब 41573 लोग व पिंजौर शहर समेत करीब 59 गांवों के लोग निर्भर हैं।
दोनों जगहों पर डाॅक्टरों की कमी के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। सरकार आज तक इन दोनों जगहों पर ईएनटी और आई स्पेशलिस्ट डाॅक्टर नहीं लगा पाई, जिस कारण इन रोगियों को निजी क्लीनिक में जाकर डाॅक्टरों से मुंह मांगी फीस में अपना इलाज करवाना पड़ता है। यहां पर डाॅक्टर न होने पर लोगों को अगर सरकारी अस्पताल में जाना पड़ता है तो उसके लिए उन्हें सेक्टर 6 पंचकूला जनरल अस्पताल पिंजौर, कालका से करीब 15 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है जहां पर पहले से ही रोगियों की लंबी कतारें रहती हैं। इसके अलावा कई घंटे इस काम में लग जाते हैं। कालका, पिंजौर निजी क्लीनिक में भी इन दोनों रोगों के इलाज के लिए फीस भी काफी होती है। पिंजौर ब्लाॅक महापंचायत के अध्यक्ष हरदेव सिंह ने कहा कि पिंजौर पीएचसी में तो पहले से ही सुविधाओं का अभाव है। आज तक यहां पर सरकार एक एक्ऋरे मशीन तक नहीं लगवा पाई। इसके अलावा कालका सीएचसी में अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं है, जिससे निजी क्लीनिक में जाकर आम आदमी को बजट से बाहर जाकर मजबूरन खर्चा करना पड़ता है। दोनों जगहों पर ईएनटी और आंखाें के डाॅक्टर न होने से लोग परेशान हैं। सरकार इन दोनों जगहों पर इन डाॅक्टरों को लगाए।
कालका सीएचसी में एक ऑर्थो, दो गायनी, 5 जनरल सर्जन हैं और पिंजौर पीएचसी में दो मेडिकल आॅफिसर व एक डेंटल है। कालका सीएचसी में लगभग दिन में 300 से ज्यादा रोगी आते हैं। पिंजौर पीएचसी में करीब 250 से 300 के बीच प्रतिदिन मरीज आते हैं।